Most of students search over Google for Haryana Board (HBSE) Important Questions 2026. Here is the Main reason because HBSE Board Says that in HBSE Exam 2026 (last 3 Years of Questions will Repeat) so that here are the selected List of Questions of Haryana Board For Class 9.
HBSE Class 9 भूगोल Important Question Answer 2026
प्रश्न 1. उन देशों के नाम बताइए जो क्षेत्रफल में भारत से बड़े हैं ?
Ans – भारत से बड़े क्षेत्रफल वाले देश हैं:
1. रूस
2. कनाडा
3. संयुक्त राज्य अमेरिका
4. चीन
5. ब्राज़ील
6. ऑस्ट्रेलिया
प्रश्न 2. दक्षिण में समुद्र पार हमारे पड़ोसी दो द्वीप समूह राष्ट्रों के नाम बताइए।
Ans – दक्षिण में समुद्र पार स्थित हमारे दो द्वीप राष्ट्र हैं:
1. श्रीलंका
2. मालदी
प्रश्न 3. क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का संसार में, कौन-सा स्थान है ?
Ans – क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का संसार में सातवाँ स्थान है।
प्रश्न 4. भारत का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल कितना है ?
Ans – भारत का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल लगभग 32.8 लाख वर्ग किलोमीटर (3.28 मिलियन वर्ग किलोमीटर) है।
प्रश्न 5. भारत का अक्षांशीय विस्तार बताइए।
Ans – भारत का अक्षांशीय विस्तार 8°4′ उत्तरी अक्षांश से 37°6′ उत्तरी अक्षांश तक है।
प्रश्न 6. भारत के मध्य से कौन सी अक्षांश रेखा गुजरती है ?
Ans – The Tropic of Cancer (23°30′ North latitude) passes almost through the middle of India.
प्रश्न 7. स्वेज नहर कब खुली ?
Ans – 1869
Chapter 2 भारत का भौतिक स्वरूप
प्रश्न 1. भारत के उत्तरी मैदान का वर्णन कीजिए। Most Important
Ans – भारत का उत्तरी मैदान भारत के प्रमुख भौतिक विभाजनों में से एक है।
1. निर्माण:
इसका निर्माण सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों तथा उनकी सहायक नदियों द्वारा लाए गए जलोढ़ निक्षेपों से हुआ है।
2. विस्तार:
यह मैदान पश्चिम में पंजाब से पूर्व में असम तक फैला हुआ है।
3. आकार:
उत्तरी मैदान लगभग 7 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। इसकी औसत चौड़ाई लगभग 240–320 किमी है।
4. स्थलाकृति और उपजाऊपन:
यह क्षेत्र समतल और अत्यंत उपजाऊ है क्योंकि यहाँ जलोढ़ मिट्टी पाई जाती है। यह कृषि के लिए उपयुक्त है।
5. विभाजन:
इसे तीन भागों में बाँटा गया है—
(i) पंजाब का मैदान
(ii) गंगा का मैदान
(iii) ब्रह्मपुत्र का मैदान
इस प्रकार, उत्तरी मैदान सघन जनसंख्या वाला और कृषि की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है।
प्रश्न 2. भारत के प्रमुख भू-आकृतिक विभाग कौन से हैं? हिमालय क्षेत्र की भू-आकृति का वर्णन कीजिए।
Ans – भारत के छह प्रमुख भू-आकृतिक विभाग हैं:
1. हिमालय पर्वत
2. उत्तरी मैदान
3. प्रायद्वीपीय पठार
4. भारतीय मरुस्थल
5. तटीय मैदान
6. द्वीप समूह
हिमालय क्षेत्र की भू-आकृति
हिमालय पर्वत संसार के नवीनतम और ऊँचे वलित पर्वत हैं। ये भारत के उत्तर में प्राकृतिक सीमा का निर्माण करते हैं।
1. विस्तार
इनका विस्तार पश्चिम में सिंधु नदी से पूर्व में ब्रह्मपुत्र नदी तक है।
2. संरचना
हिमालय तीन समानांतर श्रेणियों में विभाजित है—
(i) हिमाद्रि (महान हिमालय)
- उत्तरीतम श्रेणी।
- सबसे ऊँची चोटियाँ यहीं स्थित हैं।
- औसत ऊँचाई लगभग 6,000 मीटर।
- सदैव हिमाच्छादित।
(ii) हिमाचल (लघु हिमालय)
- हिमाद्रि के दक्षिण में स्थित।
- घाटियों और पर्वतीय पर्यटन स्थलों के लिए प्रसिद्ध।
(iii) शिवालिक (बाहरी हिमालय)
- सबसे दक्षिणी श्रेणी।
- असंयोजित अवसादों से निर्मित।
- हिमाचल और शिवालिक के बीच की घाटियों को ‘दून’ कहा जाता है।
3. महत्व
- जलवायु को प्रभावित करते हैं।
- अनेक सदानीरा नदियों का उद्गम स्थल हैं।
- मध्य एशिया की शीत हवाओं से भारत की रक्षा करते हैं।
प्रश्न 3. भारत के प्रमुख भू-आकृतिक विभाग कौन-से हैं ? हिमालय क्षेत्र तथा प्रायद्वीपीय पठार के उच्चावच लक्षणों में क्या अन्तर है ? Most Important
OR
भारत के प्रमुख भू-आकृतिक विभाग कौन-से हैं ? हिमालय क्षेत्र तथा प्रायद्वीप पठार के उच्चावच लक्षणों में क्या अन्तर है ?
