HBSE Class 11 Hindi आरोह भाग-1 Important Question Answer 2026

Most of students search over Google for Haryana Board (HBSE) Important Questions 2026. Here is the Main reason because HBSE Board Says that in HBSE Exam 2026 (last 3 Years of Questions will Repeat) so that here are the selected List of Questions of Haryana Board For Class 11.


HBSE Class 11 Hindi आरोह भाग-1 Important Question Answer 2026


गद्य भाग


पाठ 1 – नमक का दारोगा – प्रेमचंद


प्रश्न 1. अलोपीदीन का चरित्र-चित्रण कीजिए। 

उत्तर – अलोपीदीन एक धनी और प्रभावशाली व्यापारी था, जो नमक की तस्करी करता था और धन के बल पर सब कुछ प्राप्त करने का अभ्यस्त था। उसे अपने धन पर अत्यधिक गर्व था और वह मानता था कि ईमानदारी भी पैसों से खरीदी जा सकती है। इसी कारण उसने वंशीधर को रिश्वत देने का प्रयास किया, परंतु असफल रहा। वंशीधर की सत्यनिष्ठा से प्रभावित होकर उसके विचारों में परिवर्तन आया और उसने उनकी ईमानदारी का सम्मान किया। इस प्रकार प्रारंभ में वह अहंकारी और धनलोभी दिखाई देता है, पर अंत में उदार और ईमानदारी का सम्मान करने वाला सिद्ध होता है।


पाठ 2 – मियां नसीरुद्दीन – कृष्णा सोबती


प्रश्न 1. मियां नसीरुद्दीन के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालिए। 

उत्तर – मियाँ नसीरुद्दीन एक सरल, मेहनती और आत्मसम्मान से पूर्ण व्यक्ति थे। वे अपने पेशे के प्रति अत्यंत निष्ठावान थे और काम को पूजा के समान मानते थे। उनमें बनावट या दिखावा नहीं था, बल्कि सादगी और ईमानदारी उनके स्वभाव की प्रमुख विशेषताएँ थीं। वे अपने कार्य में पूरी लगन और धैर्य रखते थे तथा कठिन परिस्थितियों में भी संतुलित बने रहते थे। उनके व्यक्तित्व में आत्मगौरव, कर्मठता और मानवीय संवेदनशीलता का सुंदर समन्वय दिखाई देता है, जो उन्हें एक आदर्श और प्रेरणादायक चरित्र बनाता है।


पाठ 3 – अप्पू के साथ ढाई साल – सत्यजीत रॉय


प्रश्न 1. ‘पथेर पांचाली’ फिल्म की शूटिंग का काम ढाई साल तक क्यों चला ?

उत्तर – ‘पथेर पांचाली’ फिल्म की शूटिंग का काम ढाई साल तक इसलिए चला क्योंकि निर्देशक के पास पर्याप्त धनराशि नहीं थी और उन्हें बार-बार आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। फिल्म का निर्माण सीमित संसाधनों में किया जा रहा था, इसलिए बीच-बीच में पैसों की कमी के कारण शूटिंग रोकनी पड़ती थी। साथ ही अधिकांश कलाकार नए और गैर-पेशेवर थे, जिससे दृश्यों को स्वाभाविक बनाने में अधिक समय लगा। प्राकृतिक परिवेश में वास्तविक परिस्थितियों में शूटिंग करने के कारण भी कार्य में विलंब हुआ। इन सभी कारणों से फिल्म की शूटिंग लंबी अवधि तक चली।


प्रश्न 2. ‘भूलो’ की जगह दूसरा कुत्ता क्यों लाया गया ? उसने फिल्म के किस दृश्य को पूरा किया ?

