HBSE Class 12 राजनीतिक विज्ञान Important Question Answer 2026

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HBSE Class 12 राजनीतिक विज्ञान Important Question Answer 2026


Book – समकालीन विश्व राजनीति


Chapter 1 – दो ध्रुवीयता का अंत


प्रश्न 1. सोवियत संघ का विघटन किस वर्ष में हुआ ? Most Important

उत्तर – दिसम्बर 1991


प्रश्न 2. शॉक थेरेपी किन दो मुख्य सिद्धान्तों पर आधारित थी ? Most Important

उत्तर – शॉक थेरेपी दो मुख्य सिद्धान्तों पर आधारित थी:

  • बाजार अर्थव्यवस्था की ओर तीव्र परिवर्तन – इसमें राज्य के स्वामित्व वाले उद्योगों का निजीकरण, कीमतों को स्वतंत्र करना तथा अर्थव्यवस्था पर सरकारी नियंत्रण कम करना शामिल था।
  • राजनीतिक एवं आर्थिक उदारीकरण – इसमें कम्युनिस्ट पार्टी की भूमिका को समाप्त करना तथा लोकतांत्रिक राजनीतिक व्यवस्था और आर्थिक सुधारों को अपनाना शामिल था।

प्रश्न 3. भारत- सोवियत संघ मित्रता सन्धि किस वर्ष में हुई ? Most Important

उत्तर – 1971


प्रश्न 4. सोवियत संघ के पतन के कोई दो सकारात्मक परिणाम लिखिए। Most Important

उत्तर – सोवियत संघ के पतन के दो सकारात्मक परिणाम इस प्रकार थे:

  • शीत युद्ध तनाव का अंत – सोवियत संघ के पतन से महाशक्तियों के बीच वैचारिक और सैन्य टकराव में कमी आई।
  • स्वतंत्र राष्ट्रों का उदय – अनेक नए स्वतंत्र देशों का गठन हुआ, जिससे उन्हें अपनी राजनीतिक व्यवस्था और विकास मार्ग चुनने का अवसर मिला।

प्रश्न 5. सोवियत प्रणाली की कोई चार विशेषताएँ लिखें। Most Important
OR
सोवियत प्रणाली की कोई दो विशेषताएँ लिखिए। Most Important

उत्तर – सोवियत प्रणाली की चार प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार थीं:

  • एक-दलीय व्यवस्था – कम्युनिस्ट पार्टी सरकार पर नियंत्रण रखती थी और राजनीतिक विरोध की अनुमति नहीं थी।
  • केन्द्रीयकृत योजना व्यवस्था – राज्य केन्द्रीय योजना संस्थाओं के माध्यम से अर्थव्यवस्था को नियंत्रित करता था।
  • उत्पादन के साधनों पर राज्य का स्वामित्व – उद्योग, भूमि और संसाधन राज्य के स्वामित्व एवं नियंत्रण में थे।
  • सामाजिक कल्याण पर बल – नागरिकों को रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएँ प्रदान की जाती थीं।

प्रश्न 6. द्विध्रुवीयता से क्या तात्पर्य है ?
OR
द्वि-ध्रुवीय विश्व व्यवस्था से आपका क्या अभिप्राय है ?

उत्तर – द्विध्रुवीयता से तात्पर्य ऐसी अंतरराष्ट्रीय शक्ति व्यवस्था से है, जिसमें दो प्रमुख शक्तियाँ या गुट होते हैं और अधिकांश देश इनमें से किसी एक गुट के साथ जुड़े होते हैं।


प्रश्न 7. द्वि-ध्रुवीय व्यवस्था की समाप्ति के लिए उत्तरदायी कारक लिखिए। Most Important
OR
द्विध्रुवीय व्यवस्था के पतन के कोई दो कारण लिखिए।
OR
द्विध्रुवीय विश्व के बिखराव के कोई दो कारण लिखिए।

उत्तर – द्वि-ध्रुवीय व्यवस्था की समाप्ति के लिए उत्तरदायी कारक निम्नलिखित थे:

  • सोवियत संघ की आर्थिक कमजोरी – सोवियत अर्थव्यवस्था अक्षम हो गई और पश्चिमी देशों की तकनीकी व आर्थिक प्रगति की बराबरी नहीं कर सकी।
  • सोवियत संघ में राजनीतिक सुधार – पेरेस्त्रोइका (पुनर्गठन) और ग्लासनोस्त (खुलापन) जैसी नीतियों से कम्युनिस्ट पार्टी का नियंत्रण कमजोर हुआ और समाजवादी व्यवस्था शिथिल पड़ी।
  • हथियारों की दौड़ का बोझ – अमेरिका के साथ निरंतर सैन्य प्रतिस्पर्धा ने सोवियत अर्थव्यवस्था पर अत्यधिक दबाव डाला।
  • सोवियत गणराज्यों में राष्ट्रवाद का उदय – विभिन्न गणराज्यों में स्वतंत्रता की माँग उठी, जिसके परिणामस्वरूप सोवियत संघ का विघटन हुआ।

प्रश्न 8. शॉक थेरेपी मॉडल किसके द्वारा निर्देशित था ? Most Important

उत्तर – विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) द्वारा


प्रश्न 9. किस दल का पूर्व सोवियत संघ की राजनीतिक व्यवस्था पर नियंत्रण था ? Most Important
OR
द्वि-ध्रुवीय व्यवस्था के दौर में सोवियत संघ में किस दल का प्रभुत्व था ?

उत्तर – कम्युनिस्ट पार्टी


प्रश्न 10. बर्लिन की दीवार कब बनी और कब विध्वंस हुई ? Most Important

उत्तर – बर्लिन की दीवार 1961 में बनी थी और 1989 में गिरी।


Chapter 2 – समकालीन सत्ता के केंद्र


प्रश्न 1. आसियान शैली क्या है? आसियान के दो उद्देश्य बताइए। Most Important

उत्तर – आसियान शैली का तात्पर्य दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के बीच शांति, स्थिरता और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए क्षेत्रीय सहयोग की विधि से है।

आसियान के दो उद्देश्य:

  • क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को बढ़ावा देना – सदस्य देशों के बीच संघर्ष रोकना और सामंजस्य बनाए रखना।
  • आर्थिक विकास और सहयोग को प्रोत्साहित करना – सदस्य देशों के बीच व्यापार, निवेश और विकास को बढ़ावा देना।

प्रश्न 2. सार्क (SAARC) के मुख्य उद्देश्य क्या है ? Most Important

उत्तर – सार्क (दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन) के मुख्य उद्देश्य हैं:

  • क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना – दक्षिण एशियाई देशों के बीच आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाना।
  • आर्थिक विकास को मजबूत करना – सदस्य देशों के बीच व्यापार, विकास और गरीबी उन्मूलन को प्रोत्साहित करना।
  • क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को सुधारना – संघर्षों को शांति पूर्ण ढंग से हल करना और क्षेत्र में सामंजस्य बनाए रखना।
  • सांस्कृतिक और सामाजिक विकास को बढ़ावा देना – दक्षिण एशिया के लोगों के बीच आपसी समझ और सहयोग को बढ़ावा देना।

प्रश्न 3. तृतीय विश्व के देशों से आपका क्या अभिप्राय है ? Most Important

उत्तर – तृतीय विश्व के देशों से तात्पर्य उन देशों से है जो शीत युद्ध के दौरान अमेरिका (प्रथम विश्व) और सोवियत संघ (द्वितीय विश्व) के साथ नहीं जुड़े थे। ये देश मुख्यतः एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के नव-स्वतंत्र और विकासशील राष्ट्र थे।


प्रश्न 4. चीन में ‘खुले द्वार की नीति’ की घोषणा कब की गयी थी ?
OR
चीन ने ‘खुले द्वार की नीति सन्  _______ में प्रारंभ की।

उत्तर – 1978


प्रश्न 5. आसियान (ASEAN) में शामिल सदस्य देशों की संख्या _________ है।
OR
‘आसियान’ (ASEAN) में कितने देश सदस्य हैं ?

उत्तर – 10


प्रश्न 6. विश्व में _______ अपनी सुरक्षा पर सबसे अधिक धन खर्च करता है।
OR
विश्व में कौन-सा देश अपनी सुरक्षा पर सबसे अधिक धन खर्च करता है ?

उत्तर – अमेरिका (USA)


प्रश्न 7. ‘दक्षेस ‘ (SAARC) का कार्यालय कहाँ स्थित है ?
OR
‘सार्क’ (SAARC) का सचिवालय _______में स्थित है।

उत्तर – काठमांडू, नेपाल में


प्रश्न 8. दक्षेस (SAARC ) का क्या अर्थ है ? इसके महत्त्व का वर्णन करें। Most Important

उत्तर – सार्क (दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन) दक्षिण एशियाई देशों का एक क्षेत्रीय संगठन है, जिसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देना है।

सार्क का महत्त्व:

  • क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना – सदस्य देशों को आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में मिलकर काम करने में मदद करता है।
  • क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को बढ़ाना – तनाव कम करता है और सदस्य देशों के बीच संवाद को प्रोत्साहित करता है।
  • आर्थिक विकास को सहारा देना – दक्षिण एशिया में व्यापार, निवेश और संयुक्त विकास परियोजनाओं को प्रोत्साहित करता है।
  • सामान्य चुनौतियों का समाधान करना – गरीबी, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरणीय समस्याओं का सामूहिक समाधान करने में मदद करता है।

प्रश्न 9. यूरोपीय संघ की मुद्रा का क्या नाम है ? इसका प्रचलन कब शुरू हुआ ? Most Important

उत्तर – यूरोपीय संघ की मुद्रा का नाम यूरो (€) है। इसका प्रचलन 2002 में शुरू हुआ।


प्रश्न 10. चीन में कृषि क्षेत्र का निजीकरण कब किया गया ?
OR
चीन में खेती एवं उद्योगों का निजीकरण कब किया गया ?