Ans – भारत के छह प्रमुख भू-आकृतिक विभाग हैं—
1. हिमालय पर्वत
2. उत्तरी मैदान
3. प्रायद्वीपीय पठार
4. भारतीय मरुस्थल
5. तटीय मैदान
6. द्वीप समूह
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आधार |
हिमालय क्षेत्र |
प्रायद्वीपीय पठार |
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उत्पत्ति |
नवीन वलित पर्वत |
प्राचीन क्रिस्टलीय एवं आग्नेय चट्टानें |
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आयु |
भूगर्भीय दृष्टि से नवीन |
अत्यंत प्राचीन स्थलखंड |
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उच्चावच |
ऊँचे, दुर्गम और असमतल पर्वत |
विस्तृत पठार एवं गोलाकार पहाड़ियाँ |
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ऊँचाई |
बहुत अधिक (कई चोटियाँ 6,000 मीटर से अधिक) |
सामान्यतः 600–900 मीटर |
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संरचना |
तीन समानांतर श्रेणियाँ |
कठोर चट्टानों से बना समतल भाग |
|
नदियाँ |
गंगा और ब्रह्मपुत्र जैसी सदानीरा नदियाँ |
नदियाँ प्रायः मौसमी और चौड़ी घाटियों वाली |
इस प्रकार, हिमालय क्षेत्र नवीन एवं ऊँचा पर्वतीय क्षेत्र है, जबकि प्रायद्वीपीय पठार प्राचीन, स्थिर तथा अपेक्षाकृत समतल भू-भाग है।
प्रश्न 4. हिमालय के तीन प्रमुख विभागों के नाम उत्तर से दक्षिण के क्रम में बताइए ।
Ans – हिमाद्रि (महान हिमालय)
हिमाचल (लघु हिमालय)
शिवालिक (बाहरी हिमालय)
प्रश्न 5. ‘भाबर’ क्या है ?
Ans – भाबर शिवालिक पर्वतमाला की तलहटी के साथ स्थित एक संकीर्ण भू-भाग है।
1. इसकी चौड़ाई लगभग 8 से 16 किमी होती है।
2. इसका निर्माण हिमालय से उतरने वाली नदियों द्वारा लाए गए कंकड़ और मोटे अवसादों के निक्षेप से हुआ है।
3. यहाँ की भूमि छिद्रयुक्त होने के कारण नदियाँ भूमि के भीतर लुप्त हो जाती हैं।
Chapter 3 – अपवाह
प्रश्न 1. हिमालय तथा प्रायद्वीपीय नदियों के मुख्य अन्तरों को स्पष्ट कीजिए।
Ans –
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आधार |
हिमालयी नदियाँ |
प्रायद्वीपीय नदियाँ |
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उद्गम |
हिमालय पर्वत से निकलती हैं |
प्रायद्वीपीय पठार से निकलती हैं |
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प्रकृति |
सदानीरा (साल भर बहने वाली) |
प्रायः मौसमी |
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जल का स्रोत |
हिमपात और वर्षा |
मुख्यतः वर्षा |
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लंबाई एवं अपवाह क्षेत्र |
लंबी नदियाँ, विस्तृत अपवाह क्षेत्र |
छोटी नदियाँ, सीमित अपवाह क्षेत्र |
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प्रवाह का स्वरूप |
घुमावदार मार्ग, ऑक्स-बो झीलें और विशाल डेल्टा बनाती हैं |
कठोर चट्टानों से बहती हैं, जलप्रपात और मुहाना बनाती हैं |
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उदाहरण |
गंगा, ब्रह्मपुत्र |
गोदावरी, कृष्णा |
प्रश्न 2. किसी देश की अर्थव्यवस्था के लिए नदियाँ महत्त्वपूर्ण क्यों हैं ?