उत्तर – ‘भूलो’ की जगह दूसरा कुत्ता इसलिए लाया गया क्योंकि लंबे समय तक चलने वाली शूटिंग के दौरान मूल कुत्ता उपलब्ध नहीं रह सका था। फिल्म की शूटिंग में समय अधिक लगने के कारण पहले वाला कुत्ता या तो मर गया था या उसे लाना संभव नहीं था। इसलिए दृश्य की निरंतरता बनाए रखने के लिए उसी के समान दिखने वाला दूसरा कुत्ता लाया गया। इस नए कुत्ते ने उस दृश्य को पूरा किया जिसमें वह दुर्गा के पीछे-पीछे दौड़ता हुआ दिखाई देता है। इस प्रकार फिल्म की यथार्थता बनाए रखने के लिए यह परिवर्तन किया गया।


पाठ 4 – विदाई संभाषण – बालमुकुंद गुप्त


प्रश्न 1. लेखक के अनुसार लॉर्ड कर्जन की मानसिकता का वर्णन कीजिए। 

उत्तर – लेखक के अनुसार लॉर्ड कर्जन की मानसिकता अहंकारी, दंभी और साम्राज्यवादी थी। वह भारतीयों को हीन दृष्टि से देखता था और उन्हें शासन के योग्य नहीं मानता था। उसके भीतर ब्रिटिश सत्ता का अत्यधिक गर्व था तथा वह अपने निर्णयों को सर्वोपरि समझता था। बंग-भंग जैसा निर्णय भी उसने भारतीय जनता की भावनाओं की उपेक्षा करते हुए लिया। उसकी सोच में भारतीयों के हित की अपेक्षा अंग्रेजी शासन को सुदृढ़ करना अधिक महत्त्वपूर्ण था। इस प्रकार उसकी मानसिकता शासकीय अहंकार और भारतीयों के प्रति अविश्वास से भरी हुई थी।


प्रश्न 2. भारतीय जनता की किन विशेषताओं का लेखक ने पठित पाठ में उल्लेख किया है ?

उत्तर – लेखक ने पाठ में भारतीय जनता की सहनशीलता, धैर्य और आत्मसंयम जैसी विशेषताओं का उल्लेख किया है। उन्होंने बताया है कि भारतीय जनता अन्याय और अत्याचार को लंबे समय तक सहन करती रही, परंतु जब उसकी भावनाओं को ठेस पहुँचती है तो वह एकजुट होकर विरोध भी करती है। लेखक ने यह भी स्पष्ट किया है कि भारतीय जनता भावुक होते हुए भी राष्ट्रहित के प्रति जागरूक है और अपनी सांस्कृतिक अस्मिता के प्रति संवेदनशील रहती है। आवश्यकता पड़ने पर वह त्याग और संघर्ष करने के लिए भी तत्पर हो जाती है। इस प्रकार भारतीय जनता को सहनशील, जागरूक और आत्मसम्मानी बताया गया है।


पाठ 5 – गलता लोहा – शेखर जोशी


प्रश्न 1. धनराम का चरित्र-चित्रण कीजिए। 

उत्तर – धनराम एक सरल, मेहनती और आत्मसम्मानी व्यक्ति है। वह अपने काम के प्रति निष्ठावान है और जीवन में ईमानदारी को सर्वोपरि मानता है। उसके स्वभाव में सीधापन और स्पष्टवादिता है, जिससे वह किसी प्रकार की छल-कपट या दिखावे से दूर रहता है। आर्थिक सीमाओं के बावजूद वह आत्मगौरव बनाए रखता है और कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य नहीं खोता। उसके भीतर मानवीय संवेदनाएँ तथा कर्तव्यनिष्ठा का भाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। इस प्रकार धनराम का चरित्र सादगी, श्रमशीलता और आत्मसम्मान का प्रतीक है।


प्रश्न 2. मोहन के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालिए। 

उत्तर – मोहन एक संवेदनशील, जिज्ञासु और आत्मचिंतनशील व्यक्तित्व का धनी है। उसके स्वभाव में सरलता और सच्चाई का भाव स्पष्ट दिखाई देता है। वह परिस्थितियों को गहराई से समझने का प्रयास करता है और जीवन के प्रति गंभीर दृष्टिकोण रखता है। उसमें मानवीय संवेदनाएँ प्रबल हैं, इसलिए वह दूसरों के दुःख-सुख को महसूस करता है। साथ ही, उसमें आत्मसम्मान और नैतिकता का भाव भी विद्यमान है, जो उसके आचरण में झलकता है। इस प्रकार मोहन का व्यक्तित्व संवेदनशीलता, ईमानदारी और विचारशीलता का सुंदर समन्वय प्रस्तुत करता है।


प्रश्न 3. घनश्याम मोहन को अपना प्रतिद्वंदी क्यों नहीं समझता था ?

