Most of students search over Google for Haryana Board (HBSE) Important Questions 2026. Here is the Main reason because HBSE Board Says that in HBSE Exam 2026 (last 3 Years of Questions will Repeat) so that here are the selected List of Questions of Haryana Board For Class 10.
HBSE Class 10 क्षितिज Important Question Answer 2026
काव्य खंड
पाठ 1 – सूरदास
प्रश्न 1. गोपियों के अनुसार राजा का धर्म क्या होना चाहिए?
या
गोपियों के अनुसार राजधर्म क्या है?
उत्तर – गोपियों के अनुसार राजा का धर्म अपनी प्रजा की रक्षा करना व कल्याण करना होना चाहिए। उसे अपनी प्रजा को किसी प्रकार का भी कोई कष्ट नहीं देना चाहिए। उसे अपनी प्रजा के हित में कार्य करते हुए उनके सुख चयन का ध्यान रखना चाहिए।
प्रश्न 2. गोपियों ने उद्धव को “अति बड़भागी” कहकर किस प्रकार उस पर व्यंग्य किया है?
या
गोपियों द्वारा उद्धव को भाग्यवान कहने में क्या व्यंग्य निहित है?
उत्तर – गोपियों द्वारा उद्धव को अति बड़भागी (भाग्यवान) कहकर वास्तव में उसके बुरे भाग्य पर व्यंग्य किया गया है। जो व्यक्ति श्री कृष्ण के समीप रहकर उसके प्रेम रूपी जाल में नहीं फँसता, वह वास्तव में दुर्भाग्यशाली ही है। यहां गोपियों के कहने का अभिप्राय यह है कि उद्धव के हृदय में श्री कृष्ण के पास रहने पर भी प्रेम की भावना का संचार नहीं हुआ। इसीलिए वह बहुत भाग्यशाली है।
पाठ 2 – राम लक्ष्मण परशुराम संवाद
प्रश्न 1. परशुराम के क्रोध करने पर लक्ष्मण ने धनुष के टूट जाने के लिए कौन-कौन से तर्क दिए?
उत्तर – श्री राम ने सीता स्वयंवर में जब शिव धनुष को तोड़ दिया तब परशुराम अत्यंत क्रोधित हो गए थे। तब लक्ष्मण ने धनुष के टूट जाने पर कहा कि यह धनुष नहीं था बल्कि कोई धनुही थी। वह बहुत पुराना हो गया था। राम के सिर्फ छूने मात्र से ही यह टूट गया इसमें राम का कोई भी दोष नहीं है।
पाठ 3 – आत्मकथ्य
प्रश्न 1. जयशंकर प्रसाद आत्मकथा लिखने से क्यों बचना चाहते हैं? Most Important
या
कवि आत्मकथा लिखने से क्यों बचना चाहता है?
उत्तर – कवि अपनी आत्मकथा लिखने से इसीलिए बचना चाहता है क्योंकि उसे लगता है कि उसका जीवन बिल्कुल साधारण-सा है। उसके जीवन में ऐसा कुछ भी नहीं है जिसे बाकी लोगों को खुशी महसूस हो। कवि का पूरा जीवन दुख और चीजों के अभाव में बीता है। जिसे अब वह किसी और के साथ बांटना नहीं चाहता। कवि के मन में किसी के प्रति कोमल भाव भी था जिसे वह औरों के साथ बांटना नहीं चाहता। इसीलिए कवि अपनी आत्मकथा लिखने से बचना चाहता है।
प्रश्न 2. आत्मकथ्य” कविता का केन्द्रीय भाव स्पष्ट कीजिए। Most Important
या
“आत्मकथ्य” कविता का मूलभाव स्पष्ट कीजिए।
या
‘आत्मकथ्य’ कविता के प्रतिपाद्य को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – ‘आत्मकथ्य’ कविता में हमें कवि के जीवन के बारे में पता चलता है। कवि का जीवन दुख और अभाव में बीता है। उसके जीवन में कुछ खुशी के पल भी थे जिसे वह अब दूसरों के साथ बांटने को तैयार भी नहीं है। यही कुछ कोमल पल उसके जीवन का सहारा बने हुए हैं। उसका जीवन साधारण सा है जिसे वह किसी को बता कर अपने दुख को महसूस नहीं करना चाहता। कवि अपनी बातें बताने की अपेक्षा दूसरों की कहानी सुनना ज्यादा अच्छा समझता है।
पाठ 4 – उत्साह, अट नहीं रही है
प्रश्न 1. “उत्साह” कविता का मूलभाव स्पष्ट कीजिए। Most Important
या
उत्साह” कविता में निहित संदेश स्पष्ट कीजिए।
या
“उत्साह” शीर्षक कविता का सार लिखिए।
या
उत्साह” कविता का केन्द्रीय भाव स्पष्ट कीजिए।
या
“उत्साह” कविता में कवि और बादल में क्या समानता दिखाई देती है?
