Most of students search over Google for Haryana Board (HBSE) Important Questions 2026. Here is the Main reason because HBSE Board Says that in HBSE Exam 2026 (last 3 Years of Questions will Repeat) so that here are the selected List of Questions of Haryana Board For Class 10.
HBSE Class 10 क्षितिज Passage Important Question Answer 2026
Chapter 1 – सूरदास
पुरइनि पात रहत जल भीतर, ता रस देह न दागी।
ज्यौ जल माह तेल की गगरि, बूँद न ताकी लागी।
प्रीति-नदी मैं पाउँ न बोरयो, दृष्टि न रूप परागी।
‘सूरदास’ अबला हम भोरी, गुर चॉंटी ज्यौं पागी।
(i) प्रस्तुत काव्यांश के कवि एवं कविता का नाम लिखिए।
(ii) प्रस्तुत काव्यांश का प्रसंग स्पष्ट कीजिए।
(iii) कमल के पत्ते के बारे में क्या कहा गया है ?
(iv) “प्रीति-नदी” से कवि का क्या तात्पर्य है ?
(v) गोपियों ने उद्धव की दृष्टि पर क्या आरोप लगाए हैं ?
अवधि अधार आस आवन की, तन मन बिथा सही।
अब इन जोग सँदेसनि सुनि-सुनि, बिरहिनि बिरह दही।
चाहति हुतों गुहारि जितहिं तैं, उत ते धार बही।
‘सूरदास’ अब धीर धरहिं क्यों, मरजादा न लही॥ Most Important
(i) प्रस्तुत काव्यांश के कवि एवं कविता का नाम लिखिए।
(ii) प्रस्तुत काव्यांश का प्रसंग लिखिए।
(iii) योग संदेश सुनकर गोपियों की क्या हालत होती है ?
(iv) यहाँ “गुहारि” का क्या अर्थ है ?
(v) गोपियों का धैर्य खत्म क्यों हो रहा है ?
अवधि अधार आस आवन की, तन मन बिथा सही।
अब इन जोग सँदेसनि सुनि-सुनि, बिरहिनि बिरह दही।
चाहति हुतों गुहारि जितहिं तें, उत तें धार बही।
‘सूरदास’ अब धीर धरहिं क्यों, मरजादा न लही॥ (काव्यांश में निहित भाव एवं शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए )
Chapter 2 – राम लक्ष्मण परशुराम संवाद
नाथ संभुधनु भंजनिहारा। होइहि केउ एक दास तुम्हारा।।
आयेसु काह कहिय किन मोही। सुनि रिसाइ बोले मुनि कोही।।
सेवकु सो जो करे सेवकाई। अरि करनी करि करिअ लराई।
सुनहू राम जेहि सिवधनु तोरा। सहसबाहु सम सो रिपु मोरा॥ (काव्यांश में निहित भाव एवं शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए )
Chapter 3 – आत्मकथ्य
छोटे से जीवन की कैसे बड़ी कथाएँ आज कहूँ ?
क्या यह अच्छा नहीं कि औरों की सुनता मैं मौन रहूँ ?
सुनकर क्या तुम भला करोगे मेरी भोली आत्म-कथा ?
अभी समय भी नहीं, थकी सोई है मेरी मौन व्यथा। (काव्यांश में निहित भाव एवं शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए ) Most Important
Chapter 4 – उत्साह, अट नहीं रही है
विकल विकल, उन्मन थे उन्मन
विश्व के निदाघ के सकल जन,
आए अज्ञात दिशा से अनंत के घन !
तप्तधरा जल से फिर
शीतल कर दो –
बादल, गरजो !
(i) प्रस्तुत काव्यांश के कवि एवं कविता का नाम लिखिए।
(ii) प्रस्तुत काव्यांश का प्रसंग लिखिए।
(iii) बादल से गरजने के लिए क्यों कहा गया है ?
(iv) निदाघ’ का क्या अर्थ है ?
(v) ‘तप्तधरा” के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है ?
