HBSE Class 10 क्षितिज जीवन परिचय Important Question Answer 2026

Most of students search over Google for Haryana Board (HBSE) Important Questions 2026. Here is the Main reason because HBSE Board Says that in HBSE Exam 2026 (last 3 Years of Questions will Repeat) so that here are the selected List of Questions of Haryana Board For Class 10.


HBSE Class 10 क्षितिज जीवन परिचय Important Question Answer 2026


यशपाल जीवन परिचय Most Important


जीवन परिचय :- यशपाल हिंदी साहित्य के एक महान कथकार हैं। उनका जन्म 3 दिसम्बर, 1903 ई. को फिरोजपुर छावनी में हुआ। उन्होंने अपनी आरम्भिक शिक्षा गुरुकुल कांगड़ी में प्राप्त की। सन् 1921 के बाद वे सशस्त्र क्रान्ति के आन्दोलन में सक्रिय भाग लेने लगे। धीरे-धीरे उनका झुकाव मार्क्सवाद की ओर होने लगा। दिल्ली में जब वे बंब बना रहे थे तो उनको गिरफ्तार कर लिया गया। 1936 को बरेली जेल में उन्होंने प्रकाशवती कपूर से विवाह कर लिया। एक साहित्यकार के रूप में उन्होंने हिंदी साहित्य की काफी सेवा की। सन् 1976 में इस महान साहित्यकार का देहान्त हो गया।

प्रमुख रचनाएँ – यशपाल जी की प्रमुख रचनाएँ हैं-
उपन्यास – दादा कामरेड, देशद्रोही, पार्टी कामरेड, अप्सरा का श्राप, झूठा सच।
कहानी संग्रह -पिंजरे की उड़ान, तर्क का तूफान, सच बोलने की भूल ।
नाटक नशे की बात, रूप की परख गुडबाई दर्द दिल ।
व्यंग्य लेख – चक्कर क्लब ।
संस्मरण – सिंहावलोकन ।
निबन्ध – न्याय का संघर्ष, मार्क्सवाद, रामराज्य की कथा ।

साहित्यिक विशेषताएँ – मार्क्सवादी विचारधारा से प्रभावित होने के कारण यशपाल जी ने अपने उपन्यासों तथा कहानियों में यथार्थ का वर्णन किया है। उन्होंने रूढ़ियों से ग्रस्त मध्यवर्गीय लोगों की दयनीय स्थिति पर प्रकाश डाला है। कुछ उपन्यासों में यशपाल ने श्रमिक वर्ग के कष्टों और दुःखों का यथार्थ वर्णन किया है। ‘दिव्या’ नामक उपन्यास में उन्होंने पग-पग पर दलित नारी की करुण कथा का वर्णन किया है। उन्होंने अपने दृष्टिकोण के आधार पर समाज की गली सड़ी रूढ़ियां तथा विसंगतियों पर जम कर प्रहार किया है।

भाषाशैली – यशपाल जी ने सहज, सरल तथा भावानुकूल हिंदी भाषा का प्रयोग किया है। उन्होंने अपने उपन्यासों तथा कहानियों में आम आदमी की भाषा का प्रयोग किया है। यही कारण है कि उनका साहित्य जन साधारण में अत्यधिक लोकप्रिय हुआ। उन्होंने प्रायः वर्णनात्मक, संवादात्मक तथा व्यंग्यात्मक शैलियों का प्रयोग किया। भाषा के बारे में यशपाल जी का बड़ा उदार दृष्टिकोण था। उन्होंने यथासंभव विषयानुसार उर्दू तथा अंग्रेजी के शब्दों का भी सफल प्रयोग किया है।


मन्‍नू भण्डारी जीवन परिचय Most Important


लेखिका परिचय :- श्रीमती मन्नू भंडारी का नाम आधुनिक कथाकारों, उपन्यासकारों एवं नाटककारों में बड़े आदर के साथ लिया जाता है। इनका जन्म 2 अप्रैल, 1931 को मध्य प्रदेश के भानपुरा गाँव में हुआ। उनका मूल नाम महेंद्र कुमारी था। इनका बचपन अजमेर में व्यतीत हुआ। काशी हिंदू विश्वविद्यालय से इन्होंने एम०ए० (हिंदी) की परीक्षा पास की। हिन्दी में एम.ए. परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने पहले दिल्ली में फिर कलकत्ता में अध्यापन कार्य किया। दिल्ली के मिरांडा हाऊस से सेवानिवृत्त होने के बाद वे दिल्ली में स्वतंत्र लेखन कर रही हैं। कलकत्ता रहते हुए ही इनका विवाह सन् 1959 में श्री राजेंद्र यादव से हुआ। इनके पति राजेन्द्र यादव हिन्दी के एक प्रसिद्ध कहानीकार हैं। मन्नू भंडारी की कहानियों पर फिल्में भी बनी हैं और उनका नाट्य रूपांतर भी हुआ ।