उत्तर – घनश्याम मोहन को अपना प्रतिद्वंदी इसलिए नहीं समझता था क्योंकि वह स्वयं को उससे अधिक योग्य, प्रभावशाली और श्रेष्ठ मानता था। उसे अपने ज्ञान, क्षमता और स्थान पर अत्यधिक विश्वास था, जिसके कारण वह मोहन को अपने स्तर का नहीं समझता था। उसके मन में यह भावना थी कि मोहन उसके सामने टिक नहीं सकता, इसलिए वह उसे प्रतियोगी के रूप में गंभीरता से नहीं लेता था। इसी आत्मविश्वास और अहंभाव के कारण वह मोहन को अपना प्रतिद्वंदी नहीं मानता था।


पाठ 6 – रजनी – मन्नू भंडारी


प्रश्न 1. ‘रजनी’ पाठ का सन्देश स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – ‘रजनी’ पाठ का मुख्य सन्देश यह है कि जीवन में बाहरी सौंदर्य से अधिक आंतरिक गुणों और मानवीय संवेदनाओं का महत्व होता है। मनुष्य का सच्चा मूल्य उसके चरित्र, त्याग, प्रेम और सहानुभूति में निहित होता है, न कि केवल रूप-रंग में। इस पाठ के माध्यम से लेखक ने यह स्पष्ट किया है कि विपरीत परिस्थितियाँ व्यक्ति के आत्मबल और धैर्य की परीक्षा लेती हैं, और जो व्यक्ति साहस तथा सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखता है, वही जीवन में सच्ची सफलता प्राप्त करता है। अतः हमें बाह्य रूप के मोह में न पड़कर आंतरिक गुणों को महत्व देना चाहिए और मानवता को सर्वोपरि मानना चाहिए।


प्रश्न 2. ट्यूशन के विषय में अमित की धारणा पर प्रकाश डालिए। 

उत्तर – अमित की धारणा ट्यूशन के विषय में नकारात्मक थी। वह मानता था कि ट्यूशन पढ़ना विद्यार्थियों की आत्मनिर्भरता और मौलिक सोच को कमजोर कर देता है। उसके अनुसार सच्ची शिक्षा वही है जो विद्यार्थी स्वयं परिश्रम और समझ के आधार पर प्राप्त करे। वह यह भी सोचता था कि ट्यूशन पर अत्यधिक निर्भरता विद्यार्थियों को आलसी बना देती है और वे स्वयं अध्ययन करने का प्रयास नहीं करते। इसलिए अमित आत्मअध्ययन और स्वावलंबन को अधिक महत्त्व देता था तथा ट्यूशन को आवश्यक नहीं मानता था।


पाठ 7 – जामुन का पेड़ – कृष्ण चंद्र


प्रश्न 1. ‘जामुन का पेड़’ पाठ का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए। 

उत्तर – ‘जामुन का पेड़’ पाठ का उद्देश्य शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली में व्याप्त लालफीताशाही, उदासीनता और जिम्मेदारी से बचने की प्रवृत्ति पर व्यंग्य करना है। लेखक ने यह दिखाया है कि किस प्रकार एक साधारण-सी समस्या भी विभागों के आपसी टालमटोल और नियमों की जटिलता के कारण गंभीर रूप ले लेती है। इस पाठ के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि जब अधिकारी संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्य नहीं करते, तब आम व्यक्ति को अनावश्यक कष्ट उठाना पड़ता है। अतः व्यवस्था में सुधार, जिम्मेदारी की भावना और मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।