ललित ललित, काले घुँघराले,
बाल कल्पना के से पाले,
विद्युत छबि उर में, कवि, नवजीवन वाले ! (काव्यांश में निहित भाव एवं शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए )
Chapter 5 – यह दंतुरित मुसकान, फसल
तुम्हारी यह दंतुरित मुस्कान
मृतक में भी डाल देगी जान
धूलि-धूसर तुम्हारे ये गात …………
छोड़कर तालाब मेरी झोपड़ी में खिल रहे जलजात
परस पाकर तुम्हारा ही प्राण
पिघलकर जल बन गया होगा कठिन पाषाण। Most Important
(i) इस काव्यांश के कवि और कविता का नाम लिखिए।
(ii) इस काव्यांश का प्रसंग स्पष्ट कीजिए।
(iii) मृतक में क्या चीज़ जान डाल देगी ?
(iv) “जलजात” शब्द का प्रयोग कवि ने किसलिए किया है ?
(v) पाषाण पिघलकर जल क्यों बन गया होगा ?
तुम्हारी यह दंतुरित मुसकान
मृतक में भी डाल देगी जान
धूलि-धूसर तुम्हारे ये गात ……
छोड़कर तालाब मेरी झोपड़ी में खिल रहे जलजात
परस पाकर तुम्हारा ही प्राण
पिघलकर जल बन गया होगा कठिन पाषाण Most Important
(i) प्रस्तुत काव्यांश के कवि एवं कविता का नाम लिखिए।
(ii) प्रस्तुत काव्यांश का प्रसंग लिखिए।
(iii) मृतक में जान डालने से क्या अभिप्राय है ?
(iv) कवि की झोपड़ी में क्या खिल रहे थे ?
(v) पाषाण पिघलकर जल क्यों बन गया होगा ?
तुम्हारी यह दंतुरित मुसकान
मृतक में भी डाल देगी जान
धूलि-धूसर तुम्हारे ये गात ……
छोड़कर तालाब मेरी झोपड़ी में खिल रहे जलजात
परस पाकर तुम्हारा ही प्राण
पिघलकर जल बन गया होगा कठिन पाषाण
प्रश्न :
(क) प्रस्तुत काव्यांश के कवि एवं कविता का नाम लिखिए।
(ख) बच्चे का शरीर किससे भरा हुआ है ?
(ग) बच्चे की मुस्कान किसमें जान डाल सकती है ?
(घ) ‘जलजात’ का क्या अर्थ है ?
तुम्हारी यह दंतुरित मुस्कान
मृतक में भी डाल देगी जान
धूलि-धूसर तुम्हारे ये गात …………
छोड़कर तालाब मेरी झोपड़ी में खिल रहे जलजात। Most Important (काव्यांश में निहित भाव एवं शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए )
फसल क्या है ?
और तो कुछ नहीं है वह
नदियों के पानी का जादू है वह
हाथों के स्पर्श की महिमा है
भूरी-काली-संदली मिट्टी का गुण धर्म है। (काव्यांश में निहित भाव एवं शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए )
Chapter 6 – संगतकार
तारसप्तक में जब बैठने लगता है उसका गला
प्रेरणा साथ छोड़ती हुई उत्साह अस्त होता हुआ
आवाज से राख जैसा कुछ गिरता हुआ
तभी मुख्य गायक को ढॉढ़स बँधाता
कहीं से चला आता है संगतकार का स्वर।
(i) प्रस्तुत काव्यांश के कवि और कविता का नाम लिखिए।
(ii) प्रस्तुत काव्यांश का प्रसंग स्पष्ट कीजिए।
(iii) तारसप्तक से क्या अभिप्राय है ?
(iv) किस कारण से मुख्य गायक की आवाज़ साथ नहीं देती ?
(v) मुख्य गायक को धीरज कौन बँधाता है ?