उत्तर – चीन में खेती और उद्योगों का निजीकरण 1978 में डेंग जियाओपिंग द्वारा लागू आर्थिक सुधारों के तहत किया गया।


प्रश्न 11. चीन की ‘खुले द्वार की नीति’ को स्पष्ट करें। Most Important

उत्तर – चीन की ‘खुले द्वार की नीति’ एक आर्थिक रणनीति है, जिसे चीन ने अपनाया ताकि वह विदेशी निवेश, व्यापार और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को प्रोत्साहित करके अपनी अर्थव्यवस्था को वैश्विक बाजार से जोड़ सके। इसका उद्देश्य अर्थव्यवस्था का आधुनिकीकरण, विदेशी पूंजी आकर्षित करना और औद्योगिक एवं तकनीकी विकास को बढ़ावा देना था।

मुख्य विशेषताएँ:

  • विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करना।
  • निर्यात-उन्मुख उद्योगों को बढ़ावा देना।
  • वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ एकीकरण।
  • उद्योग और प्रौद्योगिकी का आधुनिकीकरण।
  • उत्पादकता और आर्थिक वृद्धि बढ़ाने के लिए सुधार।

Chapter 3 – समकालीन दक्षिण एशिया


प्रश्न 1. नेपाल में सन् ………. में लोकतंत्र की स्थापना हुई।
OR
नेपाल में लोकतन्त्र की स्थापना किस वर्ष में हुई ?
OR
किस वर्ष नेपाल को एक ‘धर्म-निरपेक्ष राज्य’ घोषित किया गया?

उत्तर – 2008


प्रश्न 2. भारत-पाकिस्तान सीमा विवाद में अमेरिका ने किस देश का साथ दिया ? Most Important

उत्तर – पाकिस्तान का


प्रश्न 3. भारत और चीन के मध्य दो मुख्य विवाद कौन-से हैं ? Most Important

उत्तर – भारत और चीन के बीच दो मुख्य विवाद इस प्रकार हैं:

  • सीमा विवाद – विशेष रूप से अक्साई चिन और अरुणाचल प्रदेश से संबंधित।
  • तिब्बत का मुद्दा – तिब्बत पर चीन का नियंत्रण और तिब्बती शरणार्थियों को लेकर भारत का दृष्टिकोण।

Chapter 4 – अंतरराष्ट्रीय संगठन


प्रश्न 1. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के कोई दो कार्य लिखिए। Most Important

उत्तर – विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दो कार्य इस प्रकार हैं:

  • वैश्विक स्वास्थ्य को बढ़ावा देना तथा रोगों के प्रसार को नियंत्रित करना।
  • स्वास्थ्य संबंधी मामलों में देशों को तकनीकी सहायता और मार्गदर्शन प्रदान करना।

प्रश्न 2. हमें अन्तर्राष्ट्रीय संगठन की क्यों आवश्यकता पड़ती है ? कोई दो कारण बताइए। Most Important

उत्तर – अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों की आवश्यकता के दो कारण:

  • देशों के बीच शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए।
  • स्वास्थ्य, पर्यावरण और गरीबी जैसी वैश्विक समस्याओं के समाधान हेतु सहयोग के लिए।

प्रश्न 3. संयुक्त राष्ट्र के उद्देश्यों एवं सिद्धान्तों का वर्णन कीजिए।
OR
संयुक्त राष्ट्र संघ के सिद्धान्तों का वर्णन कीजिए Most Important
OR
संयुक्त राष्ट्र के कोई चार सिद्धान्त लिखिए।
OR
संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रमुख उद्देश्यों का संक्षेप में वर्णन कीजिए। Most Important
OR
संयुक्त राष्ट्र संघ (U.N.O.) के कोई दो उद्देश्य बताएँ। Most Important
OR
संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) के किन्हीं चार उद्देश्यों का संक्षेप में वर्णन करें।
OR
संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना का मुख्य उद्देश्य क्या था ?

उत्तर – संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) के उद्देश्य एवं सिद्धान्त

संयुक्त राष्ट्र के उद्देश्य:

  • विश्व में अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना।
  • राष्ट्रों के बीच समानता के आधार पर मैत्रीपूर्ण संबंध विकसित करना।
  • मानवाधिकारों और मौलिक स्वतंत्रताओं को बढ़ावा देना।
  • आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और मानवीय समस्याओं के समाधान हेतु अंतर्राष्ट्रीय सहयोग करना।
  • राष्ट्रों की गतिविधियों में समन्वय स्थापित करना।

संयुक्त राष्ट्र के सिद्धान्त:

  • सभी सदस्य राष्ट्र संप्रभु और समान हैं।
  • अंतर्राष्ट्रीय विवादों का शांतिपूर्ण समाधान किया जाना चाहिए।
  • किसी भी राष्ट्र की क्षेत्रीय अखंडता के विरुद्ध बल प्रयोग नहीं किया जाएगा।
  • संयुक्त राष्ट्र किसी देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगा।
  • सदस्य राष्ट्र संयुक्त राष्ट्र चार्टर के दायित्वों का ईमानदारी से पालन करेंगे।

प्रश्न 4. संयुक्त राष्ट्र संघ के मुख्य अंगों के नाम लिखिए। Most Important

उत्तर – संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) के मुख्य अंग इस प्रकार हैं:

  • महासभा
  • सुरक्षा परिषद
  • आर्थिक एवं सामाजिक परिषद
  • अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय
  • सचिवालय

प्रश्न 5. संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद् के स्थायी सदस्यों की संख्या तथा उनके नाम लिखें। Most Important

उत्तर – संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद् के 5 स्थायी सदस्य होते हैं।

उनके नाम हैं:

  • संयुक्त राज्य अमेरिका
  • रूस
  • चीन
  • यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन)
  • फ्रांस

प्रश्न 6. द्वितीय विश्व युद्ध सन् 1939 से सन् …………….. की अवधि में हुआ।
OR
द्वितीय विश्वयुद्ध कब समाप्त हुआ ?

उत्तर – 1945


प्रश्न 7. विश्व व्यापार संगठन की स्थापना सन् _________ में हुई।
OR
विश्व व्यापार संगठन कब अस्तित्व में आया ?

उत्तर – 1995


प्रश्न 8. संयुक्त राष्ट्र दिवस प्रतिवर्ष ___________ को मनाया जाता है।
OR
प्रतिवर्ष संयुक्त राष्ट्र संघ दिवस …………….. को मनाया जाता है।

उत्तर – 24 अक्तूबर


Chapter 5 – समकालीन विश्व में सुरक्षा


प्रश्न 1. अमेरिका पर हुए आतंकवादी हमले को किस नाम से पुकारा जाता है ? Most Important

उत्तर – अमेरिका पर हुए आतंकवादी हमले को 9/11 हमले (11 सितम्बर 2001) कहा जाता है।


प्रश्न 2. मानव सुरक्षा (Human Security) किसे कहते हैं ? Most Important

उत्तर – मानव सुरक्षा (Human Security) का अर्थ है व्यक्तियों को उनके जीवन, स्वास्थ्य और गरिमा पर होने वाले खतरों से सुरक्षा प्रदान करना, जिसमें आर्थिक, खाद्य, स्वास्थ्य, पर्यावरण, व्यक्तिगत, सामुदायिक और राजनीतिक सुरक्षा शामिल हैं। इसका मुख्य ध्यान राज्यों की बजाय लोगों पर होता है।


प्रश्न 3. निःशस्त्रीकरण के मार्ग में आने वाली किन्हीं चार बाधाओं का उल्लेख कीजिए।
OR
निःशस्त्रीकरण के मार्ग में आने वाली किन्हीं चार प्रमुख समस्याओं का वर्णन करें।

उत्तर – निःशस्त्रीकरण के मार्ग में आने वाली चार बाधाएँ:

  • देशों के बीच आपसी अविश्वास – देश एक-दूसरे की मंशाओं पर संदेह करते हैं।
  • सुरक्षा संबंधी चिंताएँ – देश अपनी रणनीतिक श्रेष्ठता खोने का भय रखते हैं।
  • राजनीतिक संघर्ष – चल रहे राजनीतिक तनाव और युद्ध निःशस्त्रीकरण के प्रयासों में बाधा डालते हैं।
  • आर्थिक हित – हथियारों का उत्पादन और व्यापार लाभकारी है, जिससे निःशस्त्रीकरण में रुकावट आती है।

Chapter 6 – पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन


प्रश्न 1. पर्यावरण संरक्षण से संबंधित किन्हीं दो आन्दोलनों के नाम लिखिए। Most Important

उत्तर – पर्यावरण संरक्षण से संबंधित दो आंदोलन:

  • चिपको आंदोलन – भारत में पेड़ों को काटे जाने से बचाने के लिए पेड़ों को गले लगाने वाला आंदोलन।
  • साइलेंट वैली आंदोलन – भारत में साइलेंट वैली जंगल को जलविद्युत परियोजना से डूबने से बचाने के लिए आंदोलन।

प्रश्न 2. पर्यावरण की सुरक्षा के विभिन्न उपायों का वर्णन कीजिए। Most Important
OR
पर्यावरण की सुरक्षा के किन्हीं चार उपायों का वर्णन करें।

उत्तर – पर्यावरण की सुरक्षा के उपाय:

  • वनरोपण और पुनर्वनीकरण – वनों को बढ़ाने और प्रदूषित भूमि को पुनः स्वस्थ करने के लिए पेड़ लगाना।
  • प्रदूषण नियंत्रण – नियमों और स्वच्छ तकनीकों के माध्यम से वायु, जल और भूमि के प्रदूषण को कम करना।
  • सतत संसाधन प्रबंधन – जल, खनिज और वन जैसी प्राकृतिक संसाधनों का जिम्मेदारी से उपयोग करना ताकि वे समाप्त न हों।
  • कचरा प्रबंधन और पुनर्चक्रण – कचरे का सही तरीके से निपटान और पुनर्चक्रण को बढ़ावा देना ताकि पर्यावरण पर प्रभाव कम हो।
  • पर्यावरण जागरूकता और शिक्षा – लोगों को पर्यावरण संरक्षण के महत्व के बारे में शिक्षित करना।
  • कानूनी उपाय – पारिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता की सुरक्षा के लिए पर्यावरणीय कानूनों और नियमों को लागू करना।