प्रश्न 2. ‘जामुन का पेड़ ‘ के आधार पर सरकारी कार्यालयों की कार्य-प्रणाली पर प्रकाश डालिए।

उत्तर – ‘जामुन का पेड़’ पाठ के आधार पर सरकारी कार्यालयों की कार्य-प्रणाली अत्यंत धीमी, जटिल और लालफीताशाही से ग्रस्त दिखाई गई है। किसी साधारण समस्या के समाधान के लिए भी फाइलें एक विभाग से दूसरे विभाग में भेजी जाती रहती हैं, परंतु कोई भी अधिकारी स्पष्ट रूप से जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं होता। नियमों और औपचारिकताओं का इतना अधिक पालन किया जाता है कि मानवीय संवेदना और तात्कालिक आवश्यकता की उपेक्षा हो जाती है। परिणामस्वरूप काम में अनावश्यक विलंब होता है और आम व्यक्ति को कष्ट सहना पड़ता है। इस प्रकार पाठ में सरकारी दफ्तरों की कार्य-प्रणाली पर व्यंग्य करते हुए उनकी निष्क्रियता, टालमटोल और असंवेदनशीलता को उजागर किया गया है।


प्रश्न 3. दबा हुआ आदमी एक कवि है, यह बात कैसे पता चली और इस जानकारी का, फाइल की यात्रा पर क्या असर पड़ा ? 

उत्तर – ‘जामुन का पेड़’ पाठ में दबे हुए आदमी के कवि होने का पता तब चला, जब उसकी जेब से कागज़ और कविताएँ मिलीं तथा यह स्पष्ट हुआ कि वह साहित्य से जुड़ा व्यक्ति है। जैसे ही अधिकारियों को ज्ञात हुआ कि वह एक कवि है, उसके प्रति दृष्टिकोण में परिवर्तन आ गया। साधारण व्यक्ति समझकर जिस मामले को वे टाल रहे थे, वही मामला अचानक महत्त्वपूर्ण बन गया। इसके परिणामस्वरूप फाइल की यात्रा तेज हो गई और वह विभिन्न विभागों में शीघ्रता से भेजी जाने लगी। इस प्रकार उस व्यक्ति के कवि होने की जानकारी ने प्रशासनिक उदासीनता को कुछ हद तक कम कर दिया और कार्यवाही में तेजी आ गई।


पाठ 8 – भारत माता – जवाहरलाल नेहरू


प्रश्न 1. नेहरू जी ने ‘भारत माता की जय’ का क्या अर्थ बताएं? 

उत्तर – नेहरू जी ने ‘भारत माता की जय’ का अर्थ केवल भूमि या भौगोलिक सीमा की विजय नहीं बताया। उनके अनुसार भारत माता का वास्तविक अर्थ इस देश की जनता है—यहाँ के किसान, मजदूर, स्त्री-पुरुष, बच्चे और हर वर्ग के लोग ही भारत माता हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब हम ‘भारत माता की जय’ कहते हैं, तो उसका आशय देशवासियों की उन्नति, सम्मान और समृद्धि की कामना से होता है। इस प्रकार यह नारा केवल भावनात्मक उद्घोष नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रत्येक नागरिक के प्रति सम्मान और एकता का प्रतीक है।


पद्य खंड


पाठ 1 – हम तो एक एक करि जाना  


प्रश्न 1. कबीर की सुधारवादी चेतना का परिचय दीजिए।

उत्तर – कबीर की सुधारवादी चेतना अत्यंत प्रखर, स्पष्ट और निर्भीक थी। उन्होंने समाज में फैली धार्मिक रूढ़ियों, अंधविश्वासों, पाखंडों और जाति-पाँति के भेदभाव का खुलकर विरोध किया। वे हिंदू और मुस्लिम दोनों समाजों की कुरीतियों पर समान रूप से प्रहार करते थे और बाहरी आडंबरों की अपेक्षा सच्चे आचरण तथा आंतरिक शुद्धता को महत्व देते थे। कबीर ने मूर्तिपूजा, कर्मकांड और ढोंग का विरोध करते हुए प्रेम, सत्य और मानवता को सच्चा धर्म बताया। उनकी वाणी में समाज को जागरूक करने और सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। इस प्रकार कबीर की सुधारवादी चेतना समाज में समानता, सद्भाव और नैतिकता स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास थी।