गद्य खंड
Chapter 7 – नेताजी का चश्मा
Abhi tak Aya he Nhi Exam Me
Chapter 8 – बालगोबिन भगत
बालगोबिन भगत मँझोले कद के गोरे-चिटूटे आदमी थे। साठ से ऊपर के ही होंगे। बाल पक गए थे। लंबी दाढ़ी या जटाजूट तो नहीं रखते थे, किन्तु हमेशा उनका चेहरा सफेद बालों से ही जगमग किए रहता। कपड़े बिल्कुल कम पहनते। कमर में एक लंगोटी मात्र और सिर में कबीरपंथियों की-सी कनफटी टोपी। जब जाड़ा आता, एक काली कमली ऊपर से ओढ़े रहते
प्रश्न. प्रस्तुत गद्यांश के रचयिता एवं पाठ का नाम बताते हुए गद्यांश की व्याख्या कीजिए। ( 3 Mark )
बालगोबिन भगत की संगीत साधना का चरम उत्कर्ष उस दिन देखा गया जिस दिन उनका बेटा मरा। इकलौता बेटा था वह। कुछ सुस्त और बोदा-सा था, किन्तु इसी कारण बालगोबिन भगत उसे और भी मानते। उनकी समझ में ऐसे आदमियों पर ही ज़्यादा नज़र रखनी चाहिए या प्यार करना चाहिए, क्योंकि ये निगरानी और मुहब्बत के ज्यादा हकदार होते हैं।
(i) प्रस्तुत गद्यांश के लेखक एवं पाठ का नाम लिखिए।
(ii) बालगोबिन भगत की संगीत साधना का उत्कर्ष कब देखा गया ?
(iii) बालगोबिन भगत अपने बेटे को किस कारण अधिक प्यार करते थे ?
(iv) बालगोबिन भगत के अनुसार कैसे आदमियों पर ज्यादा निगरानी की आवश्यकता है ?
खेतीबारी करते, परिवार रखते भी, बालगोबिन भगत साधु थे – साधु की सब परिभाषाओं में खरे उतरने वाले। कबीर को “साहब’” मानते थे, उन्हीं के गीतों को गाते, उन्हीं के आदेशों पर चलते। कभी झूठ नहीं बोलते, खरा व्यवहार रखते।
(i) प्रस्तुत गद्यावतरण के रचयिता एवं पाठ का नाम लिखिए।
(ii) बालगोबिन भगत की आजीविका का क्या साधन था ?
(iii) वे किसको अपना आदर्श मानते थे ?
(iv) उनकी किन्हीं दो विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
बालगोबिन भगत की संगीत साधना का चरम उत्कर्ष उस दिन देखा गया जिस दिन उनका बेटा मरा। इकलौता बेटा था वह बहुत सुस्त बोदा-सा था, किन्तु इसी कारण बालगोबिन भगत उसे और भी मानते उनकी समझ में ऐसे आदमियों पर ही ज्यादा नजर रखनी चाहिए या प्यार करना चाहिए, क्योंकि ये निगरानी और मुहब्बत के ज्यादा हकदार होते हैं।
(क) प्रस्तुत गद्यांश के लेखक एवं पाठ का नाम लिखिए।
(ख) बालगोबिन भगत की संगीत साधना का उत्कर्ष कब देखा गया ?
(ग) बालगोबिन भगत अपने बेटे को किस कारण अधिक प्यार करते थे ?
(घ) बालगोबिन के अनुसार कैसे आदमियों को ज्यादा निगरानी की आवश्यकता है ?
आषाढ़ की रिमझिम है। समूचा गाँव खेतों में उतर पड़ा है। कहीं हल चल रहे हैं, कहीं रोपनी हो रही है। धान के पानी भरे खेतों में बच्चे उछल रहे हैं। औरतें कलेवा लेकर मेंड़ पर बैठी हैं। आसमान बादल से घिरा; धूप का नाम नहीं। ठंडी पुरवाई चल रही। ऐसे ही समय आपके कानों में एक स्वर-तरंग झंकार-सी कर उठी।
(i) प्रस्तुत गद्यावतरण के रचयिता एवं पाठ का नाम लिखिए।
(ii) इस गद्यांश में किस ऋतु का वर्णन हुआ है ?
(iii) “रोपनी” शब्द का अर्थ लिखिए।
(iv) झंकार से किसका सम्बंध बताया गया है ?