Ans – किसी देश की अर्थव्यवस्था के लिए नदियाँ निम्न कारणों से अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं—
1. सिंचाई:
नदियाँ कृषि के लिए जल प्रदान करती हैं, जो भारत का मुख्य व्यवसाय है।
2. जलविद्युत उत्पादन:
बाँधों और परियोजनाओं के माध्यम से नदियाँ जलविद्युत उत्पादन में सहायक हैं।
3. परिवहन:
नदियाँ अंतर्देशीय जलमार्ग के रूप में कार्य करती हैं और वस्तुओं व लोगों के परिवहन में सहायक हैं।
4. उद्योग:
अनेक उद्योग नदियों के किनारे स्थापित होते हैं क्योंकि उन्हें जल की आवश्यकता होती है।
5. मत्स्य पालन एवं आजीविका:
नदियाँ मत्स्य पालन को बढ़ावा देती हैं और अनेक लोगों को रोजगार प्रदान करती हैं।
इस प्रकार, नदियाँ किसी देश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं
प्रश्न 3. भूगर्भीय प्लेटें क्या हैं ? Most Important
Ans – भूगर्भीय प्लेटें, जिन्हें लिथोस्फेरिक प्लेटें भी कहा जाता है, पृथ्वी के स्थलमंडल के बड़े कठोर खंड होते हैं।
1. पृथ्वी की बाहरी परत (भूपर्पटी) और मैंटल का ऊपरी भाग मिलकर स्थलमंडल बनाते हैं।
2. यह स्थलमंडल कई बड़ी और छोटी प्लेटों में विभाजित है।
3. ये प्लेटें अर्ध-द्रव अवस्था वाली परत (एस्थेनोस्फीयर) पर धीरे-धीरे तैरती और गतिशील रहती हैं।
4. इन प्लेटों की गति से भूकंप, ज्वालामुखी क्रिया और पर्वत निर्माण होता है।
Chapter – 4 जलवायु
प्रश्न 1. जलवायु क्या है ? जलवायु के मुख्य तत्त्व कौन-से हैं ?
Ans – जलवायु किसी विस्तृत क्षेत्र के दीर्घकालीन (लगभग 30 वर्ष या अधिक) औसत मौसमीय दशाओं को कहते हैं।
मौसम दिन-प्रतिदिन की स्थिति को दर्शाता है, जबकि जलवायु दीर्घकालीन पैटर्न को बताती है।
जलवायु के मुख्य तत्त्व
जलवायु के प्रमुख तत्त्व हैं—
1. तापमान – वायु की गर्मी या ठंडक की मात्रा।
2. वायुदाब – वायु के भार द्वारा उत्पन्न दाब।
3. पवन – उच्च दाब क्षेत्र से निम्न दाब क्षेत्र की ओर वायु का प्रवाह।
4. आर्द्रता – वायु में उपस्थित जलवाष्प की मात्रा।
5. वर्षण – वर्षा, हिमपात या ओलों के रूप में गिरने वाली नमी।
प्रश्न 2. जेट धाराएँ क्या है तथा वे किस प्रकार भारत की जलवायु को प्रभावित करती हैं ? Most Important
Ans – जेट धाराएँ ऊपरी क्षोभमंडल (लगभग 12,000 मीटर ऊँचाई) में बहने वाली तीव्र गति की संकीर्ण वायु धाराएँ हैं।
ये प्रायः पश्चिम से पूर्व दिशा में बहती हैं।
भारत की जलवायु पर जेट धाराओं का प्रभाव
1. पश्चिमी विक्षोभ (शीत ऋतु):
उपोष्णकटिबंधीय पश्चिमी जेट धारा उत्तर-पश्चिम भारत में पश्चिमी विक्षोभ लाती है।
इससे उत्तरी मैदानों में शीतकालीन वर्षा तथा हिमालय में हिमपात होता है।
2. मानसून का आगमन:
ग्रीष्म ऋतु में उपोष्णकटिबंधीय पश्चिमी जेट उत्तर की ओर खिसक जाती है।
इससे दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन में सहायता मिलती है।
3. उष्णकटिबंधीय पूर्वी जेट:
ग्रीष्म ऋतु में भारतीय प्रायद्वीप के ऊपर उष्णकटिबंधीय पूर्वी जेट धारा विकसित होती है, जो मानसूनी वर्षा में सहायक होती है।
इस प्रकार, जेट धाराएँ भारत में वर्षा के समय और वितरण को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