प्रश्न 3. विश्व राजनीति में पर्यावरण की चिंता के प्रमुख कारणों का वर्णन कीजिए। Most Important
OR
विश्व राजनीति में पर्यावरण की चिन्ता के कोई चार कारण लिखिए |

उत्तर – विश्व राजनीति में पर्यावरण की चिंता के प्रमुख कारण:

  • वैश्विक पर्यावरणीय समस्याएँ: जलवायु परिवर्तन, ओजोन परत की कमी और वैश्विक तापन जैसी समस्याएँ सभी देशों को प्रभावित करती हैं, जिसके लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है।
  • संसाधनों की कमी: तेजी से बढ़ती जनसंख्या और औद्योगिकीकरण प्राकृतिक संसाधनों की मांग बढ़ा देता है, जिससे जल, खनिज और ऊर्जा पर विवाद हो सकते हैं।
  • सीमा पार प्रदूषण: एक देश में प्रदूषण (वायु या जल) पड़ोसी देशों और क्षेत्रों को प्रभावित कर सकता है।
  • जैव विविधता का नुकसान: पारिस्थितिकी तंत्र का विनाश और प्रजातियों का विलुप्त होना वैश्विक पर्यावरणीय परिणाम पैदा करता है।
  • मानव सुरक्षा और स्वास्थ्य: पर्यावरणीय क्षरण भोजन, जल और मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा है, जो वैश्विक स्थिरता और सुरक्षा को प्रभावित करता है।

प्रश्न 4. पर्यावरण प्रदूषण के लिए उत्तरदायी तत्त्वों का वर्णन करें। Most Important

उत्तर – पर्यावरण प्रदूषण के लिए उत्तरदायी तत्त्व:

  • औद्योगिकीकरण: कारखाने वायु, जल और भूमि में प्रदूषक छोड़ते हैं, जिससे प्रदूषण होता है।
  • शहरीकरण: शहरों का तेजी से विकास बढ़ते कचरे, सीवेज और वाहन उत्सर्जन को बढ़ाता है।
  • वनों की कटाई: जंगलों की कटाई कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करने की क्षमता कम कर देती है, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ता है।
  • कृषि गतिविधियाँ: रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक और सिंचाई की तकनीकें मिट्टी और जल को प्रदूषित कर सकती हैं।
  • परिवहन: वाहनों से निकलने वाला धुआँ वायु प्रदूषण और ग्रीनहाउस गैसों में वृद्धि करता है।
  • कचरे का अनुचित निपटान: औद्योगिक, घरेलू और प्लास्टिक कचरे का डंपिंग भूमि और जल स्रोतों को प्रदूषित करता है।

प्रश्न 5. भूमंडलीय ऊष्मीकरण (Global Warming) क्या है ?
OR
विश्व तापन ( Global Warming) किसे कहते हैं ?

उत्तर – भूमंडलीय ऊष्मीकरण (Global Warming) का अर्थ है पृथ्वी के औसत तापमान में धीरे-धीरे वृद्धि होना, जो वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड जैसी ग्रीनहाउस गैसों के संचय के कारण होती है। इसके परिणामस्वरूप जलवायु परिवर्तन, हिमनदों का पिघलना, समुद्र स्तर में वृद्धि और चरम मौसम की घटनाएँ होती हैं, जो पारिस्थितिकी और मानव जीवन को प्रभावित करती हैं।


प्रश्न 6. भारत में पर्यावरण संरक्षण सम्बन्धी किन्हीं छः उपायों का वर्णन कीजिए । Most Important

उत्तर – भारत में पर्यावरण संरक्षण सम्बन्धी छः उपाय:

  • वनरोपण और पुनर्वनीकरण: वनों को बढ़ाने और प्रदूषित भूमि को पुनः स्वस्थ करने के लिए पेड़ लगाना।
  • प्रदूषण नियंत्रण कानून: वायु, जल और भूमि के प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कानून लागू करना।
  • कचरा प्रबंधन और पुनर्चक्रण: औद्योगिक, घरेलू और प्लास्टिक कचरे का सही तरीके से निपटान और पुनर्चक्रण को बढ़ावा देना।
  • नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना: जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने के लिए सौर, पवन और जल ऊर्जा का उपयोग।
  • वन्य जीव संरक्षण: संरक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से वनों, राष्ट्रीय उद्यानों और लुप्तप्राय प्रजातियों की सुरक्षा।
  • पर्यावरण शिक्षा और जागरूकता: नागरिकों को सतत प्रथाओं और पर्यावरण संरक्षण के महत्व के बारे में शिक्षित करना।

Chapter 7 – वैश्वीकरण


प्रश्न 1. वैश्वीकरण के पक्ष व विपक्ष में कोई चार-चार तर्क दीजिए। Most Important
OR
वैश्वीकरण के सकारात्मक और नकारात्मक पक्षों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर – वैश्वीकरण के सकारात्मक पक्ष:

  • आर्थिक विकास: व्यापार और निवेश बढ़ने से आर्थिक विकास होता है।
  • प्रौद्योगिकी तक पहुँच: देशों को उन्नत तकनीक और आधुनिक ज्ञान प्राप्त होता है।
  • सांस्कृतिक आदान-प्रदान: देशों के बीच संपर्क से सांस्कृतिक समझ बढ़ती है।
  • रोजगार के अवसर: बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ नए रोजगार अवसर उत्पन्न करती हैं।

वैश्वीकरण के नकारात्मक पक्ष:

  • आर्थिक असमानता: इसके लाभ सभी देशों और लोगों तक समान रूप से नहीं पहुँचते।
  • स्थानीय उद्योगों का ह्रास: छोटे और पारंपरिक उद्योग प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाते हैं।
  • सांस्कृतिक प्रभाव: स्थानीय संस्कृति पर वैश्विक संस्कृति का प्रभुत्व बढ़ता है।
  • पर्यावरण को क्षति: औद्योगिक गतिविधियों में वृद्धि से पर्यावरण को नुकसान होता है।

प्रश्न 2. वैश्वीकरण से आप क्या समझते हैं ? वैश्वीकरण के उदय के मुख्य चार कारणों का वर्णन कीजिए।
OR
वैश्वीकरण का अर्थ बताइए। वैश्वीकरण की अवधारणा के उदय के विभिन्न कारणों का वर्णन कीजिए।
OR
वैश्वीकरण के उदय के मुख्य कारणों का वर्णन करें।  Most Important

उत्तर – वैश्वीकरण का अर्थ है विश्व के विभिन्न देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक और तकनीकी क्षेत्रों में बढ़ती पारस्परिक निर्भरता और आपसी जुड़ाव, जिसके परिणामस्वरूप वस्तुओं, सेवाओं, पूँजी, सूचना और विचारों का सीमाओं के पार मुक्त प्रवाह होता है।

वैश्वीकरण की अवधारणा के उदय के कारण:

  • प्रौद्योगिकी में प्रगति: संचार और सूचना तकनीक के विकास से दूरी और समय कम हुआ।
  • अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का विस्तार: उदार व्यापार नीतियों से वैश्विक व्यापार को बढ़ावा मिला।
  • बहुराष्ट्रीय कंपनियों की भूमिका: बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने विभिन्न देशों में उत्पादन और बाजार का विस्तार किया।
  • शीत युद्ध की समाप्ति: द्विध्रुवीय विश्व के अंत से वैचारिक बाधाएँ कम हुईं।
  • आर्थिक उदारीकरण: कई देशों द्वारा खुले बाजार की नीतियाँ अपनाने से वैश्वीकरण को बल मिला।

प्रश्न 3. वैश्वीकरण की परिभाषा दीजिए। इसकी मुख्य विशेषताओं का वर्णन करें।
OR
वैश्वीकरण का शाब्दिक अर्थ क्या है ? वैश्वीकरण की मुख्य विशेषताएँ कौन-कौन-सी हैं ?
OR
वैश्वीकरण की कोई चार प्रमुख विशेषताएँ लिखें। Most Important

उत्तर – वैश्वीकरण का शाब्दिक अर्थ है “विश्व को एक इकाई या एक गाँव के रूप में बदलने की प्रक्रिया”, जिसमें विभिन्न देश आपस में निकटता से जुड़े होते हैं।

वैश्वीकरण की मुख्य विशेषताएँ:

  • वस्तुओं और सेवाओं का मुक्त प्रवाह: देशों के बीच व्यापार बाधाओं में कमी।
  • पूँजी का मुक्त प्रवाह: सीमाओं के पार निवेश और वित्त का आसान प्रवाह।
  • बहुराष्ट्रीय कंपनियों का विस्तार: वैश्विक अर्थव्यवस्था में MNCs की बढ़ती भूमिका।
  • प्रौद्योगिकी में विकास: संचार और सूचना तकनीक में तीव्र प्रगति।
  • सांस्कृतिक संपर्क: देशों के बीच विचारों, मूल्यों और संस्कृति का आदान-प्रदान।

प्रश्न 4. वैश्वीकरण के राजनीतिक एवम् आर्थिक आयामों का वर्णन कीजिए । Most Important

उत्तर – वैश्वीकरण के राजनीतिक एवं आर्थिक आयाम:

राजनीतिक आयाम:

  • राज्य की संप्रभुता में कमी: वैश्विक नियमों और संस्थाओं के कारण राष्ट्रीय सरकारों की स्वतंत्रता सीमित होती है।
  • अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की भूमिका: संयुक्त राष्ट्र, WTO, IMF और विश्व बैंक जैसे संगठन नीतियों को प्रभावित करते हैं।
  • वैश्विक शासन व्यवस्था: संधियों और समझौतों के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर निर्णय लिए जाते हैं।
  • लोकतंत्र और मानवाधिकारों का प्रसार: वैश्वीकरण लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवाधिकारों को बढ़ावा देता है।
  • नीतिगत समन्वय: सुरक्षा, पर्यावरण और व्यापार जैसे मुद्दों पर देशों के बीच सहयोग बढ़ता है।

आर्थिक आयाम:

  • वैश्विक व्यापार का विस्तार: वस्तुओं और सेवाओं के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में वृद्धि।
  • पूँजी का प्रवाह: विदेशी निवेश और वित्त का मुक्त प्रवाह।
  • बहुराष्ट्रीय कंपनियों की भूमिका: उत्पादन, व्यापार और बाज़ार पर MNCs का प्रभुत्व।
  • आर्थिक उदारीकरण: शुल्क, कोटा और व्यापार प्रतिबंधों में कमी।
  • एकीकृत विश्व अर्थव्यवस्था: राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाएँ एक वैश्विक आर्थिक व्यवस्था से जुड़ जाती हैं।

प्रश्न 5. वैश्वीकरण का क्या अर्थ है ? इसके मुख्य उद्देश्यों का वर्णन करें। Most Important

उत्तर – वैश्वीकरण से तात्पर्य विश्व के देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में बढ़ती पारस्परिक निर्भरता और आपसी जुड़ाव की प्रक्रिया से है, जिसके अंतर्गत वस्तुओं, सेवाओं, पूँजी, तकनीक और विचारों का मुक्त प्रवाह होता है।

वैश्वीकरण के मुख्य उद्देश्य:

  • वैश्विक व्यापार का विस्तार: देशों के बीच मुक्त व्यापार को बढ़ावा देना और व्यापार बाधाओं को कम करना।
  • आर्थिक विकास और प्रगति: निवेश और तकनीकी हस्तांतरण के माध्यम से आर्थिक विकास को गति देना।
  • पूँजी का मुक्त प्रवाह: विदेशी निवेश और वित्तीय एकीकरण को प्रोत्साहित करना।
  • प्रौद्योगिकी का विकास: आधुनिक तकनीक और नवाचार का विश्वभर में प्रसार।
  • सांस्कृतिक संपर्क और सहयोग: देशों के बीच आपसी समझ, सहयोग और समन्वय बढ़ाना।

प्रश्न 6. वैश्वीकरण का संबंध ………… पारस्परिक जुड़ाव एवं समन्वय से है।
OR
वैश्वीकरण का संबंध ___________ पारस्परिक जुड़ाव से है।

उत्तर – आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक


प्रश्न 7. वैश्वीकरण के राजनैतिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक प्रभावों का वर्णन करें। Most Important

उत्तर – वैश्वीकरण के राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक प्रभाव:

राजनीतिक प्रभाव:

  • राज्य की संप्रभुता में कमी: वैश्विक नियम और संस्थाएँ राष्ट्रीय सरकारों के पूर्ण नियंत्रण को सीमित करती हैं।
  • अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की भूमिका: UN, WTO, IMF और विश्व बैंक राष्ट्रीय नीतियों को प्रभावित करते हैं।
  • वैश्विक सहयोग: सुरक्षा, व्यापार और पर्यावरण के मुद्दों पर देशों के बीच नीति समन्वय बढ़ता है।
  • लोकतंत्र और मानवाधिकारों का प्रसार: वैश्वीकरण लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाता है।

आर्थिक प्रभाव:

  • व्यापार का विस्तार: वस्तुओं और सेवाओं का अंतर्राष्ट्रीय व्यापार बढ़ता है।
  • विदेशी निवेश: पूँजी और विदेशी निवेश का मुक्त प्रवाह।
  • बहुराष्ट्रीय कंपनियों की वृद्धि: MNCs उत्पादन, व्यापार और रोजगार में प्रमुख भूमिका निभाती हैं।
  • आर्थिक उदारीकरण: शुल्क, कोटा और व्यापार प्रतिबंधों में कमी।
  • एकीकृत विश्व अर्थव्यवस्था: राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाएँ वैश्विक आर्थिक प्रणाली का हिस्सा बन जाती हैं।

सांस्कृतिक प्रभाव:

  • सांस्कृतिक आदान-प्रदान: देशों के बीच संपर्क समझ और सहयोग बढ़ाता है।
  • वैश्विक संस्कृति का प्रसार: वैश्विक मीडिया, शिक्षा और जीवनशैली का प्रभाव।
  • स्थानीय संस्कृति को खतरा: पारंपरिक रीति-रिवाज और स्थानीय प्रथाएँ पीछे रह सकती हैं।
  • सहिष्णुता का प्रोत्साहन: विभिन्न संस्कृतियों के संपर्क से बहुसांस्कृतिक समझ और सहिष्णुता बढ़ती है।

Book – स्वतंत्र भारत में राजनीति


Chapter 1 – राष्ट्र निर्माण की चुनौतियां


प्रश्न 1. पाकिस्तान की स्थापना कब हुई थी ? इसका मुख्य कारण क्या था ?
OR
पाकिस्तान की स्थापना का मुख्य कारण भारत का ________ था।
OR
पाकिस्तान की स्थापना किस वर्ष में हुई ?
OR
पाकिस्तान की स्थापना सन् _______ में हुई।

उत्तर – पाकिस्तान की स्थापना 14 अगस्त 1947 को हुई थी। पाकिस्तान बनने का मुख्य कारण भारत में मुसलमानों की अलग मातृभूमि की मांग थी, जो हिंदुओं से धार्मिक और सांस्कृतिक भिन्नताओं के कारण उत्पन्न हुई। इस मांग का नेतृत्व मुहम्मद अली जिन्ना के नेतृत्व में ऑल इंडिया मुस्लिम लीग ने किया।


प्रश्न 2. स्वतंत्र भारत के सामने उपस्थित किन्हीं चार मुख्य चुनौतियों का वर्णन कीजिए।
OR
स्वतन्त्र भारत के सामने मुख्य चुनौतियाँ क्या थीं ? Most Important

उत्तर – स्वतन्त्र भारत के सामने मुख्य चुनौतियाँ:

  • सांप्रदायिक हिंसा और विभाजन: भारत के विभाजन के कारण जनसंख्या का पलायन, दंगे और भारी जानमाल का नुकसान हुआ।
  • शरणार्थी संकट: पाकिस्तान से लाखों लोग आए, जिन्हें बसाने और पुनर्वास करने की चुनौती थी।
  • आर्थिक पिछड़ापन: गरीबी, कम औद्योगिकीकरण और कृषि क्षेत्र की पिछड़ी अवस्था।
  • अशिक्षा और सामाजिक सुधार: उच्च अशिक्षा दर, जातिगत भेदभाव और सामाजिक असमानताओं का समाधान आवश्यक था।
  • रियासतों का एकीकरण: कई रियासतों को भारतीय संघ में मिलाना पड़ा।
  • रक्षा और सुरक्षा: पाकिस्तान और चीन से बाहरी खतरे का सामना।
  • राष्ट्र निर्माण: विविध देश में एकता और लोकतांत्रिक शासन की भावना का निर्माण।

प्रश्न 3. राष्ट्र-निर्माण के चार बाधक तत्त्वों का वर्णन करें। Most Important
OR
राष्ट्र-निर्माण के मार्ग में आने वाले बाधक तत्वों का वर्णन कीजिए।
OR
राष्ट्र निर्माण की किन्हीं दो बाधाओं का नाम लिखिए।

उत्तर – राष्ट्र-निर्माण के मार्ग में आने वाले बाधक तत्व:

  • सामाजिक असमानताएँ: जाति, धर्म और लिंग के आधार पर भेदभाव समाज में विभाजन पैदा करते हैं।
  • गरीबी और अशिक्षा: आर्थिक पिछड़ापन और शिक्षा की कमी सामाजिक समरसता और विकास में बाधा डालती है।
  • सांप्रदायिकता और क्षेत्रवाद: धार्मिक और क्षेत्रीय निष्ठाएँ राष्ट्रीय एकता के लिए चुनौती बन सकती हैं।
  • राजनीतिक अस्थिरता: भ्रष्टाचार, कमजोर संस्थाएँ और अकार्यक्षम शासन राष्ट्र निर्माण को धीमा करते हैं।
  • भाषाई और सांस्कृतिक विविधता: भाषा और संस्कृति के अंतर से गलतफहमी और संघर्ष उत्पन्न हो सकते हैं।
  • आर्थिक असमानता: संसाधनों का असमान वितरण सामाजिक अशांति और असंतोष को जन्म देता है।

प्रश्न 4. राष्ट्र-निर्माण के मार्ग की बाधाओं को दूर करने के कोई चार उपाय लिखिए। Most Important
OR
राष्ट्र-निर्माण के मार्ग में आने वाली बाधाओं को दूर करने के उपायों का वर्णन कीजिए।

उत्तर – राष्ट्र-निर्माण के मार्ग में आने वाली बाधाओं को दूर करने के उपाय:

  • सामाजिक समानता को बढ़ावा देना: जाति, लिंग और धर्म के आधार पर भेदभाव को कम करने के लिए नीतियाँ लागू करना।
  • गरीबी उन्मूलन और शिक्षा में सुधार: गरीबों को बुनियादी शिक्षा, कौशल विकास और आर्थिक सहायता प्रदान करना।
  • राष्ट्रीय एकता को प्रोत्साहित करना: विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों में एकता और साझा राष्ट्रीय पहचान का विकास करना।
  • लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाना: पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रभावी शासन सुनिश्चित करना।
  • भाषाई और सांस्कृतिक विविधता का सम्मान: सहिष्णुता, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और विविध भाषाओं व परंपराओं को शामिल करना।
  • आर्थिक असमानताओं को कम करना: संसाधनों का न्यायसंगत वितरण और समावेशी विकास कार्यक्रम लागू करना।
  • सांप्रदायिक सौहार्द को बढ़ावा देना: जागरूकता अभियान चलाना और सांप्रदायिक एवं क्षेत्रीय संघर्षों को रोकने के लिए कानून लागू करना।

प्रश्न 5. राष्ट्र की परिभाषा दीजिए और राष्ट्र-निर्माण के मुख्य तत्त्वों का उल्लेख करें। Most Important
OR
राष्ट्र-निर्माण के किन्हीं चार तत्त्वों का वर्णन कीजिए। Most Important
OR
राष्ट्र निर्माण के तीन तत्त्वों के नाम लिखिए।

उत्तर – राष्ट्र वह समुदाय है जिसमें लोग भाषा, संस्कृति, इतिहास, भू-भाग और एकता की भावना जैसी सामान्य विशेषताओं को साझा करते हैं और स्वयं शासन करने या राजनीतिक रूप से संगठित होने की आकांक्षा रखते हैं।

