Most of students search over Google for Haryana Board (HBSE) Important Questions 2026. Here is the Main reason because HBSE Board Says that in HBSE Exam 2026 (last 3 Years of Questions will Repeat) so that here are the selected List of Questions of Haryana Board For Class 12.
HBSE Class 12 आरोह Important Question Answer 2026
Chapter 1 – (क) आत्म परिचय (ख) एक गीत
प्रश्न 1. ‘दिन जल्दी-जल्दी ढलता है’ कविता का उद्देश्य लिखिए। Most Important
OR
‘दिन जल्दी-जल्दी ढलता है’ कविता का मूलभाव लिखिए। Most Important
OR
‘दिन जल्दी-जल्दी ढलता है’ कविता का प्रतिपाद्य लिखिए।
उत्तर – ‘दिन जल्दी-जल्दी ढलता है’ कविता हरिवंश राय बच्चन के द्वारा रचित है जिसमें कवि ने प्रकृति के दैनिक परिवर्तन के साथ प्राणियों की भावनाओं को सुनने का प्रयास किया है। समय लगातार बदल रहा है। हर कोई समय को बचाने के लिए कोशिश करता है और अपनी मंजिल को जल्दी से पा लेना चाहता है। अपने किसी प्रिय से मिलने के लिए प्यार गतिशीलता एवं साहस पैदा कर देता है।
प्रश्न 2. दिन जल्दी-जल्दी ढलता है’ पंक्ति की आवृत्ति से कविता की किस विशेषता का पता चलता है ? Most Important
उत्तर – ‘दिन जल्दी-जल्दी ढलता है’ पंक्ति की आवृत्ति से कविता की इस विशेषता का पता चलता है कि समय हमेशा चलता रहता है। यह कभी किसी के लिए नहीं रुकता। समय के सामने जीवन क्षणभंगुर मात्र है। इसीलिए कब जीवन समाप्त हो जाए किसी को कोई पता नहीं चलता। इसीलिए प्रत्येक जीव अपना समय बचाने की कोशिश करता है और अपनी मंजिल को कम से कम समय में पा लेना चाहता है।
प्रश्न 3. ‘एक गीत’ कविता का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – “एक गीत” कविता का उद्देश्य कवि के आत्म-परिचय और उसके बाहरी दुनिया से संबंधों को स्पष्ट करना है। यह कविता दर्शाती है कि कवि सांसारिक जीवन की जिम्मेदारियाँ निभाते हुए भी प्रेम से भरा हुआ है, और अपनी धुन में मग्न रहता है, भले ही दुनिया उसे समझ न पाए। इसके अलावा, यह कविता प्रकृति के बिम्बों के माध्यम से जीवन की क्षणभंगुरता और प्रियजनों से मिलने की व्याकुलता को भी व्यक्त करती है।
Chapter 2 – पतंग
प्रश्न 1. पतंग कविता का मूलभाव स्पष्ट कीजिए। Most Important
OR
‘पतंग’ कविता का उद्देश्य लिखिए।
उत्तर – पतंग कविता आलोक धन्वा द्वारा रचित है जिसमें कवि ने बच्चों के बचपन का और उनकी खुशी और उत्साह का वर्णन किया है। कवि ने पतंग को बच्चों की उमंग के रूप में दर्शाया है। जब बच्चे बरसात के मौसम के जाने के बाद आसमान में पतंग उड़ाते हैं। तब बच्चे पतंग के साथ अपने आप को भी उड़ता हुआ महसूस करते हैं। एक और जहां शरद ऋतु का मौसम आ रहा होता है। आसमान रंग बिरंगी तितलियों से भरा होता है। वहीं दूसरी ओर बच्चे पतंग उड़ाते हुए अपनी किलकारियों से चारों तरफ खुशियां बांट रहे होते हैं। इस समय चारों तरफ खुशी का माहौल होता है।
प्रश्न 2. पतंगबाजों की मानसिकता का वर्णन कीजिए।
OR
‘पतंग के साथ-साथ वे भी उड़ रहे हैं’ बच्चों का उड़ान से कैसा संबंध बनता है?
