Most of students search over Google for Haryana Board (HBSE) Important Questions 2026. Here is the Main reason because HBSE Board Says that in HBSE Exam 2026 (last 3 Years of Questions will Repeat) so that here are the selected List of Questions of Haryana Board For Class 11.
HBSE Class 11 Hindi आरोह सप्रसंग व्याख्या Important Question Answer 2026
गद्य भाग
Chapter 1 – नमक का दारोगा
नौकरी में ओहदे की ओर ध्यान मत देना, यह तो पीर का मजार है। निगाह चढ़ावे और चादर पर रखनी चाहिए। ऐसा काम ढूँढ़ना, जहाँ कुछ ऊपरी आय हो । मासिक वेतन तो पूर्णमासी का चाँद है जो एक दिन दिखाई देता है और घटते घटते लुप्त हो जाता है। ऊपरी आय बहता हुआ स्रोत है जिससे सदैव प्यास बुझती है। Most Important
मैं कगारे पर का वृक्ष हो रहा हूँ, न मालूम कब गिर पहूँ। अब तुम्हीं घर के मालिक-मुख्तार हो। नौकरी में ओहदे की ओर ध्यान मत देना, यह तो पीर का मजार है। निगाह चढ़ावे और चादर पर रखनी चाहिए।
Chapter 2 – मियां नसीरुद्दीन
फिर तेवर चढ़ा हमें घूरकर कहा खिलाएँगे, आपको। ‘तुनकी पापड़ से ज्यादा महीन होती है, महीना, हाँ किसी दिन एकाएक मियाँ की आँखों के आगे कुछ कौंध गया। एक लंबी साँस भरी और किसी गुमशुदा याद को ताजा करने को कहा ‘उतर गए वे जमाने। और गए वे कद्रदान जो पकाने-खाने की कद्र करना जानते थे। मियाँ, अब क्या रखा है निकाली तंदूर से-निगली और हजम !’
Chapter 3 – अप्पू के साथ ढाई साल
फिल्म का काम ढाई साल चलने वाला है। इस बात का अंदाजा मुझे पहले नहीं था। इसलिए जैसे दिन बीतने लगे, वैसे-वैसे मुझे डर लगने लगा। अप्पू और दुर्गा की भूमिका निभाने वाले बच्चे ज्यादा बड़े हो गए, तो फिल्म में वह दिखाई देगा। लेकिन मेरी खुशकिस्मती से उस उम्र में बच्चे जितना बढ़ते हैं, उतने अप्पू और दुर्गा की भूमिका निभाने वाले बच्चे नहीं बढ़े।
Chapter 4 – विदाई संभाषण
प्यारे नरवरगढ़ ! मेरा प्रणाम लो। आज मैं तुझसे जुदा होता हूँ। तु मेरा अन्नदाता है। अपनी विपद के दिन मैंने तुझमें काटे हैं। तेरे ऋण का बदला मैं गरीब सिपाही नहीं दे सकता। भाई नरवरगढ़ ! यदि मैंने जानबूझकर एक दिन भी अपनी सेवा में चूक की हो, यहाँ की प्रजा की शुभ चिंता न की हो, यहाँ की स्त्रियों को माता और बहन की दृष्टि से न देखा हो तो मेरा प्रणाम न ले, नहीं तो प्रसन्न होकर एक बार मेरा प्रणाम ले और मुझे जाने की आज्ञा दे।
Chapter 5 – गलता लोहा
सामान्य तौर से ब्राह्मण टोले के लोगों का शिल्पकार टोले में उठना-बैठना नहीं होता था। किसी काम-काज के सिलसिले में यदि शिल्पकार टोले में आना ही पड़ा तो खड़े-खड़े बातचीत निपटा ली जाती थी। ब्राह्मण टोले के लोगों को बैठने के लिए कहना भी उनकी मर्यादा के विरुद्ध समझा जाता था। पिछले कुछ वर्षों से शहर में जा रहने के बावजूद मोहन गाँव की इन मान्यताओं से अपरिचित हो ऐसा संभव नहीं था। Most Important
धनराम की संकोच, असमंजस और धर्म संकट की स्थिति से उदासीन मोहन संतुष्ट भाव से अपने लोहे के छल्ले की त्रुटिहीन गोलाई को जाँच रहा था। उसने धनराम की ओर अपनी कारीगरी की स्वीकृति पाने की मुद्रा में देखा ? उसकी आँखों में एक सर्जक की चमक थी, जिसमें न स्पर्द्धा थी और न ही किसी प्रकार की हार-जीत का भाव।
थोड़ी देर पहले तक थमाचौकड़ी मचाते, उठा-पटक करते और बांज के पेड़ों की टहनियों पर झूलते बच्चों को जैसे साँप सूंघ गया है। कड़े स्वर में वह पूछते हैं, ‘प्रार्थना कर ली तुम लोगों ने” ? यह जानते हुए भी कि यदि प्रार्थना हो गई होती तो गोपाल सिंह की दुकान तक उनका समवेत स्वर पहुँचता ही, त्रिलोक सिंह घूर-घूरकर एक-एक लड़के को देखते हैं। फिर यही कड़कदार आवाज, मोहन नहीं आया आज ?