Chapter 9 – लखनवी अंदाज
नवाब साहब ने बहुत करीने से खीरे की फॉंकों पर जीरा-मिला नमक और लाल मिर्च की सुर्खी बुरक दी। उनकी प्रत्येक भाव-भंगिमा और जबड़ों के स्फुरण से स्पष्ट था कि उस प्रक्रिया में उनका मुख खीरे के रसास्वादन की कल्पना से प्लावित हो रहा था। हम कनखियों से देखकर सोच रहे थे, मियाँ रईस बनते हैं, लेकिन लोगों की नजरों से बच सकने के खयाल में अपनी असलियत पर उतर आए हैं।
(i) प्रस्तुत गद्यावतरण के रचयिता एवं पाठ का नाम लिखिए।
(ii) नवाब साहब की असलियत का वर्णन कीजिए।
(iii) नवाब साहब की भाव-भंगिमा से क्या स्पष्ट था ?
(iv) नवाब साहब को कनखियों से कौन देख रहे थे ?
Chapter 10 – एक कहानी यह भी
आज़ाद हिन्द फौज के मुकदमे का सिलसिला था। सभी कॉलेजों, स्कूलों, दुकानों के लिए हड़ताल का आह्वान था। जो-जो नहीं कर रहे थे, छात्रों का एक बहुत बड़ा समूह वहाँ जाकर हड़ताल करवा रहा था। शाम को पूरा विद्यार्थी-वर्ग चौपड़ पर इकट्ठा हुआ और फिर हुई भाषणबाजी। इस बीच पिताजी के एक दकियानूसी मित्र ने घर आकर अच्छी तरह पिताजी की लू उतारी, “अरे उस मन्नू की तो मत मारी गई है”, पर भण्डारी जी आपको क्या हुआ है ? Most Important
(i) प्रस्तुत गद्यावतरण के रचयिता एवं पाठ का नाम लिखिए।
(ii) हड़ताल का आह्वान क्यों किया गया था ?
(iii) छात्रों का बड़ा समूह क्या कर रहा था ?
(iv) पिताजी के मित्र का स्वभाव कैसा था ?
आजाद हिन्द फौज के मुकदमे का सिलसिला था। सभी कॉलिजों, स्कूलों, दुकानों के लिए हड़ताल का आह्वान था। जो नहीं कर रहे थे, छात्रों का एक बड़ा समूह वहाँ जाकर हड़ताल करवा रहा था। शाम को पूरा विद्यार्थी-वर्ग चौपड़ पर इकट्ठा हुआ और फिर हुई भाषणबाजी। इस बीच पिताजी के एक दकियानूसी मित्र ने घर आकर अच्छी तरह पिताजी की लू उतारी, अरे उस मननू की तो मत मारी गई है, पर भंडारी जी आपको क्या हुआ है ?
(i) प्रस्तुत गद्यांश के पाठ और रचयिता का नाम लिखिए।
(ii) हड़ताल का आह्वान क्यों किया गया था ?
(iii) विद्यार्थी वर्ग कहाँ इकट्ठा हुआ था ?
(iv) पिताजी के मित्र का स्वभाव कैसा था ?
आज से पचास साल पहले अजमेर जैसे शहर में चारों ओर से उमड़ती भीड़ के बीच एक लड़की का बिना किसी संकोच और झिझक के यों धुआँधार बोलते चले जाना ही इसके मूल में रहा हो। पर पिताजी! कितनी तरह के अन्तर्विरोधों के बीच जीते थे वे! एक ओर “विशिष्ट” बनने और बनाने की प्रबल लालसा तो दूसरी ओर अपनी सामाजिक छवि के प्रति भी उतनी ही सजगता। पर क्या यह संभव है ? क्या पिताजी को इस बात का बिल्कुल भी अहसास नहीं था कि इन दोनों का तो रास्ता ही टकराहट का है ? Most Important
(i) प्रस्तुत गद्यावतरण के रचयिता एवं पाठ का नाम लिखिए।
(ii) अजमेर में भीड़ क्यों उमड़ रही थी ?