प्रश्न 3. मानसून अभिक्रिया की व्याख्या कीजिए।
Ans – मानसून अभिक्रिया
मानसून अभिक्रिया से तात्पर्य भारतीय उपमहाद्वीप में ऋतु के अनुसार पवनों की दिशा में परिवर्तन से है, जिससे वर्षा होती है।
मानसून अभिक्रिया के प्रमुख कारण
1. स्थल और जल का भिन्न-भिन्न ताप ग्रहण:
ग्रीष्म ऋतु में स्थल जल की अपेक्षा अधिक गर्म हो जाता है, जिससे उत्तर-पश्चिम भारत में निम्न दाब तथा हिंद महासागर में उच्च दाब बनता है।
2. आईटीसीज़ेड का उत्तर की ओर खिसकना:
ग्रीष्म ऋतु में अंतःउष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र गंगा के मैदान की ओर उत्तर में खिसक जाता है।
3. उच्च दाब क्षेत्र की उपस्थिति:
दक्षिणी हिंद महासागर में बना उच्च दाब क्षेत्र दक्षिण-पश्चिम मानसूनी पवनों को भारत की ओर प्रेरित करता है।
4. जेट धाराएँ:
उपोष्णकटिबंधीय पश्चिमी जेट धारा के उत्तर की ओर खिसकने से मानसून के आगमन में सहायता मिलती है।
इस प्रकार, समुद्र से स्थल की ओर नमी युक्त पवनें चलती हैं और भारत में वर्षा करती हैं।
प्रश्न 4. शीत ऋतु की अवस्था एवं उसकी विशेषताएँ बताइए।
Ans – शीत ऋतु (शीतकालीन अवस्था) भारत में
भारत में शीत ऋतु मध्य नवंबर से फरवरी तक रहती है।
दिसंबर और जनवरी सबसे ठंडे महीने होते हैं, विशेषकर उत्तरी भारत में।
मुख्य विशेषताएँ
1. निम्न तापमान:
दक्षिण से उत्तर की ओर तापमान घटता है। उत्तरी मैदानों में शीत लहर चलती है।
2. उच्च दाब और पवनें:
उत्तरी भारत में उच्च दाब क्षेत्र बनता है।
पवनें स्थल से समुद्र की ओर उत्तर-पूर्वी व्यापारिक पवनों के रूप में चलती हैं।
3. स्वच्छ आकाश और शुष्क मौसम:
मौसम सामान्यतः शुष्क रहता है तथा आकाश साफ रहता है।
4. पश्चिमी विक्षोभ:
पश्चिमी विक्षोभ के कारण उत्तर-पश्चिम भारत में हल्की वर्षा तथा हिमालय में हिमपात होता है।
5. तमिलनाडु में वर्षा:
उत्तर-पूर्वी मानसूनी पवनों के कारण तमिलनाडु तट पर वर्षा होती है।
इस प्रकार, शीत ऋतु ठंडे और शुष्क मौसम की होती है, जिसमें कुछ क्षेत्रों में हल्की वर्षा भी होती है।
प्रश्न 5. भारत में होने वाली मॉनसून वर्षा की विशेषताएँ बताइए।
Ans – भारत में मानसूनी वर्षा की विशेषताएँ
1. ऋतु आधारित वर्षा:
अधिकांश वर्षा जून से सितंबर के बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून के समय होती है।
2. असमान वितरण:
वर्षा समान रूप से वितरित नहीं होती। कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा होती है, जबकि कुछ में बहुत कम।
3. अनिश्चितता:
मानसून की वर्षा अनिश्चित होती है और वर्ष-प्रतिवर्ष बदलती रहती है, जिससे बाढ़ या सूखा पड़ सकता है।
4. संकेन्द्रित वर्षा:
वार्षिक वर्षा का अधिकांश भाग केवल 3–4 महीनों में प्राप्त होता है।
5. मानसून में विराम:
वर्षा ऋतु के दौरान शुष्क अवधि आती है, जिसे ‘मानसून का विराम’ कहते हैं।
6. पर्वतीय वर्षा:
पश्चिमी घाट तथा हिमालय के पवनाभिमुख भागों में स्थलाकृति के कारण अधिक वर्षा होती है।
इस प्रकार, मानसूनी वर्षा भारत की कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 6. भारत के किस स्थान पर संसार की सर्वाधिक वर्षा आलेखित की गई है ?