OR
‘बच्चे पतंग के साथ उड़ रहे हैं’ पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – कवि ने यहाँ पतंग को बच्चों की कोमलता के रूप में दर्शाया है। इसीलिए बच्चों का पतंग के साथ एक अटूट संबंध होता है। जब पतंग आकाश में उड़ जाता है और इधर-उधर घूमने लगता है तो बच्चे भी अपने आप को उड़ता हुआ महसूस करने लगते हैं। बच्चे पतंग के साथ तन मन से जुड़ जाते हैं। वे पतंग को उड़ाने में इतना डूब जाते हैं कि अपने आप को पतंग समझने लगते हैं। इसीलिए कवि कहता है कि बच्चें पतंग के साथ उड़ रहे हैं।
Chapter 3 – (क) कविता के बहाने (ख) बात सीधी थी पर
प्रश्न 1. ‘बात सीधी थी पर’ कविता का मूलभाव स्पष्ट कीजिए। Most Important
OR
‘बात सीधी थी पर’ कविता में निहित संदेश स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – ‘बात सीधी थी पर’ कविता में कवि कुंवर नारायण ने रचनाकारों के ऊपर व्यंग्य किया है जो अपनी रचनाओं को प्रदान करने के लिए भाषा के साथ खिलवाड़ करते हैं। वे अपनी रचनाओं में शब्दों का जाल बनाकर पाठकों को भ्रमित करते हैं और वाह-वाही लूटते हैं। भले ही उनकी रचनाओं का मतलब पाठकों को समझ में आया हो या नहीं। कवि यहां पर कहना चाहता है कि रचनाकारों को अपनी बात सरल, सहज और स्पष्ट शब्दों में कहनी चाहिए ताकि पाठकों तक उनकी बात सहज रूप में समझ आ जाए।
प्रश्न 2. सीधी बात कहाँ तक बिगड़ी ?
OR
सीधी बात किस प्रकार पेचीदा बन जाती हैं?
उत्तर – जब भी रचनाकार अपनी रचना लिखता है तो वह कोशिश करता है कि वह अपनी बात को सहज और स्पष्ट रूप से कह सके। ऐसा ही कवि ने भी किया। उसने भाषा को तोड़ा-मरोड़ा, उल्टा-पलटा, घुमाया-फिराया और अंत में बात भाषा के चक्कर में इतनी बिगड़ गई कि उसका कोई मतलब ही नहीं रहा। इस प्रकार उसकी उलझी हुई बात प्रभावहीन हो गई।
Chapter 4 – कैमरे में बंद अपाहिज
प्रश्न 1. “कैमरे में बंद अपाहिज करुणा के मुखौटे में छिपी क्रूरता की कविता है” स्पष्ट कीजिए। Most Important
उत्तर – ‘कैमरे में बंद अपाहिज’ कविता में कवि ने शारीरिक रूप से दुर्बल व्यक्ति के प्रति करुणा का भाव प्रकट किया है जबकि टेलीविजन कैमरा वाले अपाहिज व्यक्ति के माध्यम से अपने कार्यक्रम को सफल बनाने का प्रयास कर रहे हैं। टेलीविजन वाले अपाहिज व्यक्ति से ऐसे-ऐसे सवाल पूछते हैं जिससे वह अपाहिज व्यक्ति रो दे और टेलीविजन देख रहे दर्शक भी उसका यह दुख महसूस करें। इसीलिए कैमरे में बंद अपाहिज करुणा के मुखौटे में छिपी क्रूरता की कविता है।
प्रश्न 2. ‘कैमरे में बंद अपाहिज’ कविता का सार लिखिए।
OR
‘कैमरे में बंद अपाहिज’ कविता का मूलभाव लिखिए। Most Important
उत्तर – ‘कैमरे में बंद अपाहिज’ रघुवीर सहाय द्वारा रचित कविता है जिसमें कवि ने शारीरिक चुनौतियों को झेलते लोगों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाया है। कवि ने इस कविता के माध्यम से स्पष्ट किया है कि लोग पैसे कमाने के लिए और टेलीविजन पर अपने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए किस प्रकार अपाहिज पर अत्याचार करते हैं और अपाहिज से बेतुके सवाल पूछे जाते हैं। जिससे अपाहिज पीड़ा महसूस करता है। उसका यही दुख-दर्द कैमरे में रिकॉर्ड कर बेचना चाहते हैं।
Chapter 5 – उषा
प्रश्न 1. भोर के नभ को राख से लीपा चौका क्यों कहा गया है ? Most Important
उत्तर – भोर के नभ का रंग नीला होता है। पर इसके साथ उसने हल्का सफेद रंग बिखरा होता है। सुबह के समय आकाश में हल्की नमी भी होती है। इसी प्रकार राख से लीपे हुए चौके में भी नीलिमा के साथ सफेदी का मिश्रण होता है। ताजा लीपा होने की वजह से यह भी नमी से भरा होता है। इसीलिए कवि नें भोर के नभ को राख से लीपा हुआ चौका कहा है।
प्रश्न 2. सूर्योदय से उषा का कौन-सा जादू टूट जाता है ?