साहित्यिक रचनाएँ – श्रीमती मन्नू भंडारी ने विविध विधाओं की रचना पर अपनी लेखनी सफलतापूर्वक चलाई है। उनकी प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं-
(i) कहानी संग्रह- ‘तीन निगाहों की तस्वीर’, ‘एक प्लेट सैलाब’, ‘त्रिशंकु’, ‘यही सच है’, ‘मैं हार गई’, ‘आँखों देखा झूठ जादि।
(ii) उपन्यास ‘महाभोज’, ‘आपका बंटी’, ‘एक इंच मुस्कान’, ‘स्वामी’
(iii) नाटक- ‘बिना दीवारों के पर

साहित्यिक विशेषताएँ – इनकी कहानियों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे जिंदगी को सीधे समझने और जाँचने वाली, बेबाक और प्रेरणादायी है श्रीमती मन्नू भंडारी की कहानियों के कथानक रोचक, जिज्ञासा से युक्त, सरल एवं मौलिक हैं।मन्नू भंडारी ने अपनी कहानी तथा उपन्यासों में सम-सामयिक समस्याओं को उठाने का प्रयास किया है उन्होंने गली सड़ी परंपराओं, रूढ़ियों के प्रति विद्रोह के स्वर को मुखरित किया है। लेखिका ने आज के पारिवारिक जीवन के अतिरिक्त नारी जीवन से जुड़े विभिन्न प्रश्नों पर भी प्रकाश डाला है।

भाषाशैली– मन्नू भंडारी ने अपनी रचनाओं में सहज, सरल हिन्दी भाषा का प्रयोग किया है। उन्होंने प्रायः वर्णनात्मक, संवादात्मक शैलियों का प्रयोग किया । उनके वाक्य छोटे-छोटे परन्तु सटीक होते हैं। उनके संवाद बड़े संक्षिप्त तथा पात्रानुकूल हैं। इससे स्पष्ट होता है कि उनका भाषा पर पूर्ण अधिकार रहा है।


रामवृक्ष बेनीपुरी जीवन परिचय Most Important


सामान्य जीवन परिचय
जन्म 1899 ई० में
स्थान बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के बेनीपुर गाँव में ।
जीवन माता-पिता का निधन बचपन में ही हो जाने के कारण जीवन के आरंभिक वर्ष अभावों कठिनाइयों और संघर्षों में बीते। दसवीं तक की शिक्षा प्राप्त करने के बाद वे सन् 1920 में राष्ट्रीय स्वाधीनता आंदोलन से सक्रिय रूप से जुड़ गए। कई बार जेल भी गए।
मृत्यु 1968 ई० में।

साहित्यिक रचनाएंउनका पूरा साहित्य बेनीपुरी रचनावली के आठ खंडों में प्रकाशित है। उनकी रचना यात्रा के महत्त्वपूर्ण पड़ाव हैं-

  • पतितों के देश में (उपन्यास)
  • चिता के फूल (कहानी)
  • माटी की मूरतें (रेखाचित्र)
  • पैरों में पंख बाँधकर (यात्रा-वृत्तांत)
  • जंजीरें और दीवारें (संस्मरण)

साहित्यिक विशेषताएंउनकी रचनाओं में स्वाधीनता की चेतना, मनुष्यता की चिंता और इतिहास की युगानुरूप व्याख्या है। विशिष्ट शैलीकार होने के कारण उन्हें ‘कलम का जादूगर’ कहा जाता है। गद्य की विविध विधाओं में उनके लेखन को व्यापक प्रतिष्ठा मिली। बेनीपुर जी की भाषा सहज, सरल तथा साहित्यिक हिंदी भाषा है। उनकी भाषा में संस्कृत के तत्सम तथा तद्भव शब्द का मिश्रण देखा जा सकता है। उन्होंने प्राय अलंकृत भाषा का प्रयोग किया है और उनकी भाषा शैली भावुकता प्रधान है।

भाषाशैली

  • लेखक  की भाषा शैली सरल और सहज है।
  • लेखक ने तत्सम, तद्भव शब्दों का प्रयोग किया है।
  • रामवृक्ष बेनीपुरी ने प्रायः अंलकृत भाषा का प्रयोग किया है। उनकी शैली भावुकता प्रधान है। इस प्रकार की भाषा शैली संस्मरणों तथा रेखाचित्रों के लिए सर्वथा उचित होती है।

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