Chapter 6 – रजनी
गलती करने वाला तो है ही गुनाहगार, पर उसे बर्दाश्त करने वाला ‘भी कम गुनाहगार नहीं होता; जैसे लीला बेन और कांति भाई और हजारों-हजारों माँ-बाप। लेकिन सबसे बड़ा गुनाहगार तो वह है जो चारों तरफ अन्याय, अत्याचार और तरह-तरह की धाँधलियों को देखकर भी चुप बैठा रहता है।
Chapter 7 – जामुन का पेड़
प्रधानमंत्री ने इस पेड़ को काटने का हुक्म दे दिया और इस घटना की सारी अंतर्राष्ट्रीय जिम्मेदारी अपने सिर ले ली है। कल यह पेड़ काट दिया जाएगा और तुम इस संकट से छुटकारा हासिल कर लोगे।
Chapter 8 – भारत माता
हमारे पुराने महाकाव्यों ने और पुराणों की कथा-कहानियों ने, जिन्हें वे खूब जानते थे, उन्हें इस देश की कल्पना करा दी थी, और हमेशा कुछ लोग ऐसे मिल जाते थे, जिन्होंने हमारे बड़े-बड़े तीर्थों की यात्रा कर रखी थी, जो हिन्दुस्तान के चारों कोनों पर हैं। या हमें पुराने सिपाही मिल जाते, जिन्होंने पिछली बड़ी जंग में या और धावों के सिलसिले में विदेशों में नौकरियाँ की थीं। सन् तीस के बाद जो आर्थिक मंदी पैदा हुई थी, उसकी वजह से दूसरे मुल्कों के बारे में मेरे हवाले उनकी समझ में आ जाते थे।
HBSE Class 11 Hindi पद्य खंड
Chapter 1 – हम तो एक एक करि जाना
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Chapter 2 – मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरों ने कोई
मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई ।
जाके सिर मोर मुकुट, मेरो पति सोई । ।
छाँड़ि दई कुल की कानि, कहा करिहै कोई।
संतन ढिग बैठि-बैठि, लोक लाज खोई।।
अंसुवन जल सींचि-सींचि, प्रेम-बेलि बोई।
अब तो बेलि फैलि गई, आणंद-फल होई ।। Most Important
दूध की मथनियाँ बड़े प्रेग से विलोगी
दधि मदि घृत काढ़ि लियो, डारि दयि छोयी
भगत देखि राजी हुयी, जगत देखि रोयी
दासी मीरा लाल गिरधर! तारो अब मोही
पग घुंघरू बांधि मीरां नाची, मैं तो मेरे नारायण सूं,
आपहिं हो गई साची लोग कहें, मीरां भई बावरी;
न्यात कहै कुल-नासी विस का प्याला राणा भेज्या,
पीवत मीरां हाँसी मीरा के प्रभु गिरधर नागर, सहज मिले अविनासी
प्रश्न :
(i) मीरा कृष्ण की भक्ति में लीन होकर क्या करने लगी थी ?
(ii) लोग मीरा को बावरी क्यों कहते हैं ?
(iii) पद्यांश के रचयिता व कविता का नाम लिखें।
(iv) ‘सहज मिले अविनाशी’ का आशय स्पष्ट कीजिए।
(v). मीरा के लिए विष का प्याला किसने भेजा ?
Chapter 3 – घर की याद
वह तुम्हारा मन समझकर
और अपनापन समझकर
गया है सो ठीक ही है
यह तुम्हारी लीक ही है।
मैं मजे में हूँ सही है
घर नहीं हूँ बस यही है,
किंतु यह बस बड़ा बस है
इसी बस से सब विरस है।
हे सजीले हरे सावन,
हे कि मेरे पुण्य पावन,
तुम बरस लो वे न बरसें,
पाँचवे को वे न तरसें,
Chapter 4 – चंपा काले काले अक्षर नहीं चीन्हती
मैं तो ब्याह कभी न करूँगी
और कहीं जो ब्याह हो गया
तो मैं अपने बालम को सँग साथ रखूँगी
कलकत्ता मैं कभी न जाने दूँगी
कलकत्ते पर बजर गिरे।
Chapter 5 – गजल ( साये में धूप )
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Chapter 6 – (i) हे भूख! मत मचल (ii) हे मेरे जूही के फूल जैसे ईश्वर
हे मेरे जूही के फूल जैसे ईश्वर
मँगवाओ मुझसे भीख
और कुछ ऐसा करो
कि भूल जाऊँ अपना घर पूरी तरह
झोली फैलाऊँ और न मिले भीख
कोई हाथ बढ़ाए कुछ देने को
तो वह गिर जाए नीचे
और यदि मैं झुकूँ उसे उठाने
तो कोई कुत्ता आ जाए
और उसे झपटकर छीन ले मुझसे
Chapter 7 – सबसे खतरनाक
सबसे खतरनाक वह दिशा होती है
जिसमें आत्मा का सूरज डूब जाए
और उसकी मुर्दा धूप का कोई टुकड़ा
आपके जिस्म के पूरब में चुभ जाए।
सबसे खतरनाक वह गीत होता है
आपके कानों तक पहुँचने के लिए
जो मरसिए पढ़ता है
आतंकित लोगों के दरवाजों पर
जो गुंडे की तरह अकड़ता है।
Chapter 8 – आओ, मिलकर बचाएं
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