OR
‘उषा’ कविता के संदर्भ में लिखिए कि ‘उषा का जादू टूटने’ से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर – उषा सूर्य के उदय होने से पहले का सुंदर दृश्य होता है जिसमें आकाश के नीले रंग में हल्की-सी सफेदी फैली होती है। धीरे-धीरे पूरा आकाश लाल होने लगता है और यह दृश्य बहुत ही अद्भुत होता है। सूर्य के उदय होने के बाद यह दृश्य खत्म हो जाता है। इसीलिए कवि कहता है कि सूर्योदय से उषा का जादू टूट जाता है।
प्रश्न 3. किन उपमानों को देखकर पता चलता है कि ‘उषा’ कविता गाँव की सुबह का गतिशील शब्दचित्र है ?
OR
‘उषा’ कविता का मूलभाव स्पष्ट कीजिए।
OR
‘उषा’ कविता में निहित प्रकृति-सौंदर्य की विवेचना कीजिए।
OR
उषा के सौंदर्य का विश्लेषण कीजिए।
OR
सूर्योदय से पहले आकाश में क्या-क्या परिवर्तन होते हैं?
OR
उषा कविता के आधार पर प्राकृतिक सौंदर्य पर प्रकाश डालिए।
उत्तर – कवि शमशेर बहादुर सिंह ने ‘उषा’ कविता में गांव की सुबह का सुंदर शब्दचित्र प्रस्तुत किया है। सूर्य के उदय होने से पहले पूर्व दिशा में आकाश नील शंख के समान प्रतीत होता है। यह दृश्य ऐसा लगता है जिस प्रकार किसी गांव की महिला ने चूल्हा जलाने के बाद राख से लीप दिया हो। कुछ देर बाद आकाश हल्की सी लाली के जैसा दिखाई पड़ता है जैसे किसी ने स्लेट पर लाल खड़िया चाक मल दी हो। इसके कुछ समय बाद सूर्योदय होता है जो जल में देखने पर ऐसा प्रतीत होता है जैसे कोई सुंदर शरीर हो। सूर्य के पूरा दिखाई देने के बाद यह सारा प्राकृतिक सौंदर्य मिट जाता है।
Chapter 6 – बादल राग
प्रश्न 1. ‘विप्लव रव से छोटे ही हैं शोभा पाते’ पंक्ति में कवि क्या स्पष्ट करना चाहता है ? Most Important
उत्तर – प्रस्तुत पंक्ति ‘विप्लव रव’ के माध्यम से कवि क्रान्ति के विद्रोह को दर्शन चाहता है। यह क्रांति ऐसे लोगों का स्वर है जो सदियों से पूंजीपति वर्ग के शोषण का शिकार होते आए हैं। ‘छोटे ही है शोभा पाते’ ऐसा इसलिए कहा है क्योंकि क्रान्ति हमेशा पूंजीपति वर्ग या शोषक वर्ग के लोगों द्वारा हो रहे शोषण से छुटकारा पाने के लिए होती है। यह क्रांति आम जनता द्वारा ही की जाती है जिससे इस क्रांति का प्रभाव जनसामान्य लोगों पर नहीं पड़ता लेकिन उच्च वर्ग इसी क्रांति से भयभीत हो जाता है। जनसामान्य लोगों को इस क्रांति के माध्यम से शोषण से बचने का मौका मिलता है इसीलिए इस क्रांति में छोटे ही शोभा पाते हैं।
प्रश्न 2. ‘बादल राग’ कविता का मूलभाव स्पष्ट कीजिए।
OR
‘बादल राग’ शीर्षक की सार्थकता को स्पष्ट कीजिए।
OR
बादल के क्रांतिकारी रूप का वर्णन कीजिए।
OR
‘बादल राग’ में निहित क्रांति की भावना पर प्रकाश डालिए।
उत्तर – कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ने कविता में बादलों को क्रांति के रूप में दर्शाया है। उनका मानना है कि समाज में पूंजीपति वर्ग हमेशा निम्न वर्ग का शोषण करता है। इन्होंने निम्न वर्ग को पूर्ण रूप से लूटकर अपने खजाने भर लिए हैं। इन्होंने किसानों के जीवन सार रूपी रक्त को चूस लिया है। इसके शोषण के कारण अब सिर्फ हड्डियां ही शेष रह गई हैं। निम्न वर्ग बहुत ही दयनीय अवस्था में आ चुका है। कवि के मन में अब पूंजीपति वर्ग के लिए नफरत और गुस्सा भरा है। कवि क्रांति के माध्यम से सभी पूंजीपतियों का साम्राज्य नष्ट कर देना चाहता है ताकि इससे जनसामान्य को सुखी जीवन मिल सके। इसीलिए पूंजीपति वर्ग को मिटाने के लिए कवि ने विप्लव के बादलों का आह्वान किया है।