प्रश्न 2. कबीर के सुधारवादी दृष्टिकोण पर प्रकाश डालिए।

उत्तर – कबीर का सुधारवादी दृष्टिकोण अत्यंत क्रांतिकारी, स्पष्ट और मानवतावादी था। उन्होंने समाज में व्याप्त अंधविश्वास, जाति-भेद, ऊँच-नीच और धार्मिक आडंबरों का कठोर शब्दों में विरोध किया। वे मानते थे कि ईश्वर की प्राप्ति बाहरी कर्मकांडों, तीर्थयात्राओं या दिखावे से नहीं, बल्कि सच्चे मन, सदाचार और प्रेम से होती है। कबीर ने हिंदू और मुस्लिम दोनों समाजों की कुरीतियों पर समान रूप से प्रहार किया और मानवता को सर्वोच्च धर्म बताया। उनका उद्देश्य समाज को सच्चे ज्ञान, समानता और सद्भाव की ओर प्रेरित करना था। इस प्रकार उनका सुधारवादी दृष्टिकोण सामाजिक जागरण और नैतिक उत्थान का संदेश देता है।


प्रश्न 3. ‘निरभै भया कबीर दिवाना’ पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए। 

उत्तर – ‘निरभै भया कबीर दिवाना’ पंक्ति का भाव यह है कि कबीर निर्भय होकर सत्य के मार्ग पर चलने लगे और संसार की परवाह छोड़ दी। जब उन्हें आत्मज्ञान की प्राप्ति हुई, तब उनके मन से हर प्रकार का भय समाप्त हो गया। वे समाज की आलोचना, विरोध या दंड से नहीं डरे और निडर होकर धार्मिक पाखंडों तथा कुरीतियों के विरुद्ध आवाज उठाई। यहाँ ‘दिवाना’ शब्द का अर्थ पागल नहीं, बल्कि ईश्वर-प्रेम और सत्य में पूर्ण रूप से लीन व्यक्ति से है। इस प्रकार यह पंक्ति कबीर की निडरता, आत्मविश्वास और ईश्वर-भक्ति की तीव्रता को प्रकट करती है।


पाठ 2 – मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरों ने कोई 


प्रश्न 1. मीरा को भक्ति मार्ग में किन-किन बाधाओं का सामना करना पड़ा ?

उत्तर – मीरा को भक्ति मार्ग में अनेक सामाजिक और पारिवारिक बाधाओं का सामना करना पड़ा। राजघराने की बहू होने के कारण उनसे मर्यादा और परंपराओं का पालन करने की अपेक्षा की जाती थी, परंतु वे सांसारिक आडंबरों से दूर रहकर कृष्ण-भक्ति में लीन रहती थीं। उनके इस व्यवहार का परिवार और समाज ने विरोध किया तथा उन्हें उपेक्षा और अपमान सहना पड़ा। कहा जाता है कि उन्हें भक्ति से रोकने के लिए विष का प्याला और साँप तक भेजा गया, परंतु वे अडिग रहीं। इन सब कठिनाइयों के बावजूद मीरा ने अपने भक्ति मार्ग को नहीं छोड़ा। इस प्रकार सामाजिक बंधनों, पारिवारिक विरोध और प्राणघातक प्रयासों के बावजूद उनकी आस्था अटल बनी रही।


प्रश्न 2. मीरा कृष्ण की उपासना किस रूप में करती है ? 