राष्ट्र-निर्माण के मुख्य तत्त्व:

  • राजनीतिक एकता: स्थिर और लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की स्थापना।
  • आर्थिक विकास: विकास सुनिश्चित करना, संसाधनों का न्यायसंगत वितरण और गरीबी उन्मूलन।
  • सामाजिक समरसता: विविध समूहों में समानता, सामाजिक न्याय और सौहार्द बढ़ाना।
  • सांस्कृतिक पहचान: साझा सांस्कृतिक, भाषाई और ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित और बढ़ावा देना।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा: बाहरी और आंतरिक खतरों से राष्ट्र की रक्षा।
  • जनभागीदारी: नागरिकों को राष्ट्र-निर्माण और निर्णय-निर्माण में शामिल करना।

प्रश्न 6. भारत विभाजन के अच्छे और बुरे परिणामों का वर्णन करें। Most Important

उत्तर – भारत विभाजन के अच्छे और बुरे परिणाम:

अच्छे परिणाम:

  • पाकिस्तान का निर्माण: मुसलमानों को उनकी मांग के अनुसार अलग मातृभूमि मिली।
  • धार्मिक आत्मनिर्णय: समुदाय अपने-अपने क्षेत्रों में शासन कर सके।
  • राजनीतिक पुनर्गठन: भारत एक लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बनाने पर ध्यान केंद्रित कर सका।

बुरे परिणाम:

  • जनसंख्या का पलायन: लाखों लोग सीमाओं के पार चले गए, जिससे विस्थापन हुआ।
  • सांप्रदायिक हिंसा: दंगे और हत्याकांडों में भारी जन-हानि और संपत्ति का नुकसान हुआ।
  • आर्थिक विघटन: संपत्ति, उद्योग और आधारभूत संरचना के विभाजन से आर्थिक कठिनाइयाँ बढ़ीं।
  • शरणार्थी संकट: लाखों शरणार्थियों के पुनर्वास में बड़ी चुनौतियाँ आईं।
  • सामाजिक आघात: परिवार अलग हुए, जिससे दीर्घकालिक मानसिक और सांस्कृतिक प्रभाव पड़े।

प्रश्न 7. भारत विभाजन से उत्पन्न किन्हीं चार समस्याओं का वर्णन कीजिए।
OR
भारत विभाजन से उत्पन्न समस्याओं का वर्णन कीजिए।

उत्तर – भारत विभाजन से उत्पन्न समस्याएँ:

  • जनसंख्या का पलायन: लाखों हिंदू, सिख और मुसलमान सीमाओं को पार कर गए, जिससे शरणार्थी शिविरों में अत्यधिक भीड़ हो गई।
  • सांप्रदायिक हिंसा: पलायन के दौरान दंगे, हत्याकांड और भारी जनहानि हुई।
  • शरणार्थी संकट: विस्थापित लोगों को पुनर्वास और आजीविका प्रदान करने में बड़ी चुनौतियाँ आईं।
  • आर्थिक विघटन: उद्योग, रेलवे और आधारभूत संरचना का विभाजन आर्थिक कठिनाइयाँ पैदा कर गया।
  • सामाजिक आघात: परिवार अलग हुए और समुदायों पर दीर्घकालिक मानसिक व सांस्कृतिक प्रभाव पड़ा।
  • सीमा विवाद: विभाजन के बाद कश्मीर जैसे क्षेत्रों पर विवाद उत्पन्न हुए।

प्रश्न 8. भाषा के आधार पर पंजाब राज्य का पुनर्गठन कब हुआ ?
OR
भाषा के आधार पर हरियाणा राज्य कब अस्तित्व में आया ?

उत्तर – 1 नवंबर 1966 को


Chapter 2 – एक दल के प्रभुत्व का दौर


प्रश्न 1. ‘चुनाव’ से आप क्या समझते हैं ? Most Important

उत्तर – चुनाव एक औपचारिक प्रक्रिया है जिसके माध्यम से किसी देश के नागरिक अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं या सार्वजनिक मुद्दों पर निर्णय लेते हैं। यह लोकतंत्र की मुख्य विशेषता है, जो लोगों को शासन में भाग लेने और नेताओं को जवाबदेह ठहराने का अवसर देती है।


प्रश्न 2. भारत में विरोधी दल की क्या भूमिका है ? इसका संक्षेप में वर्णन करें। Most Important

उत्तर – भारत में विरोधी दल की भूमिका:

  • भारत में विरोधी दल लोकतंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके मुख्य कार्य हैं:
  • सरकार की आलोचना करना: वे सरकारी नीतियों और निर्णयों की समीक्षा और प्रश्न करते हैं।
  • वैकल्पिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करना: वे जनता के कल्याण के लिए वैकल्पिक नीतियाँ और विचार प्रस्तुत करते हैं।
  • जवाबदेही सुनिश्चित करना: सरकार की जिम्मेदारी तय करने में मदद करते हैं और सत्ता के दुरुपयोग को रोकते हैं।
  • लोकतांत्रिक मूल्यों की सुरक्षा: अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा और संविधान की रक्षा करते हैं।

प्रश्न 3. भारत में कांग्रेस पार्टी की स्थापना कब हुई ? इसके मुख्य संस्थापक का नाम लिखिए।
OR
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना कब हुई ?

उत्तर – भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 1885 में हुई थी। कांग्रेस के मुख्य संस्थापक एलेन ऑक्टेवियन ह्यूम थे, जो एक ब्रिटिश नागरिक सेवक थे।


Chapter 3 – नियोजित विकास की राजनीति


प्रश्न 1. योजना आयोग के कोई चार कार्य बताइए। Most Important
OR
योजना आयोग के कोई दो कार्य लिखिए।

उत्तर – योजना आयोग के चार कार्य:

  • पंचवर्षीय योजनाओं का निर्माण: आर्थिक और सामाजिक विकास हेतु पंचवर्षीय योजनाएँ बनाना।
  • संसाधनों का आकलन: देश के मानव एवं भौतिक संसाधनों का मूल्यांकन करना।
  • प्राथमिकताओं का निर्धारण: राष्ट्रीय विकास के लिए लक्ष्य और प्राथमिकताएँ तय करना।
  • समन्वय का कार्य: केंद्र और राज्यों के बीच योजनाओं के क्रियान्वयन में समन्वय स्थापित करना।

प्रश्न 2. विकास के मुख्य उद्देश्य क्या हैं ? Most Important
OR
विकास के किन्हीं तीन उद्देश्यों का वर्णन करें।
OR
विकास के किन्हीं चार उद्देश्यों का वर्णन कीजिए।

उत्तर – विकास के मुख्य उद्देश्य:

  • आर्थिक वृद्धि: राष्ट्रीय आय और उत्पादन में वृद्धि करना।
  • गरीबी उन्मूलन: गरीबी को कम करना और सभी के लिए न्यूनतम जीवन स्तर सुनिश्चित करना।
  • रोज़गार सृजन: पर्याप्त रोज़गार के अवसर उपलब्ध कराना।
  • सामाजिक न्याय: आय और संपत्ति की असमानताओं को कम करना।
  • जीवन स्तर में सुधार: शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास एवं जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना।

प्रश्न 3. आर्थिक विकास के भारतीय मॉडल की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं ? Most Important

उत्तर – आर्थिक विकास के भारतीय मॉडल की मुख्य विशेषताएँ:

  • योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था: आर्थिक विकास को पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से आगे बढ़ाया गया।
  • मिश्रित अर्थव्यवस्था: सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों को समान महत्व दिया गया।
  • सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका: इस्पात, रेलवे, बिजली और भारी उद्योग जैसे क्षेत्र सार्वजनिक नियंत्रण में रहे।
  • आत्मनिर्भरता पर बल: विदेशी निर्भरता कम करने के लिए आत्मनिर्भरता पर जोर दिया गया।
  • सामाजिक न्याय: गरीबी और असमानता को कम कर समावेशी विकास को लक्ष्य बनाया गया।

प्रश्न 4. अच्छे नियोजन की किन्हीं चार विशेषताओं का वर्णन करें। Most Important

उत्तर – अच्छे नियोजन की चार विशेषताएँ:

  • स्पष्ट उद्देश्य: नियोजन के उद्देश्य स्पष्ट और निश्चित होने चाहिए।
  • संसाधनों का उचित आकलन: उपलब्ध संसाधनों का सही मूल्यांकन होना चाहिए।
  • संतुलित विकास: सभी क्षेत्रों और प्रदेशों का संतुलित विकास सुनिश्चित होना चाहिए।
  • लचीलापन: बदलती परिस्थितियों के अनुसार नियोजन में लचीलापन होना चाहिए।

प्रश्न 5. भारत में योजना आयोग का गठन वर्ष ………….. में किया गया।
OR
भारत में योजना आयोग की स्थापना कब की गयी थी ?