Chapter 7 – (क) कवितावली (ख) लक्ष्मण मूर्छा और राम का विलाप
प्रश्न 1. राम के प्रलाप का वर्णन कीजिए। Most Important
OR
राम के प्रलाप का विश्लेषण कीजिए ।
उत्तर – मेघनाथ द्वारा लक्ष्मण को तीर लगने पर लक्ष्मण मूर्छित हो जाते हैं। यह दृश्य देख हर कोई घबरा जाता है। राम अपने भाई के पास जाकर विलाप करने लगते हैं। राम अपने भाई को उठाकर अपने हृदय से लगा लेते हैं और फूट-फूट कर रोने लगते हैं। वैद्य के कहने पर हनुमान संजीवनी बूटी लेने गया हुआ था और आधी रात बीतने तक भी हनुमान वापस नहीं आया था। हनुमान के न आने पर श्रीराम बहुत ज्यादा व्याकुल हो जाते हैं और अपने भाई को हृदय से लगाकर याद करते हुए कहते हैं कि भाई, तुम्हारा स्वभाव बहुत ही कोमल है। तुमने हमेशा दुखों में मेरी सहायता की है। तुमने तो मेरी भलाई के लिए अपने माता-पिता तक को छोड़ दिया और मेरे साथ यहां जंगलों में चले आए। तुमने मेरे साथ जंगलों की भयानक सर्दी, गर्मी, आंधी और तूफानों को भी सहन किया। तुम मेरे इन व्याकुल वचनों को सुनकर उठकर बैठ जाओ और पहले की तरह मुझसे प्यार करने लगो। यदि मुझे पता होता कि मैं वन में आकर अपने भाई को गवा दूंगा तो मैं कभी भी पिता के वचनों को नहीं मानता। इस प्रकार श्री राम अपने भाई को मूर्छित देखकर अपना दुख प्रकट करते हैं।
Chapter 8 – रुबाइयां/ गजल
प्रश्न 1. ‘गजल’ में निहित कवि की पीड़ा का चित्रण कीजिए।
OR
‘गजल’ की मूल चेतना पर प्रकाश डालिए।
OR
‘गजल’ कविता का मूल भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – ‘गजल’ में कवि ने अपनी प्रेमिका को याद करते हुए अपने दुख को दर्शाने की कोशिश की है। कवि हर समय अपनी प्रेमिका को याद करता रहता है। बहुत सारे लोग कवि को बदनाम करना चाह रहे हैं। कवि तो किस्मत के साथ ही अपना दुख बांट रहा है। कभी कवि किस्मत को रो लेता है और कभी किस्मत कवि को रो लेती है। कवि के पास उसका दुख बांटने के लिए कोई भी नहीं है। कवि की प्रिया को बिछड़े हुए बहुत समय बीत चुका है लेकिन उसकी आदत अभी भी उसे याद है। कवि जब भी उसे भूलने का प्रयास करता है तो उसे उसकी अनुभूति अधिक होने लग जाती हैं।
Chapter 9 – (क) छोटा मेरा खेत (ख) बगुलों के पंख
प्रश्न 1. ‘छोटा मेरा खेत’ कविता का मूलभाव लिखिए।
उत्तर – छोटा मेरा खेत कविता में कवि ने मनुष्य के कर्म को खेती के रूप में दर्शाने का प्रयास किया है। इस खेत में भावनात्मक आंधी के प्रभाव से किसी क्षण एक रचना विचार तथा अभिव्यक्ति का बीज बोया गया जो मूल कल्पना का सहारा बना। उसे बी से शब्दों के अंकुर निकलते हैं जो निरंतर बढ़ते हुए एक पूर्ण कृति का रूप ग्रहण कर लेते हैं। इस साहित्यिक कृति से जो अलौकिक रस धारा फूटती है वह रस धारा किसी क्षण भर में होने वाली रोपाई के परिणामस्वरुप होती है। लेकिन यह रस धारा अनंत काल तक चलने वाली खेती के समान है इसी प्रकार साहित्य का रस कभी भी खत्म नहीं होता है।