Ans – संसार में सर्वाधिक वर्षा मौसिनराम, जो मेघालय राज्य में स्थित है, में दर्ज की गई है।
प्रश्न 7. गंगा की दो मुख्य धाराओं के नाम लिखिए। ये कहाँ पर एक-दूसरे से मिलकर गंगा नदी का निर्माण करती हैं?
Ans – गंगा नदी की दो मुख्य धाराएँ हैं—
1. भागीरथी
2. अलकनंदा
ये दोनों नदियाँ उत्तराखंड में देवप्रयाग नामक स्थान पर मिलती हैं।
देवप्रयाग में संगम के बाद इसे गंगा नदी कहा जाता है।
प्रश्न 8. भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले कौन-कौन-से कारक हैं?
Ans – भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक
अक्षांश:
कर्क रेखा भारत के लगभग मध्य से गुजरती है।
इसके दक्षिण का भाग उष्णकटिबंधीय तथा उत्तर का भाग उपोष्णकटिबंधीय जलवायु वाला है।
1. ऊँचाई:
ऊँचाई बढ़ने पर तापमान घटता है।
इसलिए पर्वतीय क्षेत्र मैदानी क्षेत्रों की अपेक्षा ठंडे होते हैं।
2. वायुदाब एवं पवनें:
दाब और पवनों का वितरण, विशेषकर मानसूनी पवनें, वर्षा को प्रभावित करती हैं।
3. समुद्र से दूरी (महाद्वीपीयता):
तटीय क्षेत्रों की जलवायु सम होती है, जबकि आंतरिक भागों में अत्यधिक तापांतर पाया जाता है।
4. महासागरीय धाराएँ:
महासागरीय धाराएँ तटीय क्षेत्रों के तापमान को प्रभावित करती हैं।
5. स्थलाकृति:
हिमालय पर्वत मध्य एशिया की शीत हवाओं को रोकते हैं तथा मानसूनी पवनों को अवरुद्ध कर वर्षा कराते हैं।
इस प्रकार, ये सभी कारक मिलकर भारत की जलवायु का निर्माण करते हैं।
Chapter 5 – प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य प्राणी
प्रश्न 1. उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन और पर्णपाती वनों में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Ans –
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आधार |
उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन |
उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन |
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वर्षा |
200 सेमी से अधिक |
70–200 सेमी के बीच |
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वृक्षों का स्वभाव |
वृक्ष एक साथ पत्तियाँ नहीं गिराते; वर्षभर हरे रहते हैं |
शुष्क ऋतु में पत्तियाँ झड़ जाती हैं |
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घनत्व |
अत्यंत घने वन |
अपेक्षाकृत कम घने |
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जलवायु |
गर्म और अधिक वर्षा वाले क्षेत्र |
स्पष्ट आर्द्र और शुष्क ऋतु वाले क्षेत्र |
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मुख्य वृक्ष |
आबनूस, महोगनी, रोजवुड |
सागौन, साल, शीशम |
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क्षेत्र |
पश्चिमी घाट, अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह, उत्तर-पूर्व भारत |
उत्तरी मैदान, मध्य भारत, दक्कन पठार के भाग |
प्रश्न 2. भारत में विभिन्न प्रकार की पाई जाने वाली वनस्पति के नाम बताएँ और अधिक ऊँचाई पर पाई जाने वाली वनस्पति का ब्यौरा दीजिए। Most Important
Ans – भारत में पाई जाने वाली प्रमुख प्राकृतिक वनस्पति के प्रकार
एनसीईआरटी के अनुसार भारत में प्राकृतिक वनस्पति के पाँच प्रमुख प्रकार हैं—
1. उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन
2. उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन
3. उष्णकटिबंधीय कंटीले वन एवं झाड़ियाँ
4. पर्वतीय वन
5. मैंग्रोव वन
ऊँचाई बढ़ने पर तापमान और वर्षा के अनुसार वनस्पति में परिवर्तन होता है।
हिमालय क्षेत्र में ऊँचाई के अनुसार स्पष्ट परिवर्तन देखा जाता है—
1. 1000–2000 मीटर:
समशीतोष्ण वन, जिनमें ओक और चेस्टनट जैसे वृक्ष पाए जाते हैं।
2. 1500–3000 मीटर:
शंकुधारी वन, जिनमें चीड़, देवदार, सिल्वर फर और स्प्रूस पाए जाते हैं।
3. 3600 मीटर से ऊपर:
अल्पाइन वनस्पति पाई जाती है। यहाँ वृक्षों के स्थान पर झाड़ियाँ और घास मिलती हैं।
4. 4000 मीटर से ऊपर:
केवल काई और लाइकेन पाए जाते हैं।
इस प्रकार, अधिक ऊँचाई पर उष्णकटिबंधीय वनस्पति के स्थान पर समशीतोष्ण और फिर अल्पाइन वनस्पति मिलती है।
प्रश्न 3. जीवमंडल निचय से क्या अभिप्राय है ? कोई दो उदाहरण दीजिए।
Ans – जीवमंडल निचय का अर्थ
जीवमंडल निचय एक विस्तृत संरक्षित क्षेत्र होता है, जहाँ जैव विविधता (पौधे, पशु और सूक्ष्मजीव) के संरक्षण के लिए व्यवस्था की जाती है।
इसके मुख्य उद्देश्य हैं—
1. वनस्पति और जीव-जंतुओं का संरक्षण।
2. अनुसंधान एवं सतत विकास को बढ़ावा देना।
उदाहरण (कोई दो):
1. नीलगिरि जीवमंडल निचय
2. नंदा देवी जीवमंडल निच
प्रश्न 4. पारिस्थितिक तंत्र किसे कहते है ?
Ans – पारिस्थितिक तंत्र का अर्थ
पारिस्थितिक तंत्र वह तंत्र है, जिसमें जीवित जीव (पौधे, पशु और सूक्ष्मजीव) आपस में तथा अपने भौतिक पर्यावरण (वायु, जल, मृदा) के साथ परस्पर क्रिया करते हैं।
इसके दो मुख्य घटक होते हैं—
1. जैविक घटक – पौधे, पशु और सूक्ष्मजीव।
2. अजैविक घटक – वायु, जल, मृदा और सूर्य का प्रकाश।
इस प्रकार, पारिस्थितिक तंत्र जैविक और अजैविक घटकों का परस्पर संबंधयुक्त तंत्र है।
प्रश्न 5. ‘जीवोम’ किसे कहते हैं ?
Ans – जीवोम का अर्थ
जीवोम एक विशाल स्थलीय पारिस्थितिक तंत्र है, जिसकी विशेष पहचान उसकी विशिष्ट वनस्पति और जीव-जंतु होते हैं।
1. जीवोम एक विस्तृत क्षेत्र में समान जलवायु दशाओं से संबंधित होता है।
2. इसमें विशेष प्रकार के पौधे और पशु समुदाय पाए जाते हैं।
3. तापमान और वर्षा जैसी जलवायु दशाएँ जीवोम के प्रकार को निर्धारित करती हैं।
इस प्रकार, जीवोम एक प्रमुख पारिस्थितिक क्षेत्र है, जिसमें समान जलवायु तथा विशिष्ट वनस्पति और जीव-जंतु पाए जाते हैं।
प्रश्न 6. सिमलीपाल जीव मंडल निचय कौन-से राज्य में स्थित है ?
Ans – सिमलीपाल जीव मंडल निचय ओडिशा राज्य में स्थित है।
प्रश्न 7. अरावली (पर्वत श्रृंखला) कहाँ स्थित है ?
Ans – अरावली पर्वत श्रृंखला उत्तर-पश्चिमी भारत में स्थित है।
यह मुख्य रूप से राजस्थान राज्य में फैली हुई है तथा हरियाणा और गुजरात तक विस्तृत है।
प्रश्न 8. पर्वतीय वन कहाँ पाए जाते हैं ?
Ans – पर्वतीय वन ऊँचाई वाले पर्वतीय क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
1. ये मुख्य रूप से हिमालय पर्वत में पाए जाते हैं।
2. दक्षिण भारत की पहाड़ियों जैसे पश्चिमी घाट और नीलगिरि पहाड़ियों में भी मिलते हैं।
3. ऊँचाई बढ़ने के साथ वनस्पति का प्रकार बदलता जाता है।
इस प्रकार, पर्वतीय वन उन क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहाँ ऊँचाई के कारण तापमान कम होता है
प्रश्न 9. नीलगिरी जीवमंडल निचय किस राज्य में स्थित हैं ?