उत्तर – मीरा कृष्ण की उपासना अपने प्रियतम और पति के रूप में करती हैं। वे उन्हें अपना सर्वस्व मानती हैं और सांसारिक संबंधों से ऊपर उठकर स्वयं को पूर्णतः कृष्ण को समर्पित कर देती हैं। उनके लिए कृष्ण केवल ईश्वर नहीं, बल्कि जीवनसाथी और प्रेम के परम आधार हैं। उनकी भक्ति में दास्य भाव की अपेक्षा माधुर्य भाव अधिक प्रकट होता है, जिसमें वे कृष्ण के प्रति गहरी प्रेमानुभूति व्यक्त करती हैं। इस प्रकार मीरा की उपासना प्रेम, समर्पण और आत्मनिवेदन से पूर्ण है।


पाठ 3 – घर की याद – भवानी प्रसाद मिश्र


प्रश्न 1. भवानी प्रसाद मिश्र के परिवार को रेखांकित कीजिए।

उत्तर – भवानी प्रसाद मिश्र का परिवार संस्कारवान, सादगीपूर्ण और भारतीय परंपराओं से जुड़ा हुआ था। उनके पिता शिक्षित एवं साहित्य-प्रेमी व्यक्ति थे, जिनका प्रभाव मिश्र जी के व्यक्तित्व और काव्य-संवेदना पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। परिवार का वातावरण नैतिक मूल्यों, अनुशासन और देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत था। इसी पारिवारिक परिवेश ने उनके भीतर सरलता, मानवीय संवेदना और सामाजिक चेतना का विकास किया। उनके परिवार की सादगी और सांस्कृतिक वातावरण ने उनके साहित्यिक जीवन को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


प्रश्न 2. ‘घर की याद’ कविता का मूलभाव स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – ‘घर की याद’ कविता का मूलभाव यह है कि मनुष्य चाहे जितनी दूर चला जाए, उसे अपने घर, परिवार और बचपन की स्मृतियाँ सदैव भावुक बना देती हैं। कवि ने घर के स्नेहपूर्ण वातावरण, माता-पिता के प्रेम और पारिवारिक अपनत्व को अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया है। घर से दूर रहने पर मन में उत्पन्न होने वाली विरह-भावना और अकेलेपन को कविता में स्पष्ट रूप से व्यक्त किया गया है। इस कविता के माध्यम से यह संदेश मिलता है कि घर केवल एक स्थान नहीं, बल्कि प्रेम, सुरक्षा और आत्मीयता का प्रतीक है, जिसकी स्मृति मनुष्य के हृदय में सदैव जीवित रहती है।


प्रश्न 3.  ‘घर की याद’ कविता में पिता के व्यक्तित्व की किन विशेषताओं को उकेरा है ?

उत्तर – ‘घर की याद’ कविता में पिता के व्यक्तित्व की अनेक महत्वपूर्ण विशेषताओं को उकेरा गया है। कवि ने पिता को अनुशासनप्रिय, कर्मठ और जिम्मेदार व्यक्ति के रूप में चित्रित किया है। वे परिवार के प्रति कर्तव्यनिष्ठ हैं और अपने आचरण से बच्चों को सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। उनके स्वभाव में सादगी, गंभीरता और आत्मसंयम दिखाई देता है। साथ ही, उनके भीतर परिवार के प्रति गहरा प्रेम और संरक्षण का भाव निहित है, यद्यपि वे उसे बाहरी प्रदर्शन के रूप में व्यक्त नहीं करते। इस प्रकार कविता में पिता का व्यक्तित्व दृढ़, संयमी और स्नेहमय रूप में उभरकर सामने आता है।


पाठ 4 – चंपा काले काले अक्षर नहीं चीन्हती – त्रिलोचन


प्रश्न 1. कवि त्रिलोचन ने चंपा की किन चारित्रिक विशेषताओं का उल्लेख किया है ? 

उत्तर – त्रिलोचन द्वारा रचित कविता में चंपा की सरल, निष्कपट और स्वाभाविक चारित्रिक विशेषताओं का चित्रण किया गया है। चंपा एक सीधी-सादी ग्रामीण लड़की है, जिसके मन में बनावट या छल-कपट नहीं है। वह स्पष्टवादी है और जो बात मन में होती है, उसे सहज रूप से कह देती है। उसमें आत्मसम्मान और स्वतंत्र सोच का भाव भी है, इसलिए वह बिना समझे-बूझे किसी बात को स्वीकार नहीं करती। उसकी सहज जिज्ञासा और निष्कलुष स्वभाव उसके व्यक्तित्व को जीवंत और प्रभावशाली बनाते हैं। इस प्रकार चंपा का चरित्र ग्रामीण जीवन की सादगी और नैसर्गिकता का प्रतीक है।


प्रश्न 2. चंपा ने ऐसा क्यों कहा, कि कलकत्ता पर बजर गिरे ?