उत्तर – 1950


प्रश्न 6. विकास से आप क्या समझते हैं ? विकास के विभिन्न उद्देश्यों का वर्णन कीजिए।
OR
नियोजन के कोई दो उद्देश्य बताइए

उत्तर – विकास एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके माध्यम से आर्थिक, सामाजिक और मानवीय प्रगति होती है, जिससे लोगों का जीवन स्तर बेहतर होता है, गरीबी कम होती है और समाज का समग्र कल्याण होता है। विकास केवल आर्थिक वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सामाजिक न्याय और मानव विकास भी शामिल है।

विकास के विभिन्न उद्देश्य:

  • आर्थिक वृद्धि: राष्ट्रीय आय, उत्पादन और प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि करना।
  • गरीबी उन्मूलन: भोजन, वस्त्र, आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति।
  • रोज़गार सृजन: बेरोज़गारी कम करने हेतु पर्याप्त रोजगार उपलब्ध कराना।
  • सामाजिक न्याय: आय, संपत्ति और अवसरों की असमानताओं को कम करना।
  • जीवन गुणवत्ता में सुधार: शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना और मानव विकास में सुधार।

Chapter 4 – भारत के विदेश संबंध


प्रश्न 1. 1962 में …………..देशों के बीच युद्ध हुआ। Most Important

उत्तर – भारत और चीन


प्रश्न 2. 1962 के भारत-चीन युद्ध के प्रमुख कारण क्या थे ?  Most Important

उत्तर – 1962 के भारत-चीन युद्ध के प्रमुख कारण:

  • सीमा विवाद: अक्साई चिन और अरुणाचल प्रदेश (तत्कालीन NEFA) क्षेत्रों को लेकर असहमति।
  • तिब्बत का मुद्दा: तिब्बत पर चीन का नियंत्रण और भारत का तिब्बती निर्वासित सरकार का समर्थन चीन को नाराज़ कर गया।
  • फॉरवर्ड नीति: भारत की विवादित सीमा पर सैन्य चौकियाँ स्थापित करने की नीति ने चीन को उत्तेजित किया।
  • रणनीतिक हित: दोनों देशों ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश की।

प्रश्न 3. भारत की विदेश नीति के कोई चार निर्धारक तत्त्व लिखिए। Most Important

उत्तर – भारत की विदेश नीति के चार निर्धारक तत्त्व:

  • ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत: भारत का समृद्ध इतिहास और सांस्कृतिक मूल्यों का अंतर्राष्ट्रीय संबंधों पर प्रभाव।
  • भौगोलिक स्थिति: दक्षिण एशिया में भारत की रणनीतिक स्थिति विदेश नीति को आकार देती है।
  • आर्थिक और सैन्य शक्ति: भारत के आर्थिक संसाधन और सैन्य क्षमताएँ कूटनीतिक दृष्टिकोण को प्रभावित करती हैं।
  • घरेलू राजनीति: राजनीतिक स्थिरता, सरकार की विचारधारा और जनमत विदेश नीति के निर्णयों पर प्रभाव डालते हैं।

प्रश्न 4. श्री लाल बहादुर शास्त्री जी ने पाकिस्तान के साथ कब और कौन-सा समझौता किया ? Most Important

उत्तर – भारत के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने पाकिस्तान के साथ ताशकंद समझौता 10 जनवरी 1966 को किया था, जो 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध को समाप्त करने के लिए था।


प्रश्न 5. सन् 1971 में हुए लोकसभा चुनावों के बाद भारत का प्रधानमंत्री कौन बना ? Most Important

उत्तर – इंदिरा गांधी


प्रश्न 6. भारतीय गुट निरपेक्षता के स्वरूप का वर्णन कीजिए। Most Important

उत्तर – भारत की गुट निरपेक्ष नीति की विशेषताएँ इस प्रकार हैं:

  • स्वतंत्र विदेश नीति: शीत युद्ध के दौरान भारत किसी भी प्रमुख शक्ति गुट में शामिल नहीं हुआ और स्वतंत्र मार्ग अपनाया।
  • शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व: सभी देशों के साथ शांतिपूर्ण संबंध बनाए रखना, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना।
  • औपनिवेशिकता का विरोध: विश्वभर में स्वतंत्रता आंदोलनों और उपनिवेशवाद विरोधी संघर्षों का समर्थन करना।
  • विकास पर ध्यान: सैन्य गठबंधनों के बजाय आर्थिक और सामाजिक विकास पर जोर देना।
  • मध्यस्थता की भूमिका: अंतर्राष्ट्रीय संघर्षों में मध्यस्थ बनकर वैश्विक शांति को बढ़ावा देना।

प्रश्न 7. ‘गुटनिरपेक्ष आन्दोलन’ से आप क्या समझते हैं ? इसके मुख्य सिद्धान्तों का वर्णन करें। Most Important

उत्तर – गुटनिरपेक्ष आन्दोलन (NAM) उन देशों के समूह को कहते हैं जो अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में किसी भी प्रमुख शक्ति गुट के साथ औपचारिक रूप से जुड़ते नहीं हैं। यह शीत युद्ध के दौरान स्वतंत्रता बनाए रखने, शांति, सहयोग और विकास को बढ़ावा देने के लिए उभरा।

गुटनिरपेक्ष आन्दोलन के मुख्य सिद्धान्त:

  • संप्रभुता का सम्मान: प्रत्येक राष्ट्र की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाए।
  • अंतरराष्ट्रीय मामलों में हस्तक्षेप न करना: किसी देश को दूसरे देश के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देना चाहिए।
  • शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व: वैश्विक शांति को बढ़ावा देना और सैन्य गठबंधनों से बचना।
  • आपसी सहयोग: सदस्य देशों के बीच आर्थिक और सामाजिक विकास का समर्थन करना।
  • औपनिवेशवाद और साम्राज्यवाद का विरोध: बाहरी शक्तियों के प्रभुत्व या नियंत्रण के खिलाफ खड़ा होना।

प्रश्न 8. गुट निरपेक्षता का क्या अर्थ है ? भारतीय गुट निरपेक्षता की मुख्य विशेषताएँ बताइए Most Important
OR
भारत की गुटनिरपेक्षता नीति के मुख्य तत्त्व लिखिए। Most Important
OR
गुट-निरपेक्ष का अर्थ बताते हुए इसकी विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

उत्तर – गुट निरपेक्षता वह विदेश नीति है जिसमें कोई देश अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में किसी भी प्रमुख शक्ति गुट के साथ औपचारिक रूप से नहीं जुड़ता और अपने निर्णयों में स्वतंत्र रहता है।

भारतीय गुट निरपेक्षता की मुख्य विशेषताएँ:

  • स्वतंत्र विदेश नीति: भारत शीत युद्ध के दौरान किसी भी गुट (अमेरिका या सोवियत संघ) से नहीं जुड़ा।
  • शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व: सभी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखने पर जोर।
  • औपनिवेशिकता और साम्राज्यवाद का विरोध: विश्वभर में स्वतंत्रता संग्राम और उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलनों का समर्थन।
  • आर्थिक विकास पर ध्यान: सैन्य गठबंधनों की बजाय आर्थिक और सामाजिक विकास को प्राथमिकता देना।
  • मध्यस्थता की भूमिका: अंतर्राष्ट्रीय संघर्षों में शांति स्थापित करने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाना।

प्रश्न 9. भारत द्वारा गुटनिरपेक्षता की नीति को अपनाने के कोई चार कारण लिखें। Most Important

उत्तर – भारत द्वारा गुटनिरपेक्षता की नीति अपनाने के चार कारण:

  • स्वतंत्रता बनाए रखना: किसी भी प्रमुख शक्ति के प्रभुत्व के बिना विदेश नीति में स्वतंत्रता बनाए रखना।
  • शीत युद्ध संघर्षों से बचाव: अमेरिका और सोवियत संघ के बीच महाशक्ति संघर्षों और टकराव से दूर रहना।
  • नव स्वतंत्र देशों का समर्थन: एशिया और अफ्रीका के नव स्वतंत्र देशों के हितों की रक्षा और सहायता करना।
  • घरेलू विकास पर ध्यान: सैन्य गठबंधनों और रक्षा दायित्वों के बजाय आर्थिक और सामाजिक विकास को प्राथमिकता देना।

प्रश्न 10. भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव के कोई चार कारण लिखिए। Most Important

उत्तर – भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव के चार कारण:

  • कश्मीर विवाद: जम्मू और कश्मीर क्षेत्र को लेकर चल रहा क्षेत्रीय संघर्ष।
  • जल विवाद: सिंधु और उसकी उपनदियों के जल वितरण को लेकर संघर्ष (इंडस वाटर्स ट्रीटी)।
  • सीमा पार आतंकवाद: आतंकवादी समूहों का समर्थन और आतंकवादी घटनाएँ।
  • ऐतिहासिक युद्ध और सीमा विवाद: 1947, 1965, 1971 और 1999 (कारगिल) के युद्धों की विरासत।

प्रश्न 11. गुटनिरपेक्षता का क्या अर्थ है ? इसके मुख्य उद्देश्य बताइए।
OR
गुट निरपेक्षता का अर्थ स्पष्ट करें।

उत्तर – गुटनिरपेक्षता वह विदेश नीति है जिसमें कोई देश किसी भी प्रमुख शक्ति गुट के साथ औपचारिक रूप से नहीं जुड़ता और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में स्वतंत्रता बनाए रखता है।

गुटनिरपेक्षता के मुख्य उद्देश्य:

  • राष्ट्रीय स्वतंत्रता बनाए रखना: किसी भी महाशक्ति के प्रभुत्व के बिना विदेश नीति में स्वतंत्रता बनाए रखना।
  • शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को बढ़ावा देना: सभी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण और शांतिपूर्ण संबंध स्थापित करना।
  • नव स्वतंत्र देशों का समर्थन: नव स्वतंत्र देशों के हितों की रक्षा और सहायता करना।
  • सैन्य गठबंधनों से बचाव: शक्ति गुट संघर्षों में शामिल होने से बचना और विकास व कल्याण पर ध्यान देना।
  • वैश्विक न्याय को प्रोत्साहित करना: अंतर्राष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान और समानता सुनिश्चित करना।

प्रश्न 12. पंचशील समझौते पर _______ और _________ दो देशों ने हस्ताक्षर किए।
OR
‘पंचशील समझौते’ पर किन दो देशों ने हस्ताक्षर किए ?

उत्तर – भारत और चीन


प्रश्न 13. बांग्लादेश की स्थापना कब हुई ? इसका मुख्य कारण क्या था ?
OR
बांग्लादेश की स्थापना कब हुई ?