उत्तर – उत्साह कविता में कवि ने बादलों को उत्साह के प्रतीक के रूप में दर्शाया है। कभी बादलों से कहता है कि वह सारे आकाश में छा जाए और वर्षा करें ताकि इस तड़पती हुई धरती को शीतलता मिल सके। वह बादलों के माध्यम से सभी के जीवन में उत्साह भर देना चाहता है। वह बादलों की गर्जना के माध्यम से मानवता को जागना चाहता है। कवि बादलों के माध्यम से लोगों में नया जोश और उत्साह भरना चाहता है जब इस पूरी धरती पर सभी लोग व्याकुल हैं उस समय बादल सबको वर्षा प्रदान करके शीतलता दें।
पाठ 5 – यह दंतुरित मुसकान, फसल
प्रश्न 1. ‘फसल’ कविता का मूलभाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – कवि ने ‘फसल’ कविता के माध्यम से यह स्पष्ट करने का प्रयास किया है कि जिन फसलों से पैदा हुए अनाज को हम कहते हैं यह एक अनोखा ही जादू है। कवि ने इस फसल को नदियों के पानी का जादू, लाखों हाथों के स्पर्श की महिमा, हजारों खेतों की मिट्टी का गुणधर्म और सूर्य की किरणों का रूपांतरण बताया है। कवि यह दर्शाना चाहता है कि फसल को उगाने के लिए सभी अनिवार्य तत्व मिलकर काम करते हैं और तब फसल उगती है।
पाठ 6 – संगतकार
प्रश्न 1. संगतकार कविता का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए।
या
संगतकार कविता का मूलभाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – संगतकार कविता में कवि ने मुख्य कलाकार का साथ देने वाले सहयोगी कलाकारों की भूमिका पर केंद्रित किया है। कवि कहता है कि हमें उनके योगदान को अनदेखा नहीं करना चाहिए और ना ही समझ में इनको निम्न दृष्टि से देखना चाहिए। समाज में सभी लोग मुख्य कलाकारों को ही सम्मान देते हैं। मुख्य कलाकारों की तरक्की में जितना योगदान उनकी आवाज का है उतना ही योगदान संगतकार का भी होता है। वह संगतकार ही है जो मुख्य गायक को उसके गीत के मुख्य स्वर से विचलित नहीं होने देते हैं। अत: हमें संगतकारों को भी महत्व देना चाहिए।
गद्य खंड
पाठ 7 – नेताजी का चश्मा
प्रश्न 1. “नेताजी का चश्मा” पाठ में निहित संदेश स्पष्ट कीजिए। Most Important
या
“नेताजी का चश्मा” पाठ का मूलभाव स्पष्ट कीजिए। Most Important
उत्तर – ‘नेताजी का चश्मा’ पाठ में चश्मे बेचने वाले का देश प्रेम का वर्णन किया गया है। जब देश का निर्माण होता है तब बहुत सारे लोग इसमें अपना योगदान देते हैं जिनमें से कुछ को लोग जान जाते हैं और कुछ गुमनाम हो जाते हैं। इस पाठ में भी हमें ऐसी ही एक कहानी देखने को मिलती हैं जिसमें मूर्तिकार नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मूर्ति का चश्मा बनाना भूल जाता है। उस कस्बे में कैप्टन नाम का व्यक्ति चश्मा बेचता है जिसे यह दृश्य बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता और वह नेताजी की मूर्ति पर चश्मा लगा देता है। हालदार साहब भी यह दृश्य देखकर उसकी देशभक्ति से प्रेरित हो जाते हैं। कैप्टन की मृत्यु के बाद उसे मूर्ति पर बच्चों ने सरकंडे का बनाया हुआ चश्मा लगाया हुआ था जो हालदार साहब में देशभक्ति की भावना को भर देता है। इस कहानी में भी ऐसे ही बहुत सारे किरदारों को दर्शाया गया है जिन्हें कोई नहीं जानता लेकिन वह देश के निर्माण में अपना योगदान दे रहे होते हैं।
प्रश्न 2. “नेताजी का चश्मा” पाठ के आधार पर पान वाले के चरित्र की किन्हीं दो विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
या
‘नेताजी का चश्मा’ पाठ के पानवाले का रेखाचित्र प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर – नेताजी की मूर्ति के ठीक सामने चौराहे पर पान वाले की दुकान है। पान वाला काले रंग का व्यक्ति है जो शरीर से बहुत मोटा है और उसकी तोंद बाहर निकली हुई है। पान वाला स्वभाव से खुशमिजाज हैं। बार-बार पान खाने की वजह से उसके दांत लाल-काले हो गए हैं। जब भी वह किसी से बात करता है तो पहले अपने मुंह में रखे हुए पान को नीचे थकता है अब यह उसकी आदत बन चुकी है। पान वाला सभी की जानकारियां रखता है और उन्हें बड़े ही खुश मिजाज अंदाज के साथ दूसरों को बताता है। कैप्टन की मृत्यु पर पान वाला भी उदास था।
प्रश्न 3. सेनानी ने होते हुए भी चश्मे वाले को लोग कैप्टन क्यों कहते थे?