Ans – नीलगिरी जीवमंडल निचय मुख्य रूप से तमिलनाडु राज्य में स्थित है।
यह केरल और कर्नाटक राज्यों में भी फैला हुआ है।
प्रश्न 10. भारत में जीव सुरक्षा अधिनियम कब लागू किया गया था ?
Ans – 1972
Chapter 6 – जनसंख्या
प्रश्न 1. जनसंख्या में होने वाले परिवर्तन की मुख्य प्रक्रियाएँ कौन-सी है ? व्याख्या कीजिए।
Ans – जनसंख्या में परिवर्तन की मुख्य प्रक्रियाएँ
जनसंख्या परिवर्तन से तात्पर्य किसी क्षेत्र में लोगों की संख्या में वृद्धि या कमी से है।
एनसीईआरटी के अनुसार जनसंख्या परिवर्तन की तीन मुख्य प्रक्रियाएँ हैं—
1. जन्म दर (Natality):
एक वर्ष में प्रति हजार व्यक्तियों पर होने वाले जीवित जन्मों की संख्या।
अधिक जन्म दर से जनसंख्या बढ़ती है।
2. मृत्यु दर (Mortality):
एक वर्ष में प्रति हजार व्यक्तियों पर होने वाली मृत्यु की संख्या।
अधिक मृत्यु दर से जनसंख्या घटती है।
3. प्रवास (Migration):
लोगों का एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना।
o आप्रवासन से जनसंख्या बढ़ती है।
o उत्प्रवासन से जनसंख्या घटती है।
इस प्रकार, जन्म दर, मृत्यु दर और प्रवास के संयुक्त प्रभाव से जनसंख्या में परिवर्तन होता है
प्रश्न 2. राष्ट्रीय जनसंख्या नीति की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं ? Most Important
Ans – राष्ट्रीय जनसंख्या नीति (2000) की मुख्य विशेषताएँ
भारत ने जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने और जीवन स्तर सुधारने के लिए राष्ट्रीय जनसंख्या नीति 2000 घोषित की।
इसकी मुख्य विशेषताएँ हैं—
1. तात्कालिक उद्देश्य:
गर्भनिरोधक साधनों, स्वास्थ्य सुविधाओं और स्वास्थ्य कर्मियों की आवश्यकताओं को पूरा करना।
2. मध्यम अवधि का उद्देश्य:
कुल प्रजनन दर (TFR) को प्रतिस्थापन स्तर (2.1) तक लाना।
3. दीर्घकालीन उद्देश्य:
वर्ष 2045 तक जनसंख्या स्थिरीकरण प्राप्त करना।
4. निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा:
14 वर्ष तक की आयु के बच्चों के लिए शिक्षा को निःशुल्क और अनिवार्य बनाना।
5. शिशु मृत्यु दर में कमी:
शिशु मृत्यु दर को कम करना तथा मातृ स्वास्थ्य में सुधार करना।
6. छोटे परिवार को प्रोत्साहन:
विलंबित विवाह और उत्तरदायी मातृत्व-पितृत्व को बढ़ावा देना।
इस प्रकार, यह नीति स्वास्थ्य, शिक्षा और सशक्तिकरण के माध्यम से जनसंख्या नियंत्रण पर बल देती है।
प्रश्न 3. जनसंख्या वृद्धि एवं जनसंख्या परिवर्तन के बीच अंतर स्पष्ट करें।
Ans –
|
आधार |
जनसंख्या वृद्धि |
जनसंख्या परिवर्तन |
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अर्थ |
किसी क्षेत्र में एक अवधि के दौरान लोगों की संख्या में वृद्धि |
किसी क्षेत्र में लोगों की संख्या में वृद्धि या कमी |
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स्वरूप |
केवल वृद्धि को दर्शाता है |
वृद्धि और कमी दोनों को दर्शाता है |
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कारण |
मुख्यतः जन्म दर मृत्यु दर से अधिक होने के कारण |
जन्म दर, मृत्यु दर और प्रवास के कारण |
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परिधि |
सीमित अवधारणा |
व्यापक अवधारणा |