प्रश्न 2. ‘बगुलों के पंख’ कविता में कवि किसे रोकना चाहता है और क्यों ? Most Important
उत्तर – बगुला के पंख कविता में कवि संध्या के समय आकाश के घने और काले बादलों के बीच सफेद बगुलों की उड़ती हुई कतार को देखता है और उनकी सुंदरता पर मंत्र मुक्त हो जाता है। कवि उन बगुलों को बहुत देर तक देखना चाहता है। उसका मन अभी तक उनकी सुंदरता देखकर नहीं भरा है। बहुत देर तक बगुलों को देखने के लिए वह उड़ती हुई बगुलों की कतारों को रोकना चाहता है।
प्रश्न 3. ‘बगुलों के पंख’ कविता का मूलभाव लिखिए।
OR
‘बगुलों के पंख’ कविता में निहित प्राकृतिक सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – कवि एक संध्या काले घने बादलों के बीच आकाश में पंक्ति में उड़ते हुए बगुलों को देखता है जिनको देखकर वह मोहित हो जाता है। कवि चाहता है कि यह दृश्य रुक जाए और वह लगातार इन उड़ते हुए बंगलों की पंक्तियों को निहार सके। यह बगुलों की पंक्तियां कवि की आंखें चुरा कर ले जा रहे हैं अर्थात कवि का भाव यह है कि यह दृश्य मंत्रमुग्ध करने वाला है।
आरोह भाग – 2 गद्य भाग
Chapter 10 – भक्तिन
प्रश्न 1. भक्तिन के जीवन की विवेचना कीजिए। Most Important
OR
भक्तिन के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर – भक्तिन एक अधेड़ उम्र की महिला है। उसका कद छोटा और शरीर दुबला पतला है। उसके होंठ पतले हैं और आंखें छोटी-छोटी सी हैं। भक्तिन झूंसी गांव के प्रसिद्ध अहीर सुरमा की इकलौती बेटी है। उसकी मां के निधन के पश्चात उसकी विमाता ने हीं उसका पालन पोषण किया। भक्तिन अपना कार्य कर्मठता और कर्तव्य भावना से करती हैं। भक्तिन निरक्षर होते हुए भी एक समझदार महिला है। वह अपनी सूझबूझ से प्रत्येक कार्य को कर लेती हैं।
प्रश्न 2. भक्तिन के चरित्र की किन्हीं चार विशेषताओं का उल्लेख कीजिए । Most Important
उत्तर – भक्तिन के चरित्र की चार विशेषताएं निम्नलिखित हैं :-
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- भक्तिन एक कर्मठ महिला है वह अपना प्रत्येक कार्य बहुत परिश्रम के साथ करती हैं। भक्ति में सेवा भावना कूट-कूट कर भरी हुई है। वह अपने परिश्रम से हर किसी का दिल जीत लेती है।
- भक्तिन एक अधेड़ उम्र की दुबली पतली महिला है जिनका कद छोटा है।
- भक्तिन निरक्षर होते हुए भी एक समझदार महिला है वह प्रत्येक कार्य को बड़ी ही सूझबूझ के साथ पूरा कर लेती हैं।
- भक्तिन अपने व्यवहार में कभी भी कोई बदलाव नहीं करती है जबकि दूसरे को अपने व्यवहार के अनुसार ढाल देती है।
प्रश्न 3. भक्तिन के आ जाने से महादेवी अधिक देहातिन कैसे हो गईं ? Most Important
उत्तर – भक्तिन एक अनपढ़ ग्रामीण महिला थी। वह देहाती होने के साथ-साथ एक समझदार महिला भी थी। उसका स्वभाव ही ऐसा बन चुका था कि वह दूसरों को अपने मन के अनुसार बना लेना चाहती है पर अपने संबंध में किसी प्रकार के परिवर्तन की कल्पना तक उसके लिए संभव नहीं। इसीलिए भक्तिन के आ जाने से महादेवी अधिक देहातिन हो गई।
प्रश्न 4. महादेवी वर्मा ने भक्तिन में क्या दुर्गुण देखे ?
OR
‘भक्तिन अच्छी है, यह कहना कठिन होगा, क्योंकि उसमें दुर्गुणों का अभाव नहीं’ लेखिका ने ऐसा क्यों कहा होगा?