या
कैप्टन के चरित्र की विशेषताएं बताइए।
उत्तर – चश्मा बेचने वाला कोई भी स्वतंत्रता सेनानी नहीं था और न ही वह कोई फौजी था। इसके बावजूद भी लोग उसे कैप्टन कहकर पुकारते थे। चश्मे वाले में देशभक्ति की भावना कूट-कूट कर भरी हुई थी। वह अपनी क्षमता के अनुसार देश निर्माण में अपना पूरा योगदान दे रहा था। जब वह नेताजी की मूर्ति पर चश्मा नहीं देखता है तो खुद से चश्मा लगा देता है। उसके मन में देश के स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति सम्मान का भाव था। जब तक वह जीवित रहा उसने कभी भी नेताजी की मूर्ति पर से चश्मा हटाने नहीं दिया। संभवतः उसकी इसी भावना के कारण लोग उसे कैप्टन कहते थे।
पाठ 8 – बालगोबिन भगत
प्रश्न 1. बालगोबिन भगत की पुत्रवधू उन्हें अकेला क्यों नहीं छोड़ना चाहती थी? Most Important
उत्तर – बालगोबिन भगत के परिवार में उसके पुत्र और पुत्रवधू के अतिरिक्त कोई भी नहीं था। पुत्र की मृत्यु हो जाने के पश्चात बालगोबिन भगत ने अपनी पुत्रवधू को उसके घर भेजने का फैसला लिया परंतु उसकी पुत्रवधू उसे अकेला छोड़कर नहीं जाना चाहती थी। वह उनकी सेवा करना अपना कर्तव्य समझती थी। बीमार पड़ने पर बालगोबिन भगत को पानी देने और भोजन करने वाला कोई नहीं था। इसीलिए भगत की पुत्रवधू उन्हें अकेला छोड़कर नहीं जाना चाहती थी।
प्रश्न 2. बालगोबिन भगत पाठ का मूल भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – लेखक रामवृक्ष बेनीपुरी बचपन से ही बाल गोविंद भगत को आदरणीय मानते आए हैं। बालगोबिन भगत एक तेली थे। उस समय तेली को समाज में अच्छा नहीं समझा जाता था। इन सब के बावजूद भी बालगोबिन भगत सबकी आस्था के कारण बने हुए थे। बालगोबिन भगत का स्वभाव साधु की तरह था। वे कबीर के भक्त थे। साधु की पहचान उनके पहनावे से नहीं बल्कि उनके व्यवहार से होती थी। बालगोबिन भगत अपना सब कुछ भगवान की देन मानते हैं इसीलिए जब उनके खेत की पैदावार होती तब सारी पैदावार कबीर मठ में पहुंचा देते थे और बाद में जो प्रसाद के रूप में मिलता उसी से अपना निर्वाह करते थे। बालगोबिन भगत के पुत्र की मृत्यु के बाद उसने अपनी पुत्रवधू को उसके घर भेज दिया था। उसके सभी कार्य दूसरों के हित में थे। इस पाठ के माध्यम से लेखक हमें पाखंडी साधुओं से सावधान करता है और बताता है कि वास्तविक साधु तो वही होते हैं जो सभी का कल्याण चाहे और समाज हित में कार्य करें। और बुरी परंपराओं से समाज को बचाए रखें।
पाठ 9 – लखनवी अंदाज
प्रश्न 1. ‘लखनवी अंदाज’ पाठ में निहित व्यंग्य स्पष्ट कीजिए। Most Important
या
लखनवी अंदाज पाठ का मूल भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – लखनवी अंदाज पाठ के माध्यम से लेखक हमें यह बताना चाहता है कि बिना पात्रों, घटना और विचारों के भी रचनाएं लिखी जा सकती हैं। लेखक अपनी एक घटना का वर्णन करते हुए बताता है कि उसे रेलगाड़ी के डिब्बे में एक नवाब मिलता है जो बड़े ही सलीके से खीरे को खाने की तैयारी कर रहा था। लेकिन लेखक को सामने देखकर वह खीरा खाने में संकोच करने लगता है और लेखक से भी खीरा खाने के लिए पूछता है, जिसमें वह मना कर देता है। नवाबी अंदाज दिखाने के लिए नवाब उस खीरे को तैयार करता है और सूंघकर खिड़की से बाहर फेंक देता है। वह अपनी भूख दबा लेता है और यह दिखाता है कि उसका पेट भर गया है। वह लेखक के सामने यह दिखाना चाहता है कि नवाब इसी तरीके से खीरा खाते हैं।
पाठ 10 – एक कहानी यह भी
प्रश्न 1. मन्नू भण्डारी के पिताजी ने रसोई को “भटियारखाना” क्यों कहा है?