उत्तर – चंपा ने ऐसा इसलिए कहा कि उसे यह समझ में नहीं आता कि कलकत्ता जाने से लोग बदल क्यों जाते हैं। उसके अनुभव में कलकत्ता एक ऐसा स्थान बन गया था जहाँ जाने के बाद लोग गाँव, परिवार और अपनों से दूर हो जाते हैं। वह भोलेपन और भावावेश में यह कहती है कि “कलकत्ता पर बजर गिरे”, क्योंकि उसके मन में यह भावना है कि वही शहर उसके प्रियजनों को उससे दूर कर देता है। उसके इस कथन में क्रोध से अधिक दर्द और असहायता झलकती है। इस प्रकार यह वाक्य चंपा के निष्कपट प्रेम और लगाव को व्यक्त करता है।


पाठ 5 – गजल ( साये में धूप ) – दुष्यंत कुमार


प्रश्न 1. ‘साये में धूप’ गज़ल में कवि ने मानवीय पीड़ा का यथार्थ चित्रण किया है, स्पष्ट करें।

उत्तर – ‘साये में धूप’ ग़ज़ल में कवि ने आधुनिक समाज की विडंबनाओं और आम आदमी की पीड़ा का अत्यंत यथार्थ चित्रण किया है। उन्होंने दिखाया है कि स्वतंत्रता और प्रगति के दावों के बावजूद सामान्य व्यक्ति अभाव, अन्याय और निराशा से घिरा हुआ है। व्यवस्था की असमानता, राजनीतिक छल और सामाजिक संवेदनहीनता के कारण व्यक्ति अपने ही देश में उपेक्षित महसूस करता है। कवि की पंक्तियों में भूख, बेरोज़गारी और टूटते हुए विश्वास की वेदना स्पष्ट रूप से व्यक्त होती है। उनकी भाषा सीधी, व्यंग्यपूर्ण और प्रभावशाली है, जो समाज की सच्चाई को बिना किसी आडंबर के सामने रखती है। इस प्रकार ग़ज़ल मानवीय पीड़ा, संघर्ष और व्यवस्था की कठोर वास्तविकता का सशक्त प्रतिबिंब प्रस्तुत करती है।


पाठ 6 – (i) हे भूख! मत मचल (ii) हे मेरे जूही के फूल जैसे ईश्वर – अक्क महादेवी


प्रश्न 1. अक्क महादेवी कृत दूसरे वचन में ईश्वर से क्या कामना की गई है और क्यों ?

उत्तर – अक्क महादेवी कृत दूसरे वचन में ईश्वर से यह कामना की गई है कि वे उन्हें सांसारिक मोह-माया, अहंकार और बंधनों से मुक्त करें तथा अपने प्रति अटूट भक्ति और पूर्ण समर्पण की शक्ति प्रदान करें। कवयित्री चाहती हैं कि उनका मन केवल ईश्वर में ही रमे और किसी भी प्रकार का सांसारिक आकर्षण उन्हें विचलित न कर सके। वे ईश्वर से आत्मबल, वैराग्य और सच्चे प्रेम की याचना करती हैं, ताकि उनका जीवन पूर्णतः आध्यात्मिक मार्ग पर अग्रसर हो सके। इस कामना के पीछे उनका उद्देश्य आत्मिक शुद्धि और ईश्वर से एकाकार होना है।