उत्तर – ‘भक्तिन अच्छी है, यह कहना कठिन होगा, क्योंकि उसमें दुर्गुणों का अभाव नहीं’ लेखिका ने ऐसा इसीलिए कहा होगा क्योंकि भक्तिन लेखिका के इधर उधर पड़े पैसे भंडारघर की किसी मटकी में छुपा देती थी। और बाद में लेखिका के पूछने पर वह कहती थी कि अपने घर में पैसे इधर-उधर रखना चोरी नहीं है। इसलिए हम कह सकते हैं कि भक्तिन सत्यवादी हरिश्चंद्र नहीं बन सकी और उसमें कुछ दुर्गुण भी थे।
Chapter 11 – बाजार दर्शन
प्रश्न 1. ‘बाजार दर्शन’ पाठ का मूलभाव स्पष्ट कीजिए। Most Important
उत्तर – ‘बाजार दर्शन’ निबंध में लेखक ने बाजार के जादू का वर्णन किया है। यह निबंध उपभोक्तावाद और बाजारवाद के मूल अंतर को समझने का प्रयास करता है। लेखक ने इस निबंध को अपने परिचित और मित्रों के अनुभवों के साथ चित्रित किया है और बताया है कि किस तरह बाजार की जादुई ताकत हमारी बुद्धि को परिवर्तित कर देती है और अपना गुलाम बना लेती है। उन्होंने साथ में यह भी बताया है कि किस तरह हम बाजार का सही प्रयोग कर सकते हैं और इसका लाभ उठा सकते हैं। लेकिन अगर हम बाजार की चमक दमक में फंस गए तो यह हमारे धन और मन दोनों को ही बेकार बना देता है।
प्रश्न 2. बाजार के जादू का वर्णन कीजिए
OR
बाजार का जादू चढ़ने और उतरने पर मनुष्य पर क्या-क्या असर पड़ता है?
उत्तर – बाजार का जादू मनुष्य की भावनाओं को बदल देता है। यह जादू चलने पर मनुष्य उसकी ओर खिंचा चला जाता है। मनुष्य को सभी सामान जरूरी और आरामदायक प्रतीत होने लगते हैं। लेकिन जब यह बाजार का जादू उतरता है तो उसे आभास होता है कि जो आरामदायक वस्तुएं उसने खरीदी थी वह अब उसे दुख पहुंचा रही हैं। इस समय मनुष्य स्वयं अपराधी जैसा महसूस करने लगता है।
प्रश्न 3. बाजार की सार्थकता पर प्रकाश डालिए।
OR
‘बाजारूपन’ से क्या तात्पर्य है? किस प्रकार के व्यक्ति बाजार को सार्थकता प्रदान करते हैं अथवा बाजार की सार्थकता किस में है।
उत्तर – बाजारूपन से तात्पर्य सद्भाव की कमी से हैं। सद्भाव की कमी के कारण आदमी सभी को भूल जाता है। उस समय मनुष्य सभी के साथ ग्राहक जैसा व्यवहार करता है चाहे कोई उसका भाई, मित्र या पड़ोसी क्यों ना हो। वह केवल अपना लाभ-हानि ही देखा है। जो व्यक्ति यह जानता है कि उसे किस वस्तु की आवश्यकता है ऐसा व्यक्ति ही बाजार को सार्थकता प्रदान कर सकता है। यह लोग कभी भी ‘पर्चेसिंग पावर’ के गर्व में नहीं डूबते।
Chapter 12 – काले मेघा पानी दे
प्रश्न 1. ‘काले मेघा पानी दे’ संस्मरण का मूलभाव स्पष्ट कीजिए। Most Important
OR
‘काले मेघा पानी दे’ पाठ के माध्यम से लेखक क्या कहना चाहता है ?