उत्तर – लेखक के पिता के अनुसार रसोई वह भट्टी होती है जिसमें औरतों की क्षमता और प्रतिभा झोंक दी जाती है। मन्नू भंडारी के पिता स्वयं एक विद्वान और समाज सुधारक थे। वह नहीं चाहते थे कि बच्चे सिर्फ घर गृहस्ती तक ही सीमित रहे। वह केवल रसोई घर में ही काम करने को हिन भावना से देखते थे। इसीलिए उनके पिता ने रसोई को भटियारखाना कहा है।
पाठ 11 – नौबतखाने में इबादत
प्रश्न 1. शहनाई की दुनिया में डुमराँव को क्यों याद किया जाता है? Most Important
उत्तर – शहनाई की दुनिया में डुमराँव को इसीलिए याद किया जाता है क्योंकि यहां पर बहने वाली सोन नदी के किनारे पाई जाने वाली नरकट नाम की घास से शहनाई की रीड बनाई जाती है। इसी रीड से शहनाई को फूँका जाता है। इसके अलावा उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ का जन्म भी इसी डुमराँव में हुआ था। उनके परदादा और पिता भी डुमराँव के ही निवासी थे। जिन्होंने संगीत की दुनिया में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
प्रश्न 2. बिस्मिल्लाह खान को शहनाई की मंगल ध्वनि का नायक क्यों कहा जाता है?
उत्तर – जहां भी कहीं कोई उत्सव का आयोजन होता है सबसे पहले वहां बिस्मिल्ला खाँ की शहनाई की ध्वनि सुनाई देती है। इनकी शहनाई की आवाज बहुत अधिक मधुर है और लोगों के सिर चढ़कर बोलती हैं। चाहे गंगा के किनारे स्थित बालाजी का मंदिर हो या विश्वनाथ का मंदिर अथवा संकटमोचन मंदिर हर जगह संगीत के समारोह में बिस्मिल्ला खाँ की ही चर्चा होती रहती है। बिस्मिल्ला खाँ अपनी मधुर शहनाई वादन कला के द्वारा हर किसी के मन को प्रभावित करने में सफल रहते हैं। इसीलिए उन्हें शहनाई की मंगल ध्वनि का नायक कहा जाता है।
पाठ 12 – संस्कृति
प्रश्न 1. पठित पाठ के आधार पर सभ्यता और संस्कृति में अन्तर स्पष्ट कीजिए। Most Important
उत्तर – लेखक ने सभ्यता को संस्कृत का ही परिणाम माना है। हमारा खान-पान, रहन-सहन और जीवन शैली आदि सभ्यता के ही अंतर्गत आते हैं। सभ्यता का संबंध हमारे व्यवहार से रहता है यदि हम विकास के कार्य करते हैं तो हम सभ्य कहलाएंगे और अगर विनाशकारी कार्य करें तो हम असभ्य कहलाएंगे।
प्रश्न 2. संस्कृति” पाठ का मूलभाव स्पष्ट कीजिए। Most Important
उत्तर – प्रस्तुत निबंध में लेखक ने संस्कृति और असंस्कृति के अंतर को स्पष्ट किया है। लेखक बताते हैं कि जिसमें हम मानवता का कल्याण चाहिए वह संस्कृति हैं जबकि इसके विपरीत लूटपाट, भ्रष्टाचार, रिश्वत आदि सभी कार्य असंस्कृति के ही कार्य हैं। लेखक बताता है कि हमें हमेशा संस्कृत बनने का प्रयास करना चाहिए। लेखक का मानना है कि हम जितने अधिक संस्कृत होंगे उतने ही सभ्य होंगे और मानवता की तरक्की होगी। इस पूरे निबंध में कवि ने लोगों को अच्छा बनने पर बल दिया है।