(iii) पिताजी के किन अन्तर्विरोधों का उल्लेख किया गया है ?
(iv) दोनों बातों को टकराहट का रास्ता क्यों कहा है ?
सिकुड़ती आर्थिक स्थिति के कारण और अधिक विस्फारित उनका अहं उन्हे इस बात तक की अनुमति नहीं देता था कि वे कम-से-कम अपने बच्चों को तो अपनी आर्थिक विवशताओं का भागीदार बनाएँ। नवाबी आदतें, अधूरी महत्वाकांक्षाएँ, हमेशा शीर्ष पर रहने के बाद हाशिए पर सरकते चले जाने की यातना क्रोध बनकर हमेशा माँ को केंपाती-थरथराती रहती थी। अपनों के हाथों विश्वासघात की जाने कैसी गहरी चोटें होंगी वे जिन्होंने आँख मूँंदकर सबका विश्वास करने वाले पिता जी को बाद के दिनों इतना शक्की बना दिया था कि जब-तब हम लोग भी उसकी चपेट में आते ही रहते।
(i) प्रस्तुत गद्यावतरण के रचयिता एवं पाठ का नाम लिखिए।
(ii) पिताजी के शक्की स्वभाव का क्या कारण था ?
(iii) पिताजी के क्रोध का माँ पर क्या प्रभाव पड़ा ?
(iv) उपर्युक्त गद्यांश का आशय स्पष्ट कीजिए।
नवाबी आदतें, अधूरी महत्त्वाकांक्षाएँ, हमेशा शीर्ष पर रहने के बाद हाशिए पर सरकते चले जाने की यातना क्रोध बनकर हमेशा माँ को कँपाती – थरथराती रहती थीं। अपनों के हाथों विश्वासघात की जाने कैसी गहरी चोटें होंगी वे जिन्होंने आँख मूँदकर सबका विश्वास करने वाले पिता को बाद के दिनों में इतना शक्की बना दिया था कि जब-तब हम लोग भी उसकी चपेट में आते ही रहते।
प्रश्न :
(क) प्रस्तुत गद्यांश के लेखक एवं पाठ का नाम लिखिए।
(ख) विश्वासी पिता का शक्की स्वभाव बनने का क्या कारण था ?
(ग) पिता के क्रोध का परिवार पर क्या प्रभाव पड़ा ?
Chapter 11 – नौबतखाने में इबादत
काशी आज भी संगीत के स्वर पर जगती और उसी की थाप पर सोती है। काशी में मरण भी मंगल माना गया है। काशी आनंदकानन है। सबसे बड़ी बात यह है कि काशी के पास उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ जैसा लय और सुर की तमीज सिखाने वाला नायाब हीरा रहा है जो हमेशा से दो कीमों को एक होने व आपस में भाईचारे के साथ रहने की प्रेरणा देता रहा।
(i) प्रस्तुत गद्यावतरण के रचयिता एवं पाठ का नाम लिखिए।
(ii) संगीत के साथ काशी का क्या सम्बंध है ?
(iii) काशी की कोई को विशेषताएँ लिखिए।
(iv) बिस्मिल्ला खाँ की किन्हीं को विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
Chapter 12 – संस्कृति
जिस व्यक्ति की बुद्धि ने अथवा उसके विवेक ने किसी भी नए तथ्य का दर्शन किया, वह व्यक्ति ही वास्तविक संस्कृत व्यक्ति है और उसकी संतान जिसे अपने पूर्वज से वह वस्तु अनायास ही प्राप्त हो गई है, वह अपने पूर्वज की भाँति सभ्य भले ही बन जाए, संस्कृत नहीं कहला सकता। एक आधुनिक उदाहरण लें। न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत का आविष्कार किया। वह संस्कृत मानव था।
(i) प्रस्तुत गद्यावतरण के रचयिता एवं पाठ का नाम लिखिए।
(iii) संस्कृत व्यक्ति किसे कहा जाता है ?
(iii) न्यूटन को संस्कृत मानव” क्यों कहा गया है ?
(iv) संस्कृत व्यक्ति की संतान को क्या कहा गया है ?