OR
काले मेघा पानी दे पाठ का प्रतिपाद्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – ‘काले मेघा पानी दे’ संस्मरण में लेखक ने लोक आस्था और विज्ञान के द्वंद्व को चित्रित किया है। लेखक ने अपने किशन जीवन के इस संस्मरण में दिखलाया है कि अनावृष्टि से छुटकारा पाने हेतु गांव के बच्चों की इंदर सेना द्वार-द्वार पानी मांगती है। लेकिन लेखक इसे पानी की बर्बादी समझता है। लेखक की जीजी इसे अंधविश्वास ने मानकर लोक आस्था और त्याग की भावना बताती हैं। लेखक के विचार अपनी जीजी से बिल्कुल नहीं मिलते और वह बार-बार जीजी के तर्कों का खंडन करता है। लेकिन जीजी की संतुष्टि के लिए वह इस रीति रिवाज को ऊपरी तौर पर मानता भी है। पाठ के अंत में लेखक ने देशभक्ति का परिचय देते हुए देश में फैले हुए भ्रष्टाचार का भी चित्रण किया है।
प्रश्न 2. धर्मवीर भारती की जीजी के संस्कारों का विश्लेषण कीजिए।
OR
धर्मवीर भारती की जीजी की धार्मिक आस्था का चित्रण कीजिए।
उत्तर – धर्मवीर भारती की जीजी बहुत अधिक धार्मिक है। वह सभी परंपराओं और रीति रिवाज को पूरी श्रद्धा के साथ मनाती हैं। वह लेखक से भी तर्क करने के उपरांत भी रीति-रिवाजों को मानने के लिए कहती हैं। लेखक की जीजी का मानना है कि जब तक हम अपने अंदर त्याग की भावना नहीं रखेंगे तब तक हमें फल की प्राप्ति नहीं होगी। लेखक की जीजी के अनुसार दान करना सबसे अधिक महत्वपूर्ण है इसके माध्यम से हम अपनी श्रद्धा को भी व्यक्त करते हैं और लोगों की भी मदद करते हैं।
Chapter 13 – पहलवान की ढोलक
प्रश्न 1. ‘पहलवान की ढोलक’ कहानी का उद्देश्य लिखिए। Most Important
OR
‘पहलवान की ढोलक’ कहानी में निहित सन्देश एवं उद्देश्य को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – प्रस्तुत कहानी में व्यवस्थाओं के परिवर्तन के पश्चात् की समस्याओं को स्पष्ट किया गया है। बदलते समय में लोक-कला और कलाकार अप्रासंगिक हो जाते हैं। प्रस्तुत कहानी में राजा साहब की जगह नए राजकुमार का आकर जम जाना सिर्फ व्यक्तिगत सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि जमीनी पुरानी व्यवस्था के पूरी तरह उलट जाने और उस पर सभ्यता के नाम पर एकदम नयी व्यवस्था के आरोपित हो जाने का प्रतीक है। लुट्टन पहलवान को लोक कलाकार के आसन से उठाकर पेट भरने के लिए हाय-तौबा करने वाली कठोर भूमि पर पटक देती है। मनुष्यता की साधना और जीवन-सौन्दर्य के लिए लोक कलाओं को प्रासंगिक बनाये रखने हेतु सबकी क्या भूमिका है ऐसे कई प्रश्नों को व्यक्त करना इस कहानी का उद्देश्य है।
प्रश्न 2. पहलवान की ढोलक का पूरे गाँव पर क्या असर होता था ? Most Important
उत्तर – जब सारे गांव में हैजा और मलेरिया नामक महामारी फैली तब पहलवान की ढोलक रात की विभीषिका को तोड़ने का काम करती थी। ढोलक की आवाज पूरे गांव वालों में धैर्य, साहस और स्फूर्ति प्रदान करती थी। ढोलक की आवाज सुनकर बच्चे, जवान और बुढों की आंखों के सामने दंगल का दृश्य होता था। इस आवाज को सुनने से लोग मृत्यु से भी नहीं डरते थे। ढोलक की आवाज सुनकर लोगों के मन में जीने की एक नई उमंग जागृत हो जाती थी।
Chapter 14 – शिरीष के फूल
प्रश्न 1. लेखक ने शिरीष को कालजयी अवधूत की तरह क्यों माना है ?
OR
शिरीष को अवधूत क्यों कहा गया है ?
उत्तर – लेखक ने शिरीष को कालजयी अवधूत की तरह इसीलिए माना है क्योंकि जिस प्रकार अवधूत मस्त, फक्कड़, सरस और मादक होते हैं उसी प्रकार शिरीष के फूल भी फक्कड़ होकर ही उपजते हैं। जैसे अवधूत विपरीत परिस्थितियों में भी संसार को जीने की प्रेरणा देते हैं उसी प्रकार भयंकर गर्मी की लू में यह फूल खिलता है और चारों ओर सुंदरता बिखेरता है। शिरीष के ऊपर गर्मी और वर्षा का कोई भी बुरा प्रभाव नहीं पड़ता है।