पाठ 7 – सबसे खतरनाक – पाश


प्रश्न 1. ‘सबसे खतरनाक’ कविता का सार लिखिए ।

उत्तर – ‘सबसे खतरनाक’ कविता का सार यह है कि कवि ने जीवन में उन खतरों की ओर ध्यान आकर्षित किया है जो बाहरी नहीं, बल्कि आंतरिक और मानसिक होते हैं। कवि के अनुसार सबसे खतरनाक वह स्थिति है जब मनुष्य के भीतर सपने मर जाते हैं, उसकी संवेदनाएँ समाप्त हो जाती हैं और वह अन्याय के प्रति मौन हो जाता है। भय, चुप्पी और अन्याय को सहन करना किसी भी शारीरिक खतरे से अधिक घातक है। कविता यह संदेश देती है कि व्यक्ति को अन्याय के विरुद्ध जागरूक और संघर्षशील बने रहना चाहिए तथा अपने सपनों और आशाओं को जीवित रखना चाहिए। यही जीवन की सच्ची चेतना और साहस है।


प्रश्न 2. सबसे खतरनाक मानसिकता का वर्णन कीजिए।

उत्तर – ‘सबसे खतरनाक’ कविता के अनुसार सबसे खतरनाक मानसिकता वह है जिसमें मनुष्य अन्याय, अत्याचार और शोषण को देखकर भी चुप रहता है और उसे सामान्य मान लेता है। जब व्यक्ति के भीतर के सपने मर जाते हैं, आशाएँ समाप्त हो जाती हैं और वह भय या स्वार्थ के कारण सच बोलने का साहस खो देता है, तब यही मानसिकता सबसे घातक बन जाती है। यह स्थिति व्यक्ति को भीतर से निष्प्राण और संवेदनहीन बना देती है। कवि का संकेत है कि बाहरी खतरे उतने भयानक नहीं होते, जितना कि मन का डर, निष्क्रियता और समझौता करने की प्रवृत्ति। यही मानसिकता समाज को धीरे-धीरे कमजोर और जड़ बना देती है।


पाठ 8 – आओ, मिलकर बचाएं – निर्मला पुतुल


प्रश्न 1. कवयत्री ने पशुओं के लिए हरी-हरी घास के मैदान बचाने का आग्रह क्यों किया है?

उत्तर – कवयित्री ने पशुओं के लिए हरी-हरी घास के मैदान बचाने का आग्रह इसलिए किया है क्योंकि आधुनिक विकास और मानवीय स्वार्थ के कारण प्रकृति का निरंतर विनाश हो रहा है। जंगलों और खुले मैदानों के घटने से पशुओं का प्राकृतिक आवास नष्ट होता जा रहा है, जिससे उनका जीवन संकट में पड़ जाता है। कवयित्री मानती हैं कि मनुष्य को केवल अपने लाभ के लिए प्रकृति का दोहन नहीं करना चाहिए, बल्कि अन्य जीवों के अधिकारों और आवश्यकताओं का भी ध्यान रखना चाहिए। हरी-भरी घास के मैदान पशुओं के भोजन और जीवन-निर्वाह के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। इसलिए वे प्रकृति संरक्षण और सह-अस्तित्व की भावना को बनाए रखने का संदेश देती हैं।


प्रश्न 2. माटी का रंग प्रयोग करते हुए किस बात की ओर संकेत किया है ?

उत्तर – ‘माटी का रंग’ प्रयोग करते हुए कवि ने मनुष्य की अपनी जन्मभूमि, संस्कृति और पहचान की ओर संकेत किया है। यहाँ ‘माटी का रंग’ केवल मिट्टी का वास्तविक रंग नहीं, बल्कि उस भूमि से जुड़े संस्कार, जीवन-मूल्य और आत्मीय संबंधों का प्रतीक है। कवि यह बताना चाहता है कि मनुष्य चाहे जहाँ भी चला जाए, उसकी जड़ें अपनी माटी से ही जुड़ी रहती हैं। यह प्रयोग अपने देश और धरती के प्रति प्रेम, अपनत्व और गर्व की भावना को प्रकट करता है। साथ ही यह संकेत भी देता है कि मनुष्य को अपनी मूल पहचान और परंपराओं को नहीं भूलना चाहिए।


 

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