उत्तर – बांग्लादेश की स्थापना 16 दिसंबर 1971 को हुई। मुख्य कारण था पूर्व पाकिस्तान (बांग्ला भाषी लोगों) के साथ सांस्कृतिक, भाषाई और राजनीतिक भेदभाव, जिससे बांग्लादेश मुक्ति संग्राम का उदय हुआ और यह पश्चिम पाकिस्तान से स्वतंत्र हुआ।


प्रश्न 14. भारत की विदेश नीति के मुख्य सिद्धान्तों की व्याख्या कीजिए।
OR
भारत की विदेश नीति के किन्हीं चार मुख्य सिद्धान्तों का वर्णन कीजिए।

उत्तर – भारत की विदेश नीति के मुख्य सिद्धान्त:

शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व: भारत सभी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखने और विवादों का संवाद द्वारा समाधान करने पर जोर देता है।

गुटनिरपेक्षता: भारत किसी भी प्रमुख शक्ति गुट में शामिल हुए बिना स्वतंत्र विदेश नीति अपनाता है।

संप्रभुता का सम्मान: भारत सभी देशों की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और स्वतंत्रता का सम्मान करता है।

औपनिवेशिकता का विरोध: भारत उपनिवेशवाद और साम्राज्यवाद का विरोध करता है तथा विश्वभर में स्वतंत्रता और उपनिवेशवाद विरोधी संघर्षों का समर्थन करता है।

अंतर्राष्ट्रीय शांति का संवर्धन: भारत वैश्विक शांति और सुरक्षा बनाए रखने के प्रयासों में सक्रिय भागीदारी करता है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र शामिल है।

आर्थिक और सामाजिक विकास पर ध्यान: भारत अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से विकास और जनता के जीवन स्तर सुधार को प्राथमिकता देता है।


प्रश्न 15. पंचशील पर एक संक्षिप्त लेख लिखिए। Most Important

उत्तर – पंचशील समझौता भारत और चीन के बीच सन् 1954 में हुआ। इस समझौते में दोनों देशों के बीच शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के पाँच सिद्धांत तय किए गए। ये सिद्धांत हैं:

  • एक-दूसरे की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का सम्मान।
  • एक-दूसरे के खिलाफ आक्रमण न करना।
  • एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना।
  • समानता और आपसी लाभ को ध्यान में रखते हुए संबंध रखना।
  • शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और सहयोग बनाए रखना।

पंचशील समझौते का महत्त्व यह था कि इसने भारत की अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में शांति, सहयोग और गुटनिरपेक्षता की नीति को प्रतिबिंबित किया।


प्रश्न 16. 1962 के भारत-चीन युद्ध के प्रमुख कारण क्या थे ?  Most Important

उत्तर – 1962 के भारत-चीन युद्ध के प्रमुख कारण:

  • सीमा विवाद: अक्साई चिन और अरुणाचल प्रदेश (NEFA) क्षेत्रों को लेकर संघर्ष।
  • फॉरवर्ड पॉलिसी: विवादित क्षेत्रों में भारतीय सैन्य चौकियाँ स्थापित करने की नीति ने चीन को नाराज किया।
  • चीन का विस्तारवाद: चीन ने सीमा क्षेत्रों पर नियंत्रण स्थापित करना चाहा।
  • कूटनीति की कमी: दोनों देशों के बीच वार्ता में असफलता और अविश्वास।
  • रणनीतिक गलत आकलन: भारत ने चीन की सैन्य शक्ति और मंशा को कम आंका।

Chapter 5 – कांग्रेस प्रणाली : चुनौतियां और पुनर्स्थापना


प्रश्न 1. ‘जय जवान जय किसान’ का नारा किसने दिया ? Most Important
OR
पं० नेहरू जी की मृत्यु के बाद भारत के प्रधानमंत्री कौन बने ? Most Important

उत्तर – लाल बहादुर शास्त्री


प्रश्न 2. भाषा पर राजनीतिक विवाद की समस्या का वर्णन करें। Most Important

उत्तर – भाषा-आधारित राजनीतिक विवाद तब उत्पन्न होते हैं जब विभिन्न भाषाई समूह किसी क्षेत्र में मान्यता, अधिकार या प्रशासनिक विशेषाधिकार की मांग करते हैं। भारत में ऐसे विवादों के परिणामस्वरूप:

  • भाषाई राज्यों का गठन: क्षेत्रीय भाषाई मांगों को पूरा करने के लिए राज्यों का पुनर्गठन।
  • विरोध और आंदोलनों: भाषाई समूहों द्वारा सरकारी भाषा की मान्यता के लिए आंदोलन।
  • राजनीतिक तनाव: शिक्षा, प्रशासन और शासन में भाषा के उपयोग को लेकर समूहों में संघर्ष।
  • विकास में बाधा: विवाद कभी-कभी प्रभावित क्षेत्रों में आर्थिक और सामाजिक प्रगति को रोकते हैं।

ये समस्याएँ समावेशी नीतियों और भाषाई विविधता के सम्मान की आवश्यकता को दर्शाती हैं।


प्रश्न 3. ‘आया राम गया राम’ का मुहावरा कब और कहाँ से मशहूर हुआ ?
OR
‘आयाराम-गयाराम’ का मुहावरा किससे संबंधित है ?

उत्तर – “आया राम गया राम” का मुहावरा 1967 में हरियाणा, भारत से मशहूर हुआ। यह सांसदों द्वारा लगातार पार्टी बदलने की राजनीति को दर्शाता है।


Chapter 6 – लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट


प्रश्न 1. भारतीय दलीय व्यवस्था की कोई चार विशेषताएँ बताइए ।
OR
भारत की दलीय व्यवस्था के कोई दो लक्षण बताइए। Most Important

उत्तर – भारतीय दलीय व्यवस्था की चार विशेषताएँ

  • बहुदलीय व्यवस्था: भारत में राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर कई राजनीतिक दल मौजूद हैं।
  • प्रमुख दल का प्रभुत्व: ऐतिहासिक रूप से कांग्रेस पार्टी का प्रमुख भूमिका रही है, हालांकि क्षेत्रीय दलों की ताकत बढ़ी है।
  • क्षेत्रीय दल: मजबूत राज्य स्तर के दल स्थानीय हितों का प्रतिनिधित्व करते हैं और राष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित करते हैं।
  • लोकतांत्रिक प्रतिस्पर्धा: राजनीतिक दल चुनावों में प्रतिस्पर्धा करते हैं, जिससे मतदाताओं को विकल्प मिलते हैं और जवाबदेही सुनिश्चित होती है।

प्रश्न 2. वचनबद्ध नौकरशाही से आपका क्या अभिप्राय है ? Most Important

उत्तर – वचनबद्ध नौकरशाही उस प्रणाली को कहते हैं जिसमें सिविल सर्वेंट्स या सरकारी अधिकारी चुने हुए प्रतिनिधियों और अप्रत्यक्ष रूप से जनता के प्रति उत्तरदायी होते हैं। उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करें, कानून का पालन करें और अपने कार्यों के लिए जवाब दें, जिससे पारदर्शिता और प्रभावी शासन सुनिश्चित हो।


प्रश्न 3. प्रेस सेंसरशिप किसे कहा जाता है ? Most Important

उत्तर – प्रेस सेंसरशिप उस प्रक्रिया को कहते हैं जिसमें सरकार या प्रशासनिक संस्थाएँ मीडिया पर नियंत्रण या प्रतिबंध लगाती हैं, जिससे कुछ जानकारी, समाचार या राय को प्रकाशित या प्रसारित करने में रोक लगती है। इसका उद्देश्य अक्सर विरोध को दबाना, सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना या राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना होता है।


प्रश्न 4. 1975 में आपातकाल की घोषणा के कोई चार परिणाम लिखिए। Most Important

उत्तर – 1975 के आपातकाल के चार परिणाम

  • मौलिक अधिकारों का निलंबन: वाक् स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति और सभा जैसे मूलभूत अधिकार सीमित किए गए।
  • राजनीतिक दमन: कई विपक्षी नेता और कार्यकर्ता गिरफ्तार किए गए और राजनीतिक विरोध दबा दिया गया।
  • प्रेस सेंसरशिप: मीडिया पर कड़ा नियंत्रण लगा और सरकार की आलोचना नहीं हो सकी।
  • पुलिस और नौकरशाही का दुरुपयोग: पुलिस और नौकरशाह सरकार के साधन बन गए, अक्सर जवाबदेही के बिना कार्य करते थे।

प्रश्न 5. 1975 में आपातकाल की घोषणा करने के कोई चार कारण लिखिए। Most Important

उत्तर – 1975 में आपातकाल की घोषणा के चार कारण

  • राजनीतिक अशांति: सरकार के खिलाफ बढ़ती विरोधी रैलियाँ और आंदोलनों, जिनका नेतृत्व विपक्षी दल और सामाजिक कार्यकर्ता कर रहे थे।
  • न्यायिक दबाव: इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का चुनाव अवैध घोषित किया गया था।
  • कानून और व्यवस्था की चिंता: सार्वजनिक व्यवस्था में अव्यवस्था और राष्ट्रीय स्थिरता के खतरे का हवाला।
  • सत्ता का केंद्रीकरण: प्रधानमंत्री की सत्ता को केंद्रीकृत करने और राजनीतिक विरोध को दबाने की इच्छा।

प्रश्न 6. सन् 1977 के लोकसभा चुनाव में जनता पार्टी की विजय के कोई चार उत्तरदायी कारण लिखिए।
OR
1977 के चुनावों के बाद पहली बार केन्द्र में विपक्षी दल की सरकार बनने के कोई तीन कारण लिखिए।

उत्तर – 1977 के लोकसभा चुनाव में जनता पार्टी की विजय के चार कारण

  • आपातकाल के प्रति विरोध: आपातकाल के दौरान नागरिक अधिकारों के निलंबन और राजनीतिक दमन के कारण जनता में नाराजगी।
  • जयप्रकाश नारायण का नेतृत्व: उनका संपूर्ण क्रांति आंदोलन व्यापक जन समर्थन के लिए प्रेरक बना।
  • विपक्ष की एकता: कई विपक्षी दल जनता पार्टी के तहत एकजुट हुए, जिससे कांग्रेस विरोधी मत एकत्र हुए।
  • भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन: कांग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार, अधिनायकवाद और सत्ता के दुरुपयोग की व्यापक धारणा।

Chapter 7 – क्षेत्रीय आकांक्षाएँ


प्रश्न 1. भारतीय राजनीति पर साम्प्रदायिकता के पड़ने वाले प्रभावों का वर्णन कीजिए। Most Important

उत्तर – भारत में साम्प्रदायिकता का अर्थ है धर्म या समुदाय की पहचान के आधार पर राजनीतिक आंदोलन। इसके प्रभाव इस प्रकार हैं:

  • राजनीतिक ध्रुवीकरण: साम्प्रदायिकता अक्सर मतदाताओं को धार्मिक आधार पर विभाजित कर देती है, जिससे राष्ट्रीय एकता कमजोर होती है।
  • साम्प्रदायिक दलों का उदय: यह धर्म आधारित राजनीतिक दलों के गठन और विकास को बढ़ावा देती है।
  • सामाजिक सौहार्द में बाधा: साम्प्रदायिक तनाव दंगों और संघर्षों को जन्म देते हैं, जिससे शांति और प्रशासन बाधित होता है।
  • नीतिगत पक्षपात और चुनावी खेल: सरकारें कभी-कभी राजनीतिक समर्थन पाने के लिए कुछ समुदायों को लाभ देती हैं, जिससे निष्पक्षता कमजोर होती है।

प्रश्न 2. ‘बोडो आन्दोलन’ किस राज्य में चलाया गया ? Most Important

उत्तर – असम


प्रश्न 3. भारत में क्षेत्रवाद की उत्पत्ति के कोई चार कारण लिखिए। Most Important

उत्तर – भारत में क्षेत्रवाद की उत्पत्ति के चार कारण

  • सांस्कृतिक और भाषाई भिन्नताएँ: विभिन्न क्षेत्रों में अलग भाषाएँ, परंपराएँ और सांस्कृतिक पहचान क्षेत्रीय भावनाओं को जन्म देती हैं।
  • आर्थिक असमानताएँ: राज्यों के बीच विकास और संसाधनों के असमान वितरण से असंतोष पैदा होता है।
  • राजनीतिक उपेक्षा: कुछ क्षेत्र केंद्र सरकार में अपर्याप्त प्रतिनिधित्व या नीतिगत उपेक्षा महसूस करते हैं।
  • ऐतिहासिक कारण: ऐतिहासिक अन्याय, उपनिवेशीय विरासत और पूर्व में उपेक्षा क्षेत्रीय चेतना को बढ़ावा देती हैं।

प्रश्न 4. भारत में क्षेत्रीयवाद की बढ़ती प्रवृत्ति को समाप्त करने के कोई चार सुझाव दीजिए। Most Important
OR
भारत में क्षेत्रीयवाद को समाप्त करने के कोई चार सुझाव दीजिए। Most Important

उत्तर – भारत में क्षेत्रीयवाद की बढ़ती प्रवृत्ति को समाप्त करने के चार सुझाव

  • संतुलित क्षेत्रीय विकास: सभी क्षेत्रों में समान आर्थिक विकास एवं संसाधनों का न्यायपूर्ण वितरण सुनिश्चित किया जाए।
  • राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करना: शिक्षा, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और समावेशी नीतियों द्वारा राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा दिया जाए।
  • सत्ता का विकेंद्रीकरण: राज्यों एवं स्थानीय संस्थाओं को अधिक अधिकार देकर क्षेत्रीय आकांक्षाओं को पूरा किया जाए।
  • समावेशी राजनीतिक सहभागिता: राष्ट्रीय निर्णय-निर्माण में सभी क्षेत्रों का उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए।

प्रश्न 5. राजीव लोंगोवाल समझौता कब हुआ ?
OR
राजीव- लोंगोवाल समझौता कब हुआ ?

उत्तर – 24 जुलाई 1985


प्रश्न 6. साम्प्रदायिकता का क्या अर्थ है ? साम्प्रदायिकता के प्रभावों को दूर करने के उपायों का वर्णन करें।
OR
भारत में साम्प्रदायिकता को रोकने के कोई चार उपाय बताइए।

उत्तर – साम्प्रदायिकता वह विचारधारा है जिसमें व्यक्ति अपने धर्म या समुदाय को श्रेष्ठ मानता है और धर्म का प्रयोग राजनीतिक, सामाजिक या व्यक्तिगत स्वार्थों के लिए करता है। इससे विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच तनाव, घृणा और संघर्ष उत्पन्न होता है।

साम्प्रदायिकता के प्रभावों को दूर करने के उपाय:

  • धर्मनिरपेक्षता का सुदृढ़ पालन: राज्य द्वारा सभी धर्मों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित किया जाए।
  • शिक्षा एवं जन-जागरूकता: नैतिक और मूल्यपरक शिक्षा के माध्यम से सहिष्णुता एवं भाईचारे की भावना विकसित की जाए।
  • मीडिया की सकारात्मक भूमिका: मीडिया को अफवाहों और घृणा फैलाने से बचते हुए सामाजिक सद्भाव बढ़ाना चाहिए।
  • कठोर कानूनी कार्रवाई: साम्प्रदायिक हिंसा और घृणास्पद भाषणों के विरुद्ध सख्त कानून लागू किए जाएँ।
  • राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी: राजनीतिक दलों को धर्म का प्रयोग वोट की राजनीति के लिए नहीं करना चाहिए।

प्रश्न 7. पंजाब समझौते के कोई दो मुख्य बिन्दु लिखिए। Most Important

उत्तर – पंजाब समझौते (राजीव–लोंगोवाल समझौता) के दो मुख्य बिंदु:

  • पंजाब को अधिक स्वायत्तता: कुछ अधिकार केंद्र सरकार से राज्य सरकार को हस्तांतरित किए जाने थे, ताकि क्षेत्रीय मांगों को पूरा किया जा सके।
  • हिंसा का अंत: शांति बहाल करने के उपाय तय किए गए, जिसमें उग्रवादियों का निरस्त्रीकरण और राज्य तथा केंद्र सरकार के बीच सहयोग शामिल था।

Chapter 8 – भारतीय राजनीति : नए बदलाव


प्रश्न 1. मण्डल आयोग की सिफारिशों को लागू करने वाले भारतीय प्रधानमंत्री का नाम बताइए।
OR
मण्डल आयोग की सिफारिशों को प्रधानमंत्री श्री …….  ने लागू किया था।

उत्तर – विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी. पी. सिंह)


प्रश्न 2. गठबन्धन सरकार से आप क्या समझते हैं ? इसके मुख्य लक्षणों का वर्णन करें।
OR
गठबन्धन सरकार का क्या अर्थ है ?
OR
गठबन्धन सरकार के कोई चार लक्षण बताइए।

उत्तर – जब किसी भी राजनीतिक दल को विधानमंडल में स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता और दो या अधिक दल मिलकर सरकार बनाते हैं, तो उसे गठबंधन सरकार कहा जाता है।

गठबंधन सरकार के मुख्य लक्षण:

  • कई दलों की भागीदारी: सरकार में एक से अधिक राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि होते हैं।
  • साझा सत्ता: निर्णय साझा रूप से गठबंधन के सभी दलों द्वारा लिए जाते हैं।
  • अस्थिर प्रकृति: गठबंधन सरकार अक्सर अस्थिर होती है और मतभेद होने पर गिर सकती है।
  • समझौता और सहमति: नीतियाँ अक्सर सभी गठबंधन दलों के बीच समझौते से तय होती हैं।
  • विविध हितों का प्रतिनिधित्व: यह सरकार सामाजिक, क्षेत्रीय और राजनीतिक विविधताओं का बेहतर प्रतिनिधित्व करती है।

प्रश्न 3. भारत में गठबन्धन की राजनीति का क्या अर्थ है ? गठबन्धन सरकार का भारतीय राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ा ?
OR
भारतीय राजनीति पर गठबंधन सरकार के पड़ने वाले प्रभावों का वर्णन कीजिए।

उत्तर – भारत में गठबंधन राजनीति उस स्थिति को कहते हैं जब किसी एक राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता और दो या अधिक दल मिलकर केंद्र या राज्य में सरकार बनाते हैं।

भारतीय राजनीति पर गठबंधन सरकार का प्रभाव:

  • क्षेत्रीय दलों का उदय: गठबंधन में शामिल होने के कारण क्षेत्रीय दलों का महत्व बढ़ा।
  • साझा सत्ता की संस्कृति: निर्णय लेने में वार्ता, समझौता और साझा भागीदारी को बढ़ावा मिला।
  • नीतियों में समझौता: विभिन्न गठबंधन दलों के बीच सहमति बनाना आवश्यक हो गया।
  • राजनीतिक स्थिरता की चुनौती: गठबंधन सरकारें कभी-कभी अस्थिर रहती थीं, जिससे बार-बार चुनाव होना पड़ा।
  • समावेशी शासन: सामाजिक, क्षेत्रीय और राजनीतिक विविधताओं का बेहतर प्रतिनिधित्व हुआ।

प्रश्न 4. भारत में गठबंधन सरकार की उत्पत्ति के लिये उत्तरदायी कारणों का वर्णन कीजिए।
OR
भारत में गठबन्धन सरकार के उदय के कोई चार कारण लिखिए। Most Important

उत्तर – भारत में गठबंधन सरकार की उत्पत्ति के कारण:

  • एक-दलीय प्रभुत्व का पतन: 1967 के बाद और विशेषकर 1989 के बाद कांग्रेस के एक-दलीय प्रभुत्व में कमी आई, जिससे गठबंधन की आवश्यकता पड़ी।
  • क्षेत्रीय दलों का उदय: क्षेत्रीय हितों का प्रतिनिधित्व करने वाले दलों के बढ़ने से किसी एक राष्ट्रीय दल को स्पष्ट बहुमत मिलना कठिन हो गया।
  • सामाजिक एवं राजनीतिक विविधता: भारत की सामाजिक, सांस्कृतिक, जातीय और क्षेत्रीय विविधता ने मतों को विभाजित किया।
  • जाति एवं पहचान की राजनीति: जाति, धर्म और क्षेत्र आधारित राजनीति ने एक-दलीय बहुमत की संभावना को कम किया।
  • चुनावी प्रणाली: बहुदलीय प्रतिस्पर्धा में मत विभाजन के कारण स्पष्ट जनादेश नहीं मिल पाता।
  • मतदाताओं की बढ़ती जागरूकता: राजनीतिक चेतना के बढ़ने से मतदाताओं ने एक-दलीय शासन के बजाय साझी सत्ता को प्राथमिकता दी।

 

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