प्रश्न 2. ‘शिरीष के फूल’ निबंध का मूलभाव स्पष्ट कीजिए Most Important
OR
‘शिरीष के फूल’ निबंध की मूल चेतना को अपने शब्दों में लिखिए
OR
‘शिरीष के फूल’ पाठ के माध्यम से लेखक क्या कहना चाहता है
OR
‘शिरीष के फूल’ निबंध का प्रतिपाद्य स्पष्ट कीजिए
उत्तर – ‘शिरीष के फूल’ आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी द्वारा रचित निबंध लोगों को जीने की प्रेरणा देता है। लेखक ने निबंध के माध्यम से लोगों को प्रतिकूल परिस्थितियों में भी साहस और कठोरता के साथ जीवन यापन करने को कहा है। जिस प्रकार शिरीष का फूल गर्मियों के मौसम में खिलता है जब हर तरफ गर्मी, लू, आंधी और वर्षा हो रही होती है। शिरीष का फूल बाहर से सख्त दिखाई पड़ता है लेकिन अंदर से उतना ही कोमल होता है। इस मौसम में किसी और वृक्ष पर कोई फूल नहीं दिखाई पड़ते लेकिन शिरीष का फूल ऐसी स्थिति में भी खिलकर चारों ओर अपना सौंदर्य बिखेरता रहता है। यह फूल इतना कठोर होता है कि वसंत के आ जाने पर भी नहीं झड़ता है। लेखक को यह उन नेताओं की याद दिलाता है जो अपना साथ छोड़ने को तब तक तैयार नहीं होते जब तक नई पीढ़ी के लोग उन्हें धक्का मार कर नहीं धकेल देते हैं। लेखक ने मनुष्य को सीरीज के फूल के माध्यम से प्रेरणा दी है कि सुख-दुख में कभी हमें हार नहीं माननी चाहिए।
Chapter 15 – (क) श्रम विभाजन और जाति प्रथा (ख) मेरी कल्पना का आदर्श समाज
प्रश्न 1. आदर्श समाज की कल्पना का चित्रण कीजिए।
OR
आदर्श समाज की कल्पना पर प्रकाश डालिए।
उत्तर – आदर्श समाज स्वतंत्रता, समता, भ्रातृता पर आधारित होना चाहिए। किसी भी आदर्श समाज में इतनी गतिशीलता होनी चाहिए जिससे कोई भी वांछित परिवर्तन समाज के एक छोर से दूसरे तक संचारित हो सके ऐसे समाज के बहुविधि हितों में सब का भाग होना चाहिए तथा सबको उनकी रक्षा के प्रति सजग रहना चाहिए। सामाजिक जीवन में अबाध संपर्क के अनेक साधन में अवसर उपलब्ध रहने चाहिए। इसी का दूसरा नाम लोकतंत्र भी है।
प्रश्न 2. ‘जाति-प्रथा’ के आधार पर श्रम विभाजन को स्वाभाविक क्यों नहीं माना गया ? Most Important
उत्तर – जाति प्रथा को यदि श्रम विभाजन मान लिया जाए तो यह स्वाभाविक विभाजन नहीं है क्योंकि यह मनुष्य की रुचि पर आधारित नहीं है। कुशल व्यक्ति श्रमिक समाज का निर्माण करने के लिए यह आवश्यक है कि हम व्यक्तियों की क्षमता इस सीमा तक विकसित करें जिससे वह अपना कार्य का चुनाव स्वयं कर सके। लेकिन वास्तविकता में जाति प्रथा का सिद्धांत यह है कि बिना किसी की निजी क्षमता का विचार किए पहले से ही मनुष्य का पेशा निर्धारित कर दिया जाता है।
प्रश्न 3. ‘श्रम विभाजन और जाति प्रथा’ पाठ का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए।
OR
श्रम विभाजन और जाति-प्रथा’ पाठ का सारांश लिखें।
उत्तर – जाति-प्रथा श्रम-विभाजन का ही एक रूप है। लोग भूल जाते हैं कि श्रम-विभाजन श्रमिक-विभाजन नहीं है। श्रम-विभाजन निस्संदेह आधुनिक युग की आवश्यकता है, श्रमिक-विभाजन नहीं। जाति-प्रथा श्रमिकों का अस्वाभाविक विभाजन और इनमें ऊँच-नीच का भेद करती है। वस्तुत: जाति-प्रथा को श्रम-विभाजन नहीं माना जा सकता क्योंकि श्रम-विभाजन मनुष्य की रूचि पर होता है, जबकि जाति-प्रथा मनुष्य पर जन्म के आधार पर पेशा थोप देती है। मनुष्य की रूचि-अरूचि इसमें कोई मायने नहीं रखती। ऐसी हालत में न कुशलता आती है न श्रेष्ठ उत्पादन होता है। चूँकि व्यवसाय में, ऊँच-नीच होता रहता है, अतः जरूरी है पेशा बदलने का विकल्प। चूँकि जाति-प्रथा में पेशा बदलने की गुंजाइश नहीं है, इसलिए यह प्रथा गरीबी और उत्पीडन तथा बेरोजगारी को जन्म देती है। आदर्श समाज स्वतंत्रता, समता, भ्रातृता पर आधारित होता है।